Patna News: बिहार के शहरों को आधुनिक, सुंदर और सुविधायुक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक शुरुआत हुई है। नगर विकास एवं आवास विभाग, बिहार तथा विश्व बैंक के संयुक्त तत्वावधान में “बिहार अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन कार्यक्रम” के अंतर्गत एक उच्च स्तरीय ‘वर्किंग लेवल विजनिंग’ कार्यशाला का आयोजन किया गया।
“को-क्रिएटिंग द विज़न एंड स्ट्रेटेजी फॉर सस्टेनेबल अर्बनाइजेशन” विषय पर आयोजित इस कार्यशाला की अध्यक्षता विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार ने की। वहीं, विश्व बैंक की ओर से रोसाना निट्टी के नेतृत्व में आए विशेषज्ञों की टीम ने सतत शहरीकरण को लेकर अपने महत्वपूर्ण सुझाव और वैश्विक अनुभव साझा किए।
नए विज़न से संवरेंगे शहर: प्रधान सचिव ने कहा- पुराने शहरों का भी होगा संपूर्ण पुनरुद्धार
कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रधान सचिव विनय कुमार ने बिहार सरकार के विज़न को साफ किया। उन्होंने कहा:
”बिहार सरकार शहरी विकास के क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रही है। राज्य में जहां एक ओर नए शहरों और सैटेलाइट टाउनशिप के विकास पर तेजी से काम चल रहा है, वहीं दूसरी ओर पुराने शहरों के व्यापक पुनरुद्धार एवं कायाकल्प की दिशा में भी ठोस पहल की जा रही है।”
मात्र 2 से 3 वर्षों में धरातल पर दिखने लगेंगे बड़े बदलाव
प्रधान सचिव ने बताया कि इस परिवर्तनकारी यात्रा में विश्व बैंक राज्य सरकार का सबसे महत्वपूर्ण साझेदार है। अगले 10 वर्षों में विश्व बैंक के सहयोग से कई बड़ी शहरी विकास परियोजनाओं को मूर्त रूप दिया जाएगा। राहत की बात यह है कि इनमें से कुछ अल्पकालिक परियोजनाएं अगले 2 से 3 वर्षों में ही धरातल पर दिखाई देने लगेंगी।
वित्तीय मदद से आगे की सोच: बिहार को मिलेगा विश्व बैंक के ग्लोबल एक्सपर्ट्स का मार्गदर्शन
विनय कुमार ने स्पष्ट किया कि विश्व बैंक का सहयोग केवल वित्तीय संसाधनों (फंडिंग) तक सीमित नहीं है। बिहार को विश्व बैंक की वैश्विक विशेषज्ञता और नीति-आधारित मार्गदर्शन का सीधा लाभ मिल रहा है। विश्व स्तरीय विशेषज्ञों के साथ मिलकर राज्य के सैटेलाइट टाउनशिप, शहरी अवसंरचना तथा पुराने शहरों के समग्र पुनर्विकास की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
बजट की कोई कमी नहीं, देश के अन्य प्रमुख संस्थान भी दे रहे साथ
इस महाअभियान को गति देने के लिए वित्तीय संसाधनों की व्यवस्था पहले ही सुनिश्चित की जा चुकी है। विश्व बैंक के अतिरिक्त देश के अन्य प्रमुख संस्थान भी इस अभियान में सहयोगी की भूमिका निभा रहे हैं। सरकार सभी संबंधित विभागों और हितधारकों को साथ लेकर एक समेकित और दीर्घकालिक शहरी विकास मॉडल विकसित कर रही है।
चार मुख्य स्तंभों पर मंथन: इन खास विषयों पर विशेषज्ञों ने तैयार की रणनीति
इस कार्यशाला में बिहार सरकार के विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और सतत शहरीकरण की रणनीति पर अपने विचार प्रस्तुत किए। मुख्य रूप से निम्नलिखित विषयों पर विशेषज्ञों और अधिकारियों के बीच गहन चर्चा हुई:
- शहरी परिवर्तन (Urban Transformation): शहरों को आधुनिक, स्मार्ट और रहने योग्य बनाना।
- नगर वित्तीय सुदृढ़ीकरण: नगर निकायों को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत करना।
- वित्तीय प्रबंधन: विकास कार्यों के लिए आवंटित फंड का सही और पारदर्शी उपयोग।
- समेकित शहरी नियोजन (Integrated Urban Planning): भविष्य की आबादी और जरूरतों को ध्यान में रखकर शहरों का मास्टर प्लान तैयार करना।
टीम वर्क से बदलेगी सूरत: कार्यशाला में मौजूद रहे राज्य के शीर्ष नीति-निर्माता
इस उच्च स्तरीय कार्यशाला में बिहार प्रशासनिक सेवा और विश्व बैंक के कई दिग्गज अधिकारी मौजूद रहे:
विभाग / संस्थान | उपस्थित मुख्य पदाधिकारी |
|---|---|
नगर विकास एवं आवास विभाग | संदीप कुमार आर पुडकलकट्टी (सचिव), अनिमेष कुमार पराशर (सचिव), निलेश रामचन्द्र देवरे (विशेष सचिव), विजय प्रकाश मीणा (अपर सचिव) |
वित्त एवं जल संसाधन विभाग | श्रीमती रचना पाटिल (सचिव, वित्त), डॉ. चंद्रशेखर सिंह (सचिव, जल संसाधन) |
पटना नगर निगम | यशपाल मीणा (आयुक्त) |
परिवहन एवं पथ निर्माण विभाग | आरिफ अहसन (राज्य परिवहन आयुक्त), श्री अभिषेक पलासिया (संयुक्त सचिव, पथ निर्माण) |
विश्व बैंक टीम (World Bank Team) | रोसाना निट्टी (टीम लीडर), बर्नाडस जे.एच. मस्केन्स, प्रकाश गौर, और पूनम अहलूवालिया खनिजो |
इस कार्यशाला के बाद यह साफ है कि आने वाले वर्षों में बिहार का शहरी परिदृश्य पूरी तरह बदलने वाला है। विश्व बैंक की आधुनिक तकनीक और बिहार सरकार की मजबूत इच्छाशक्ति मिलकर राज्य को शहरी विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए तैयार है।


