Patna News: बिहार की राजधानी पटना में शनिवार को एक अहम राजनीतिक मुलाकात देखने को मिली। Upendra Kushwaha ने मुख्यमंत्री Nitish Kumar से उनके आधिकारिक आवास 1 अणे मार्ग पर मुलाकात की।
सूत्रों के मुताबिक यह मुलाकात शिष्टाचार भेंट के तौर पर हुई, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुलाकात के दौरान राज्य और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक हालात और विकास मुद्दों पर चर्चा
बताया जा रहा है कि इस मुलाकात में बिहार की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, विकास योजनाओं और राज्य के विभिन्न मुद्दों को लेकर विचार-विमर्श किया गया। दोनों नेताओं ने राज्य के विकास और सामाजिक समरसता को लेकर भी चर्चा की।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की मुलाकातें बिहार की राजनीति में नए समीकरणों के संकेत भी दे सकती हैं।
बिहार की राजनीति में अहम चेहरा हैं कुशवाहा
Upendra Kushwaha बिहार की राजनीति के एक प्रमुख नेता माने जाते हैं। वे शिक्षा और सामाजिक मुद्दों को लेकर लगातार सक्रिय रहते हैं। वर्तमान में वे राज्यसभा सांसद के रूप में संसद में भी अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
उनकी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से यह मुलाकात राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि बिहार में इन दिनों राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
सत्ता गलियारों में चर्चा तेज
इस मुलाकात के बाद पटना के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। हालांकि आधिकारिक तौर पर इसे शिष्टाचार भेंट बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में इसका असर बिहार की राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है
पटना में अहम मुलाकात: राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से की भेंट
भागलपुर में RPF की बड़ी कार्रवाई: 5 आरोपी गिरफ्तार, करीब 10 लाख के आभूषण-मोबाइल और गांजा बरामद
Bhagalpur News: Railway Protection Force (RPF) ने मालदा मंडल में रेलवे परिसरों और ट्रेनों में बढ़ते अपराध पर बड़ी कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई के दौरान लगभग ₹9.95 लाख मूल्य के आभूषण, मोबाइल फोन, नकदी और नशीले पदार्थ बरामद किए गए हैं।
यह अभियान मंडल रेल प्रबंधक Manish Kumar Gupta के मार्गदर्शन और मंडल सुरक्षा आयुक्त Ashim Kumar Kullu के पर्यवेक्षण में 6 मार्च 2026 को चलाया गया।
सुल्तानगंज स्टेशन पर चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश
विशेष अभियान के दौरान आरपीएफ टीम ने Sultanganj Railway Station पर यात्रियों की संपत्ति चोरी करने वाले पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों की तलाशी के दौरान उनके पास से
सोने और चांदी के आभूषण
कई मोबाइल फोन
नकदी
चोरी में इस्तेमाल होने वाले औजार जैसे ब्लेड, चाकू, प्लायर, कटर और स्क्रूड्राइवर
बरामद किए गए। बरामद सामान की कुल अनुमानित कीमत लगभग ₹7,60,000 बताई जा रही है।
ऑपरेशन नार्कोस के तहत गांजा बरामद
इसी दिन आरपीएफ की क्राइम इंटेलिजेंस ब्रांच ने ऑपरेशन नार्कोस के तहत एक और बड़ी कार्रवाई की।
Tinpahar Railway Station के पास चेकिंग के दौरान JayNagar Howrah Express के जनरल कोच से एक लावारिस बैग बरामद किया गया।
जांच में बैग के अंदर से गांजा के चार पैकेट मिले, जिनका कुल वजन लगभग 4.7 किलोग्राम है। बरामद गांजे की अनुमानित कीमत करीब ₹2,35,000 बताई जा रही है।
कुल बरामदगी लगभग 10 लाख रुपये
दोनों अभियानों को मिलाकर आरपीएफ ने
5 आरोपियों को गिरफ्तार किया
आभूषण, मोबाइल फोन, नकदी और चोरी के उपकरण
तथा नशीले पदार्थ बरामद किए
इन सभी की कुल अनुमानित कीमत लगभग ₹9,95,000 बताई गई है। गिरफ्तार आरोपियों और बरामद सामग्री को आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित GRP अधिकारियों को सौंप दिया गया है।
यात्रियों से सतर्क रहने की अपील
