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बिहार में बंद चीनी मिलें फिर होंगी शुरू, खुलेंगे सुधा की तर्ज पर तरकारी बूथ; मंत्री रामकृपाल यादव ने किया नई सहकारिता नीति 2026 का ऐलान

बंद चीनी मिलों की होगी वापसी और गाँव-गाँव खुलेंगे 'तरकारी बूथ', मंत्री रामकृपाल यादव ने किया बड़ा ऐलान

Patna News: बिहार में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बड़े और ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। सूचना भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने विभाग की नई योजनाओं, उपलब्धियों और दूरगामी नीतियों का विस्तृत खाका पेश किया।

​प्रेस वार्ता में सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेन्द्र सिंह, निबंधक (सहयोग समितियां)  रजनीश कुमार सिंह, अपर सचिव  अभय कुमार सिंह तथा वेजफेड के प्रबंध निदेशक मनोज कुमार सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

​प्रेस कॉन्फ्रेंस में साझा किए गए मुख्य बिंदुओं और विभागीय योजनाओं का विवरण इस प्रकार है:

​ चीनी मिलों का पुनरुद्धार: दरभंगा में बनेगा ‘आदर्श शुगर कॉम्प्लेक्स’

​’सात निश्चय-3′ की “समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार” परिकल्पना के तहत राज्य में लंबे समय से बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनः शुरू करने की योजना बनाई गई है:

  • नया स्वरूप: मधुबनी के सकरी में बंद पड़ी चीनी मिल की जमीन पर एक नया सहकारी चीनी मिल स्थापित होगा। वहीं दरभंगा के रैयाम में एक आधुनिक आदर्श शुगर कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जाएगा।
  • संचालन: इन परियोजनाओं की स्थापना और संचालन इंडिया पोटाश लिमिटेड (IPL) के माध्यम से किया जाएगा।
  • बहुआयामी संयंत्र: चीनी उत्पादन के साथ-साथ यहाँ पावर जनरेशन प्लांट, डिस्टलरी (Distillery) और कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्र भी लगाए जाएंगे।
  • किसान सहभागिता: गन्ना उत्पादक किसानों को जोड़कर सहकारी चीनी मिल समिति बनाई जा रही है। एक पारदर्शी ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अब तक 10,000 से 15,000 किसान आवेदन कर चुके हैं।

​ बिहार राज्य सहकारिता नीति 2026 लागू

​राज्य में सहकारिता आंदोलन को सुदृढ़, डिजिटल और आधुनिक बनाने के लिए बिहार राज्य सहकारिता नीति 2026 लागू कर दी गई है:

  • पारंपरिक व गैर-पारंपरिक क्षेत्र: पारंपरिक सहकारी समितियों को डिजिटल नवाचार, आधुनिक तकनीक और पारदर्शी प्रशासन से मजबूत किया जाएगा। साथ ही, अब गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में भी नई समितियों का विस्तार होगा।
  • समावेशी विकास: इस नीति का मुख्य केंद्र बिंदु युवाओं, महिलाओं, किसानों, उद्यमियों और वंचित वर्गों को जोड़कर आत्मनिर्भरता और रोजगार के अवसर पैदा करना है।

​ सुधा Dairy की तर्ज पर शुरू होंगे ‘तरकारी बूथ’

​राज्य में हर थाली तक बिहार की अपनी सब्जी पहुंचाने के संकल्प के साथ ‘वेजफेड’ के जरिए स्थानीय सब्जी उत्पादकों को बड़ा बाजार दिया जा रहा है:

  • तरकारी बूथ: जैसे राज्य में सुधा डेयरी के बूथ हैं, ठीक उसी मॉडल पर ‘तरकारी बूथ’ खोले जाएंगे।
  • इन्फ्रास्ट्रक्चर: 350 पंचायतों में सब्जी संग्रहण (Collection) केंद्र और 50 प्रखंडों में आधुनिक आधारभूत संरचनाएं विकसित की जाएंगी।

​ फसल बीमा और धान अधिप्राप्ति में बड़ी राहत

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना: वित्तीय वर्ष 2026-27 के रबी मौसम से इस योजना को बिहार में लागू करने की मंजूरी दी गई है। किसानों को बहुत कम प्रीमियम देना होगा—शेष राशि का वहन केंद्र और राज्य सरकार करेंगी। इससे किसानों को कृषि लागत के समतुल्य क्षतिपूर्ति मिलेगी।
  • धान अधिप्राप्ति का रिकॉर्ड: खरीफ विपणन मौसम 2025-26 के दौरान 36.85 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के मुकाबले 6,902 समितियों द्वारा 5.40 लाख किसानों से 36.79 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया। राज्य खाद्य निगम (SFC) को 98.47% (24.57 लाख मीट्रिक टन) चावल दिया जा चुका है।
  • भंडारण क्षमता: राज्य में 7,452 गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है, जिससे 18.827 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता तैयार हुई है।

​ पैक्स (PACS) में बैंकिंग, जन औषधि केंद्र और बिजनेस विस्तार

​ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय और व्यापारिक सुविधाएं बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण और विविधीकरण किया गया है:

  • माइक्रो-एटीएम और बैंक मित्र: ‘सहकारिता में सहकार’ के तहत 186 दुग्ध समितियों, 618 पैक्स, 19 प्राथमिक सब्जी उत्पादक समितियों आदि को माइक्रो-एटीएम से लैस कर ‘बैंक मित्र’ बनाया गया है। 16 अगस्त 2026 से एक महीने का विशेष खाता खोलो अभियान चलाया जाएगा।
  • कॉमन सर्विस सेंटर (CSC): ग्रामीण इलाकों में 300 से अधिक प्रकार की सेवाएं देने के उद्देश्य से 6,425 पैक्स में CSC स्थापित किए गए हैं। इनमें से 5,807 क्रियाशील हैं, जो 8.81 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर चुके हैं।
  • जन औषधि केंद्र: 461 चयनित पैक्सों में से 373 को स्वीकृति मिल चुकी है। 37 को औषधि अनुज्ञप्ति (Licence) प्राप्त हो चुकी है और 36 पैक्सों में जन औषधि केंद्रों का संचालन शुरू हो चुका है।
  • विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना: 36 समितियों में 1000, 2000 और 2500 मीट्रिक टन क्षमता के बड़े गोदाम बनाए जा रहे हैं।

​ 100 एफपीओ (FPO) का गठन और देशभक्ति अभियान

  • किसान उत्पादक संगठन (FPO): NCDC के सहयोग से 21 जिलों की 100 पंचायतों में 100 FPO बनाए गए हैं, जिनमें से 50 ने व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर किसानों को बाजार और इनपुट सेवाएं देना शुरू कर दिया है।
  • ‘हर घर तिरंगा’ अभियान (2026): वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 9 से 17 अगस्त तक सहकारिता विभाग द्वारा बाइक रैली, रंगोली प्रतियोगिता, सांस्कृतिक कार्यक्रम और तिरंगे के साथ सेल्फी जैसे कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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