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बिहार में ‘डिजिटल अरेस्ट’ और साइबर ठगी पर बड़ा एक्शन: मुख्य सचिव और DGP की हाई-लेवल बैठक, 1930 हेल्पलाइन के व्यापक प्रचार का निर्देश

बिजली बिल, सुधा दूध के पैकेट और नगर निगम की स्क्रीन पर दिखेगा हेल्पलाइन नंबर 1930; 'ऑपरेशन साइबर प्रहार' के तहत 507 गिरफ्तार, पीड़ितों के ₹224 लाख से अधिक वापस कराने के आदेश जारी।

Patna News: बिहार में बढ़ते साइबर अपराध और ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामलों पर शिकंजा कसने के लिए राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार की संयुक्त अध्यक्षता में राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DMs), वरीय पुलिस अधीक्षकों (SSPs) और पुलिस अधीक्षकों (SPs) के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

​वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई यह बैठक 52वीं ‘प्रगति’ (PRAGATI) समीक्षा बैठक में साइबर अपराध को लेकर दिए गए निर्देशों के अनुपालन और राज्य की तैयारियों का जायजा लेने के लिए बुलाई गई थी।

​घर-घर पहुंचेगा राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930

​मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 आम जनता की सुरक्षा का सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने निर्देश दिया कि इस नंबर को बिहार के हर नागरिक तक पहुंचाने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाए:

  • ​बिजली बिल और मोबाइल एप: राज्य के सभी बिजली बिलों पर 1930 नंबर स्पष्ट रूप से प्रिंट किया जाएगा। साथ ही, बिजली रिचार्ज मोबाइल एप्स पर भी इसका बैनर दिखेगा।
  • ​सुधा डेयरी उत्पाद: बिहार के घर-घर में इस्तेमाल होने वाले ‘सुधा’ दूध और अन्य डेयरी उत्पादों की पैकेजिंग तथा सुधा बूथों पर यह हेल्पलाइन नंबर प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा।
  • ​नगर निगम और पब्लिक डिस्प्ले: शहरों के भीड़-भाड़ वाले इलाकों, डिजिटल होर्डिंग्स और एलइडी स्क्रीन पर साइबर जागरूकता संदेश प्रसारित किए जाएंगे।
  • ​साप्ताहिक जागरूकता अभियान: स्कूलों और कॉलेजों में ‘साइबर मंगलवार’ जैसे जागरूकता कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होंगे।

​ऑपरेशन साइबर प्रहार और हॉटस्पॉट जिलों पर नकेल

​बैठक के दौरान प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के अनुसार:

  • ​कार्रवाई: ‘ऑपरेशन साइबर प्रहार’ के तहत राज्य में 6,251 म्यूल (फर्जी) बैंक खातों का सत्यापन किया गया, 702 लोगों पर कानूनी कार्रवाई हुई और 507 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया।
  • ​साइबर हॉटस्पॉट: देश के शीर्ष साइबर हॉटस्पॉट जिलों में बिहार के नवादा (रैंक 2), नालंदा (रैंक 4), पटना (रैंक 7) और शेखपुरा (रैंक 15) शामिल हैं। वहीं पटना एटीएम और चेक के जरिए अवैध पैसों की निकासी में देश में शीर्ष स्थानों पर है।

​पीड़ितों के पैसे वापसी की प्रक्रिया में तेजी

  • ​पैसे वापसी (MRM): बिहार में साइबर ठगी के पीड़ितों को पैसे वापस दिलाने के लिए 16,593 मामले तैयार किए गए हैं, जिनमें से 5,642 मामलों में पुलिस की त्वरित कार्रवाई से ₹224.53 लाख रुपये की बहाली (Restoration) के आदेश जारी हो चुके हैं।
  • ​शिकायत निवारण (GRM): बैंकों द्वारा खातों की अनुचित फ्रीजिंग से जुड़ी शिकायतों का बिहार पुलिस ने 98% से अधिक निष्पादन किया है।
  • ​इंटर-स्टेट कोऑर्डिनेशन: ‘समन्वय’ (CIAR) पोर्टल के जरिए अन्य राज्यों से मिले जांच अनुरोधों का 90.22% सफलता से समाधान किया गया। साथ ही, ‘सहयोग’ पोर्टल के माध्यम से 75.65% अवैध साइबर URLs को हटवाया गया।

​मुख्य सचिव द्वारा जारी कड़े निर्देश

  1. ​e-Zero FIR प्रक्रिया: ₹1 लाख से अधिक की साइबर धोखाधड़ी के मामलों में तुरंत e-Zero FIR दर्ज कर उसे नियमित FIR में बदला जाए।
  2. ​बैंकों के साथ समन्वय: जिलाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे DLBC बैठकों के जरिए म्यूल खातों को फ्रीज करने और ठगी की राशि पीड़ितों को लौटाने की प्रक्रिया में तेजी लाएं।
  3. ​फर्जी सिम/POS एजेंटों पर नकेल: फर्जी दस्तावेजों पर सिम बेचने वाले एजेंटों और गिरोहों के खिलाफ राज्यव्यापी विशेष अभियान चलाया जाएगा।
  4. ​ट्रेनिंग: बिहार पुलिस के 4,221 से अधिक अधिकारियों को साइबर अनुसंधान का विशेष प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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