आरपीएफ ने कहा कि रेलवे परिसरों और ट्रेनों में अपराध रोकने के लिए लगातार निगरानी और विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। यात्रियों और आम जनता से अपील की गई है कि यदि रेलवे परिसर में कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत नजदीकी रेलवे अधिकारी या आरपीएफ को सूचना दें।
राजभवन की नई जिम्मेदारी से पहले बड़ी मुलाकात: नागालैंड के नामित राज्यपाल नंद किशोर यादव ने CM नीतीश कुमार से की भेंट
Patna News: Nand Kishore Yadav को नागालैंड का राज्यपाल बनाए जाने की आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद उन्होंने पटना में मुख्यमंत्री Nitish Kumar से मुलाकात की। यह मुलाकात मुख्यमंत्री आवास 1 अणे मार्ग में हुई, जिसे राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार यह मुलाकात शिष्टाचार भेंट थी, जिसमें नई जिम्मेदारी, बिहार की वर्तमान राजनीतिक स्थिति और भविष्य की संभावनाओं को लेकर बातचीत हुई। नंद किशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल बनाए जाने के बाद यह उनकी पहली बड़ी औपचारिक मुलाकातों में से एक मानी जा रही है।
नई जिम्मेदारी को लेकर शुभकामनाएं
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नंद किशोर यादव को नागालैंड का राज्यपाल बनाए जाने पर शुभकामनाएं दीं और उनके सफल कार्यकाल की कामना की। दोनों नेताओं के बीच लंबे समय तक सौहार्दपूर्ण माहौल में चर्चा हुई।
नंद किशोर यादव बिहार की राजनीति के अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं और लंबे समय तक राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। अब उन्हें पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड की संवैधानिक जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बिहार की राजनीति में अहम चेहरा
नंद किशोर यादव बिहार की राजनीति में एक मजबूत और प्रभावशाली नेता रहे हैं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए राज्य के विकास और प्रशासनिक कार्यों में अहम योगदान दिया है। उनके राज्यपाल बनने को राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका प्रशासनिक अनुभव नागालैंड में भी उपयोगी साबित हो सकता है और वे वहां बेहतर प्रशासनिक समन्वय स्थापित कर सकते हैं।
राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज
इस मुलाकात के बाद पटना के राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि बिहार से निकलकर अब नंद किशोर यादव राष्ट्रीय स्तर पर एक नई जिम्मेदारी निभाने जा रहे हैं।
हालांकि यह मुलाकात पूरी तरह शिष्टाचार भेंट थी, लेकिन राजनीतिक रूप से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बिहार की सियासत में बड़ा सियासी मोड़! राज्यसभा की ओर बढ़ रहे Nitish Kumar, नई सरकार के फॉर्मूले पर तेज हुई चर्चा
Bihar Politics: बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्य की राजनीति से हटकर केंद्र की सियासत में सक्रिय होने की चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक चुनाव परिणाम आने के करीब तीन महीने बाद लिया गया यह फैसला राज्य की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। माना जा रहा है कि 10 से 14 मार्च के बीच मुख्यमंत्री अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिसके बाद उनके लिए राज्यसभा का रास्ता साफ हो सकता है।
नई सरकार के फॉर्मूले पर मंथन
राजधानी पटना के सत्ता गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने के बाद बिहार में नई सरकार के गठन का फॉर्मूला लगभग तैयार हो चुका है।
बताया जा रहा है कि इसको लेकर Bharatiya Janata Party और Janata Dal (United) के बीच लगातार बातचीत और रणनीतिक मंथन चल रहा है।
प्रस्तावित कैबिनेट के फॉर्मूले के अनुसार नई सरकार में कुल 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसमें भाजपा के 17, जेडीयू के 15, Lok Janshakti Party (Ram Vilas) के 2, जबकि Hindustani Awam Morcha और Rashtriya Lok Morcha से एक-एक मंत्री शामिल किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री
