संस्थान ने 2023 से 2025 के प्रशिक्षण कार्यक्रमों और मानदेय भुगतान के अभिलेख उपलब्ध होने की बात कही; प्रसारित खबर के निष्कर्षों पर BIPARD ने अपना पक्ष रखा
Patna News: बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (BIPARD) में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के दौरान अधिकारियों और विशेषज्ञों को मानदेय भुगतान से संबंधित खबर के बाद संस्थान ने अपना स्पष्टीकरण जारी किया है। BIPARD ने कहा है कि प्रसारित खबर में संस्थान की प्रशिक्षण व्यवस्था और मानदेय भुगतान की पूरी प्रक्रिया को समग्र रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया है। हालांकि, संस्थान ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों और भुगतान से संबंधित अभिलेख उपलब्ध हैं, जिनके आधार पर संबंधित मामलों का सत्यापन किया जा सकता है।
क्या है BIPARD का पक्ष?
BIPARD के अनुसार संस्थान में विभिन्न सेवाओं के अधिकारियों और अन्य प्रशिक्षणार्थियों के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली, सरकारी नियमों एवं प्रक्रियाओं तथा क्षेत्रीय प्रशासन से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी देना है।
संस्थान का कहना है कि प्रशिक्षण के विषय और आवश्यकता के अनुसार अनुभवी सरकारी अधिकारियों के अलावा गैर-सरकारी विशेषज्ञों और प्रोफेशनल्स को भी प्रशिक्षण सत्र के लिए आमंत्रित किया जाता है।
BIPARD के मुताबिक प्रशासनिक प्रशिक्षण में कार्यरत एवं अनुभवी अधिकारियों का उपयोग इसलिए किया जाता है ताकि प्रशिक्षणार्थियों को सरकारी व्यवस्था के वास्तविक अनुभव, नियमों के व्यावहारिक अनुप्रयोग और क्षेत्रीय स्तर की चुनौतियों की जानकारी मिल सके।
मानदेय भुगतान को लेकर संस्थान की सफाई
मानदेय भुगतान के संबंध में BIPARD ने कहा है कि प्रशिक्षकों को उनके द्वारा वास्तव में लिए गए प्रशिक्षण सत्रों के आधार पर भुगतान किया जाता है। इसके लिए निर्धारित नियमों और स्वीकृत मानदंडों के अनुसार दरें लागू होती हैं।
संस्थान के अनुसार संबंधित प्रशिक्षक की पात्रता, पद या पे-लेवल तथा उनके द्वारा लिए गए प्रशिक्षण सत्रों की संख्या के आधार पर मानदेय निर्धारित किया जाता है। भुगतान निर्धारित प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन माध्यम से किया जाता है।
BIPARD ने स्पष्ट किया है कि बिना प्रशिक्षण सत्र लिए या वास्तविक रूप से लिए गए सत्रों से अधिक संख्या के आधार पर मानदेय भुगतान करने की कोई व्यवस्था नहीं है।
2023 से 2025 तक के रिकॉर्ड का हवाला
संस्थान ने बताया कि वर्ष 2023 से 2025 के बीच आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों से संबंधित विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। इनमें प्रशिक्षण कार्यक्रमों, प्रशिक्षकों द्वारा लिए गए सत्रों और उनके अनुरूप किए गए मानदेय भुगतान का विवरण संधारित है।
BIPARD के अनुसार इन अभिलेखों के आधार पर यह देखा जा सकता है कि किसी प्रशिक्षक ने किस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कितने सत्र लिए और उन सत्रों के आधार पर कितना मानदेय देय एवं भुगतान किया गया।
गैर-सरकारी विशेषज्ञों की भी ली जाती है सेवाएं
संस्थान ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशिक्षण केवल सरकारी अधिकारियों तक सीमित नहीं है। व्यक्तित्व विकास, संचार कौशल, नेतृत्व क्षमता और अन्य विशेष विषयों के लिए गैर-सरकारी विशेषज्ञों एवं प्रोफेशनल्स को भी प्रशिक्षण के लिए बुलाया जाता है।
वहीं सरकारी नियम, वित्तीय एवं सेवा संबंधी प्रावधान, प्रशासनिक प्रक्रिया और क्षेत्रीय प्रशासन जैसे विषयों में अनुभवी सरकारी अधिकारियों के अनुभव का उपयोग किया जाता है।
खबर के निष्कर्ष पर BIPARD ने उठाया सवाल
BIPARD ने कहा है कि मानदेय भुगतान से संबंधित प्रसारित खबर में प्रस्तुत निष्कर्ष संस्थान के उपलब्ध अभिलेखों और निर्धारित भुगतान प्रक्रिया का पूर्ण परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत नहीं करते हैं।
संस्थान का दावा है कि उपलब्ध रिकॉर्ड की समीक्षा में संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रमों और मानदेय भुगतान में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया है तथा किसी अधिकारी या प्रशिक्षक को उनके वास्तविक प्रशिक्षण सत्रों से अधिक सत्रों के आधार पर भुगतान किए जाने का तथ्य अभिलेखों से सामने नहीं आता।
हालांकि, इस पूरे मामले में संस्थान द्वारा जिन अभिलेखों का हवाला दिया गया है, उनकी स्वतंत्र सार्वजनिक जांच या विस्तृत दस्तावेजी सत्यापन की स्थिति अलग विषय है। इसलिए BIPARD का स्पष्टीकरण संस्थान का आधिकारिक पक्ष है, जबकि प्रसारित खबर में लगाए गए सवालों का अंतिम आकलन संबंधित रिकॉर्ड और उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर ही किया जा सकता है।
BIPARD ने पारदर्शिता पर दिया जोर
संस्थान ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन और मानदेय भुगतान के लिए निर्धारित नियमों, स्वीकृत मानदंडों और संस्थागत प्रक्रिया का पालन किया जाता है। प्रशिक्षण सत्रों और भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड भी संधारित किए जाते हैं।
BIPARD ने कहा कि उसका उद्देश्य अधिकारियों और अन्य प्रशिक्षणार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है और प्रशिक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया जाता है।


