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​भागलपुर के लाल का कमाल: कोलगामा के कुंदन कुमार बने इंटरनेशनल कुश्ती के कोच, पूरे इलाके में जश्न का माहौल

दो दशकों से बच्चों को कराटे और कुश्ती की मुफ्त और बेहतरीन ट्रेनिंग दे रहे हैं कुंदन।

Bhagalpur News: प्रतिभा कभी किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती, इसे एक बार फिर सच कर दिखाया है भागलपुर जिले के सुल्तानगंज अंतर्गत कोलगामा गांव के रहने वाले लाल कुंदन कुमार ने। कुंदन कुमार ने अपनी दिन-रात की कड़ी मेहनत और कुश्ती के प्रति अटूट लगन की बदौलत ‘कजाक कुराक कुश्ती’ (Kazakh Kuresi) में नेशनल लेवल के कोच के रूप में चयनित होकर पूरे बिहार का नाम देश-दुनिया में रोशन किया है।

​इसके साथ ही उन्होंने नेशनल लेवल की रेफरी परीक्षा में ‘ए प्लस’ (A+) रैंक हासिल की है। इस ऐतिहासिक कामयाबी की खबर मिलते ही सुल्तानगंज सहित पूरे भागलपुर जिले में खुशी की लहर दौड़ गई है।

​20 वर्षों की कड़ी तपस्या का मिला फल

​कुंदन कुमार के लिए यह मुकाम हासिल करना इतना आसान नहीं था। वे बचपन से ही कराटे और कुश्ती के प्रति बेहद जुनूनी थे। उन्होंने पिछले लगभग 20 वर्षों से लगातार बच्चों को मार्शल आर्ट्स, कराटे और कुश्ती का कड़ा प्रशिक्षण देने का काम किया है।

​उनकी इस लंबी तपस्या का ही परिणाम है कि उनके द्वारा तराशे गए कई खिलाड़ी आज इंटरनेशनल और नेशनल लेवल पर देश के लिए मेडल जीत चुके हैं। उनकी इसी खेल भावना और योग्यता को देखते हुए उन्हें इंडियन कजाक कुराक कुश्ती संघ में जॉइंट सेक्रेटरी (संयुक्त सचिव) के बेहद महत्वपूर्ण पद से भी नवाजा गया है।

​बिना घर-बार वाले बच्चों को बनाया ‘चैंपियन’, दिलाया खेल सम्मान

​कुंदन कुमार की सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि उन्होंने कभी भी खेल को व्यवसाय नहीं बनाया। उन्होंने समाज के उस अंतिम पायदान पर खड़े बच्चों को अपनी छत्रछाया में लिया, जिनके पास रहने को ठीक से घर तक नहीं था।

​कुंदन कुमार के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में ऐसे गरीब और साधनहीन बच्चों ने मैट पर पसीना बहाया और नेशनल लेवल पर पदक जीतकर बिहार सरकार द्वारा ‘खेल सम्मान’ हासिल किया। कुंदन की बदौलत आज ऐसे कई होनहार खिलाड़ियों को सरकार की तरफ से 1-1 लाख रुपये की सम्मान राशि और पहचान मिली है, जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं था।

​शहर और ग्रामीण इलाकों में खुशी की लहर, बधाई देने वालों का तांता

​एक छोटे से गांव कोलगामा से निकलकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पटल पर अपनी पहचान बनाने वाले कुंदन कुमार की इस कामयाबी से स्थानीय खेल प्रेमियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है।

​इलाके के लोगों का कहना है कि कुंदन ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो ग्रामीण इलाकों से भी वैश्विक स्तर के कोच और रेफरी तैयार हो सकते हैं। सोशल मीडिया से लेकर उनके आवास तक उन्हें बधाई देने और मिठाई खिलाने वालों का तांता लगा हुआ है।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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