इसी बीच एक और सियासी खबर ने बिहार के राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। मुख्यमंत्री के बेटे Nishant Kumar की सक्रिय राजनीति में एंट्री लगभग तय मानी जा रही है।
सूत्रों के अनुसार 8 मार्च को वे औपचारिक रूप से जेडीयू की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। इस खबर के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है।
पटना स्थित जेडीयू कार्यालय के बाहर बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें लिखा है— “विकसित बिहार के नए अध्याय की शुरुआत, निशांत कुमार”।
जनता के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
मुख्यमंत्री के इस संभावित फैसले को लेकर आम जनता के बीच भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। खासकर महिलाओं के बीच इसको लेकर भावनात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
कई महिलाओं ने कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार की छवि बदलने का काम किया और राज्य को नई पहचान दिलाई। कुछ महिलाओं ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने बिहार को अपने घर की तरह सजाया और संवारा है।
कुछ मतदाताओं में नाराजगी भी
हालांकि दूसरी ओर कुछ मतदाताओं में नाराजगी भी देखी जा रही है। उनका कहना है कि अगर पहले से पता होता कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने वाले हैं, तो शायद वे चुनाव में उनके नाम पर वोट नहीं देते।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर यह फॉर्मूला लागू होता है तो बिहार की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत हो सकती है।
बिहार की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत
कुल मिलाकर बिहार की सियासत में अब नया अध्याय शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। जहां एक ओर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दिल्ली की राजनीति की ओर कदम बढ़ा सकते हैं, वहीं राज्य की सत्ता में नई रणनीति और नई पीढ़ी की भूमिका भी देखने को मिल सकती है।
बिहार की राजनीति में नई हलचल! जेडीयू की सदस्यता से पहले ही एक्शन में Nishant Kumar, विधायकों के साथ की अहम बैठक
Bihar Politics: बिहार की सियासत में नए चेहरे की एंट्री की चर्चा तेज
बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है और सत्ता के गलियारों में एक नए नाम की चर्चा जोरों पर है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar के बेटे Nishant Kumar के सक्रिय राजनीति में आने की खबर ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
राजनीतिक हलकों में इसे जेडीयू के अंदर नई पीढ़ी को आगे लाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व आने वाले समय में संगठन को मजबूत करने के लिए युवाओं को अधिक जिम्मेदारी देने की दिशा में कदम बढ़ा सकता है।
सदस्यता से पहले ही विधायकों के साथ अहम बैठक
सूत्रों के मुताबिक, रविवार को जेडीयू की सदस्यता ग्रहण करने से पहले ही निशांत कुमार सक्रिय नजर आए। उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष Sanjay Kumar Jha के पटना स्थित आवास पर करीब दो दर्जन विधायकों के साथ एक अहम बैठक की।
इस बैठक में बिहार सरकार के मंत्री Shravan Kumar सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में युवा विधायक भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान पार्टी के भविष्य, संगठन की मजबूती और राजनीतिक रणनीति को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
संगठन को मजबूत बनाने पर हुई चर्चा
बताया जा रहा है कि बैठक का मुख्य उद्देश्य जेडीयू को आने वाले समय के लिए और अधिक मजबूत बनाना था। इस दौरान निशांत कुमार ने वरिष्ठ नेताओं के साथ पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और भविष्य की रणनीति पर चर्चा की।
