Bhagalpur News: तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) एक बार फिर अनिश्चितकालीन आंदोलनों और प्रदर्शनों का गढ़ बन चुका है। विश्वविद्यालय में पठन-पाठन और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के बजाय आए दिन शिक्षक, कर्मचारी और छात्र संगठन अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। इसी कड़ी में सोमवार को विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन के समक्ष अतिथि शिक्षकों ने जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान आक्रोशित शिक्षकों ने बिहार सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए अपनी आवाज बुलंद की।
55 से घटाकर 43 वर्ष उम्र सीमा करने का प्रस्ताव, डोमिसाइल नीति गायब
आंदोलन की अगुवाई कर रहे अतिथि शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ. आनंद आजाद ने सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार करते हुए दो मुख्य मुद्दों को इस विरोध की वजह बताया:
- शिक्षक नियमावली 2026 का विरोध: नई नियमावली में शिक्षकों की अधिकतम आयु सीमा को 55 वर्ष से घटाकर 43 वर्ष करने का प्रस्ताव लाया गया है, जिससे वर्षों से सेवा दे रहे सैकड़ों योग्य शिक्षकों के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो जाएगा।
- विश्वविद्यालय अधिनियम 2026 में कमियां: नए अधिनियम के प्रस्तावित स्वरूप में नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान शोध पत्रों (Research Papers) और शैक्षणिक अनुभव (Teaching Experience) को दरकिनार कर दिया गया है।
इसके अलावा, संघ ने बिहार में डोमिसाइल नीति लागू न किए जाने और वर्षों से कार्यरत अतिथि शिक्षकों के समायोजन व भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट नीति न बनाने पर भी गहरा असंतोष व्यक्त किया।
मांगें न मानी गईं तो पूरे राज्य में होगा जनआंदोलन
अतिथि शिक्षक संघ ने स्पष्ट शब्दों में बिहार सरकार से मांग की है कि नई नियमावली के इन जनविरोधी प्रावधानों पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए। शिक्षकों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन ने समय रहते उनकी मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो इस आंदोलन को विश्वविद्यालय स्तर से निकालकर पूरे राज्य में एक बड़े जनआंदोलन का रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।


