जमानत रद्द होने के बाद मोकामा के पूर्व विधायक का बड़ा ऐलान, बोले- हमने पार्टी का नहीं, नीरज कुमार का विरोध किया था। नीतीश कुमार और ललन सिंह से अब नहीं करेंगे मुलाकात, बेटे के चुनाव लड़ने का फैसला उसी पर छोड़ा।
Patna News: बिहार की राजनीति में मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगने के बाद अनंत सिंह ने अपनी अगली रणनीति का खुलासा करते हुए कहा है कि वह आगामी 1 दिसंबर को सरेंडर करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरेंडर के बाद न्यायालय से उन्हें जमानत मिल जाएगी। वहीं, इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने जेडीयू नेता नीरज कुमार पर जमकर निशाना साधा और कई गंभीर आरोप लगाए।
अनंत सिंह के बयान के बाद बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने उनकी कानूनी मुश्किलें बढ़ा दी हैं, तो दूसरी तरफ उनके बयानों ने जेडीयू के अंदरूनी राजनीतिक विवाद को फिर से चर्चा में ला दिया है।
सुप्रीम कोर्ट से झटका, अब 1 दिसंबर को करना होगा सरेंडर
दरअसल, पूरा मामला मोकामा के चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड से जुड़ा है। 30 अक्टूबर 2025 को विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मोकामा इलाके में अनंत सिंह के समर्थकों और दुलारचंद यादव के समर्थकों के बीच विवाद और हिंसक झड़प हुई थी। इसी दौरान दुलारचंद यादव की हत्या हो गई थी। इस मामले में अनंत सिंह को आरोपी बनाया गया था और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया था।
बाद में पटना हाईकोर्ट से अनंत सिंह को जमानत मिल गई थी। हालांकि, हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद उनकी जमानत रद्द कर दी और उन्हें एक दिसंबर तक सरेंडर करने का निर्देश दिया। इस फैसले के बाद अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं।
नीरज कुमार पर अनंत सिंह का सीधा हमला, बोले- पार्टी का नहीं किया था विरोध
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मीडिया से बातचीत में अनंत सिंह ने जेडीयू नेता नीरज कुमार को अपने निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी पार्टी का विरोध नहीं किया था, बल्कि उनका विरोध केवल नीरज कुमार से था।
अनंत सिंह ने आरोप लगाया कि नीरज कुमार ने उनके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज करवाकर उन्हें फंसाने का काम किया। उन्होंने यहां तक दावा किया कि दुलारचंद यादव की हत्या करवाने में भी नीरज कुमार की भूमिका थी। अनंत सिंह के मुताबिक, नीरज कुमार ने सरकार और पार्टी के स्तर पर भी अपनी मर्जी के मुताबिक फैसले करवाए।
हालांकि, नीरज कुमार के खिलाफ लगाए गए ये आरोप अनंत सिंह के व्यक्तिगत दावे हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें न्यायिक रूप से साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।
नीतीश कुमार और ललन सिंह से भी अब नहीं करेंगे मुलाकात
अनंत सिंह ने अपने बयान में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने साफ कहा कि अब वह न तो नीतीश कुमार से मिलेंगे और न ही ललन सिंह से।
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के गड़बड़ाने के बाद ही यह पूरा घटनाक्रम हुआ। अनंत सिंह ने पार्टी के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी तीखी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में पार्टी के लिए चुनावी स्थिति बेहद मुश्किल हो सकती है और उसका खाता खुलना भी मुश्किल होगा।
उनके इस बयान को जेडीयू नेतृत्व के प्रति खुली नाराजगी और पार्टी के भीतर राजनीतिक टकराव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
बेटे के चुनाव लड़ने पर बोले- उसकी अपनी मर्जी
बातचीत के दौरान जब अनंत सिंह से उनके बेटे के राजनीतिक भविष्य और चुनाव लड़ने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि बेटा चुनाव लड़ेगा या नहीं, यह उसकी अपनी मर्जी है। वह उस पर किसी तरह का दबाव नहीं बनाएंगे।
इस बयान से साफ है कि मौजूदा राजनीतिक और कानूनी परिस्थितियों के बीच अनंत सिंह अपने परिवार के राजनीतिक भविष्य को लेकर कोई सार्वजनिक फैसला थोपना नहीं चाहते।
बोले- मेरे साथ जुल्म करने वालों को भगवान सबक सिखाएंगे
अनंत सिंह ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि उनके साथ जिसने भी जुल्म किया है, उसे भगवान सबक सिखाएंगे। उनके इस बयान को मौजूदा राजनीतिक विवाद और कानूनी कार्रवाई के प्रति उनकी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि जेडीयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित किया था। विधान परिषद चुनाव में जेडीयू प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ राजनीतिक गतिविधियों को भी इस विवाद की प्रमुख वजह बताया गया था।
अब नीरज कुमार की प्रतिक्रिया भी चर्चा में
इस पूरे विवाद में नीरज कुमार का पक्ष भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने अनंत सिंह के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि दुलारचंद यादव के पोते और याचिकाकर्ता का नाम भी नीरज कुमार है। ऐसे में नाम की समानता के कारण उन्हें इस मामले में घसीटना गलत है। उन्होंने आरोपों को बेबुनियाद बताया और कहा कि किसी के पास सबूत हैं तो उन्हें सामने रखना चाहिए।
1 दिसंबर को सरेंडर के बाद क्या होगी अगली रणनीति?
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अनंत सिंह के सामने सरेंडर करने की समय-सीमा तय है। अब सबकी निगाहें 1 दिसंबर पर टिकी हैं। सरेंडर के बाद वह जमानत के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। वहीं, उनके राजनीतिक बयानों से बिहार की सियासत में एक नई बहस शुरू हो गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अनंत सिंह की कानूनी लड़ाई के साथ उनकी राजनीतिक लड़ाई भी और तेज होगी? क्या जेडीयू नेतृत्व के साथ उनकी दूरी स्थायी हो जाएगी? और क्या मोकामा की राजनीति में उनके परिवार की अगली भूमिका देखने को मिलेगी? आने वाले दिन इन सवालों के जवाब तय करेंगे।


