Bhagalpur News: बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर अदालतें लगातार सख्त रुख अपना रही हैं। भागलपुर के विशेष उत्पाद न्यायालय-02 सह जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश शिव कुमार शर्मा की अदालत ने मोजाहिदपुर थाना कांड संख्या 178/2024 (विशेष उत्पाद वाद संख्या 2876/2024) में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अवैध शराब की बरामदगी मामले में अभियुक्त पुलिस पासवान को बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद अधिनियम, 2016 की धारा 30(ए) के तहत दोषी पाते हुए 5 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
💰 ₹1 लाख का जुर्माना; डिफॉल्ट करने पर अतिरिक्त जेल
माननीय न्यायालय ने 30 मई 2026 को ही अभियुक्त पुलिस पासवान को दोषी करार दे दिया था, जबकि आज सजा के बिंदु पर अंतिम फैसला सुनाया गया।
- मुख्य सजा: 05 वर्ष का सश्रम कारावास (कठोर जेल)।
- आर्थिक दंड: ₹1,00,000/- (एक लाख रुपये) का जुर्माना।
- अतिरिक्त प्रावधान: यदि दोषी अर्थदंड की राशि जमा नहीं करता है, तो उसे 06 महीने की अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा काटनी होगी।
वहीं, इस मामले के दो अन्य सह-अभियुक्तों—मनोज पासवान और डेजी देवी—को अदालत ने साक्ष्य (सबूतों) के अभाव में बाइज्जत बरी कर दिया है।
🚗 टाटा जेस्ट कार से बरामद हुई थी विदेशी व देशी शराब
यह पूरा मामला जुलाई 2024 का है। अभियोजन पक्ष द्वारा कोर्ट में पेश की गई कहानी के अनुसार:
- गुप्त सूचना पर कार्रवाई: 17 जुलाई 2024 को पुलिस को खुफिया जानकारी मिली थी कि एक सफेद रंग की टाटा जेस्ट कार (रजिस्ट्रेशन नंबर: JH-01BN-0957) में अवैध शराब की बड़ी खेप लेकर तस्कर बायपास की तरफ जा रहे हैं।
- घेराबंदी और जब्ती: सूचना के तुरंत बाद पुलिस टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए ‘बाल्टी कारखाना चौक’ के पास सघन वाहन जांच अभियान चलाया। संदिग्ध कार को रोककर जब उसकी तलाशी ली गई, तो पुलिस के होश उड़ गए।
- बरामदगी: कार के भीतर से विभिन्न ब्रांडों की कुल 15.800 लीटर विदेशी शराब और 600 एमएल देशी शराब बरामद की गई। पुलिस ने तुरंत शराब और कार को जब्त कर केस दर्ज किया था।
🏛️ कोर्ट में अभियोजन पक्ष ने पेश किए पुख्ता सबूत
पुलिस अनुसंधान (Investgation) पूरा होने के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने मजबूत मौखिक और दस्तावेजी सबूत पेश किए, जिससे पुलिस पासवान पर लगे आरोप शत-प्रतिशत सिद्ध हो गए।
इस मामले में सरकार और अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक (Special PP) भोला कुमार मंडल ने बेहद प्रभावी और दमदार बहस की। इस कानूनी लड़ाई में उनके सहयोगी के रूप में अधिवक्ता राजेंद्र कुमार, रविरंजन कुमार और पिंटू कुमार सिंह ने भी सक्रिय भूमिका निभाई और अभियोजन पक्ष का सहयोग किया।