साथ ही युवा विधायकों के साथ बिहार में चल रही विकास योजनाओं और सरकारी कार्यक्रमों को जमीन पर और प्रभावी तरीके से लागू करने को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।
युवाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि पार्टी में युवाओं की भागीदारी किस तरह बढ़ाई जाए और संगठन में नई ऊर्जा कैसे लाई जाए। कई युवा विधायकों ने निशांत कुमार का स्वागत करते हुए उन्हें सक्रिय राजनीति में आने के लिए प्रोत्साहित किया।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में मौजूद कई नेताओं ने यह भी सुझाव दिया कि अगर पार्टी को नई दिशा देनी है तो नई पीढ़ी को आगे लाना जरूरी है और इस भूमिका में निशांत कुमार महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा सकते हैं।
ग्रुप फोटो से बढ़ी सियासी चर्चा
बैठक के बाद सभी नेताओं ने एक साथ ग्रुप फोटो भी लिया। यह तस्वीर अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है और इसे जेडीयू में नए दौर की शुरुआत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
बिहार की राजनीति में नए अध्याय के संकेत
कुल मिलाकर बिहार की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि निशांत कुमार सिर्फ पार्टी की सदस्यता तक सीमित रहते हैं या आने वाले दिनों में जेडीयू की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाते नजर आएंगे।
क्या सच में राज्यसभा जाएंगे Nitish Kumar? जेडीयू बैठक में भावुक माहौल, नेताओं ने फैसले बदलने की लगाई गुहार
Patna News: पटना स्थित मुख्यमंत्री आवास पर हुई Janata Dal (United) की अहम बैठक में उस समय भावुक माहौल बन गया, जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की चर्चा सामने आई। बैठक में मौजूद कई विधायक और वरिष्ठ नेता इस फैसले से हैरान और भावुक नजर आए। कई नेताओं ने मुख्यमंत्री से अपने निर्णय पर एक बार फिर विचार करने का आग्रह किया।
बैठक के दौरान कई विधायकों ने खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं और कहा कि बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार की सक्रिय भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। नेताओं का मानना है कि राज्य की राजनीति में उनका मार्गदर्शन और नेतृत्व अभी भी जरूरी है।
नेताओं ने फैसले पर जताई चिंता
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए जेडीयू के वरिष्ठ नेता Vijay Kumar Chaudhary ने कहा कि उन्हें इस तरह के फैसले की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने बताया कि बैठक में मौजूद कई नेताओं ने मुख्यमंत्री को मनाने की कोशिश की।
उनके मुताबिक, यह पल कई नेताओं के लिए भावुक था और बैठक के दौरान कई लोगों की आंखें नम हो गईं। पार्टी नेताओं ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे राज्यसभा जाने के फैसले पर एक बार फिर गंभीरता से विचार करें।
वरिष्ठ नेताओं ने भी की पुनर्विचार की अपील
बैठक में जेडीयू के वरिष्ठ नेता Bijendra Prasad Yadav ने भी मुख्यमंत्री से अपने फैसले पर दोबारा सोचने की अपील की। उन्होंने कहा कि बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार का अनुभव और नेतृत्व पार्टी के लिए बेहद अहम है।
हालांकि मुख्यमंत्री ने नेताओं को भरोसा दिलाया कि अगर वे राज्यसभा जाते भी हैं तो उनका ध्यान बिहार की राजनीति और पार्टी संगठन पर बना रहेगा। उन्होंने कहा कि वे बिहार में ही रहकर पार्टी और राज्य की राजनीतिक गतिविधियों पर नजर बनाए रखेंगे।
नेताओं को दिया भरोसा
बैठक के बाद जेडीयू के प्रवक्ता Neeraj Kumar ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि बैठक का माहौल भावनात्मक जरूर था, लेकिन मुख्यमंत्री ने सभी नेताओं को आश्वस्त किया कि उनके फैसले से पार्टी की दिशा और संगठन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि वे पार्टी के हर फैसले और बिहार की राजनीति पर लगातार नजर रखेंगे।
निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री पर चर्चा
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री के बेटे Nishant Kumar के सक्रिय राजनीति में आने का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। कई विधायकों ने कहा कि पार्टी की नई पीढ़ी को आगे आने का मौका मिलना चाहिए।
बताया गया कि लंबे समय से जेडीयू के कई नेता चाहते थे कि निशांत कुमार पार्टी की सक्रिय राजनीति में भूमिका निभाएं। बैठक में इस प्रस्ताव को कई विधायकों का समर्थन मिला और बाद में निशांत कुमार ने भी सक्रिय राजनीति में आने के लिए सहमति जता दी।
कार्यकर्ताओं में दिखा उत्साह
निशांत कुमार के राजनीति में आने की सहमति के बाद बैठक का माहौल कुछ हद तक सकारात्मक नजर आया। पार्टी नेताओं का मानना है कि इससे संगठन में नई ऊर्जा आएगी और कार्यकर्ताओं का मनोबल भी बढ़ेगा।
जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की लंबे समय से यह इच्छा रही है कि निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में आएं। उनका मानना है कि इससे पार्टी को नई दिशा और ऊर्जा मिलेगी।
नई पीढ़ी को जिम्मेदारी देने की चर्चा
हालांकि जेडीयू का नेतृत्व फिलहाल पूरी तरह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों में ही है, लेकिन पार्टी के अंदर नई पीढ़ी को जिम्मेदारी देने को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर निशांत कुमार सक्रिय राजनीति में आते हैं तो यह जेडीयू में नेतृत्व के अगले चरण की शुरुआत हो सकती है।
बिहार के हर जिले में ‘चलते-फिरते ICU’ जैसी ALS एंबुलेंस: गंभीर मरीजों को गोल्डन ऑवर में मिलेगी उन्नत इलाज सुविधा
Patna News: बिहार में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक आधुनिक व प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के प्रत्येक जिले में एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य गंभीर मरीजों को ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि अस्पताल पहुंचने से पहले ही प्राथमिक उन्नत इलाज शुरू हो सके।
‘चलते-फिरते ICU’ जैसी सुविधा
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया कि एनडीए सरकार के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। एएलएस एंबुलेंस गंभीर रूप से बीमार या घायल मरीजों के लिए चलते-फिरते आईसीयू की तरह काम करेगी। इससे दिल का दौरा, सांस लेने में तकलीफ, गंभीर दुर्घटना या अन्य जटिल स्थितियों में मरीजों को तत्काल उन्नत चिकित्सा सहायता मिल सकेगी।
उन्नत उपकरणों से लैस एंबुलेंस
इन एएलएस एंबुलेंस में उपलब्ध होंगी:
वेंटिलेटर
कार्डियक मॉनिटर
डिफिब्रिलेटर
जीवन रक्षक दवाएं
प्रशिक्षित पैरामेडिक्स और चिकित्सकीय स्टाफ
इन सुविधाओं के माध्यम से मरीज को अस्पताल पहुंचने तक वह सभी आवश्यक जीवनरक्षक उपचार दिए जा सकेंगे, जो उसकी जान बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
ग्रामीण और छोटे जिलों को बड़ी राहत
अब तक एमआरआई जैसी कई उन्नत सुविधाएं मुख्य रूप से मेडिकल कॉलेजों तक सीमित थीं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। एएलएस एंबुलेंस के जिला और प्रखंड स्तर तक संचालन से मरीजों को उच्चतर चिकित्सा संस्थानों तक सुरक्षित और त्वरित रेफरल सुविधा मिलेगी।
एंबुलेंस बेड़े का विस्तार
राज्य में फिलहाल 1941 एंबुलेंस संचालित हैं। जल्द ही 124 नई एंबुलेंस जोड़ी जाएंगी, जिससे कुल संख्या बढ़कर 2065 हो जाएगी। आपातकालीन स्थिति में टोल फ्री नंबर 102 के माध्यम से निःशुल्क एंबुलेंस सेवा उपलब्ध है।
आंकड़ों के अनुसार:
वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14,30,373 मरीजों ने इस सेवा का लाभ उठाया।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनवरी तक 15,94,220 मरीज मुफ्त एंबुलेंस सेवा का उपयोग कर चुके हैं।
स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल राज्य के आपातकालीन स्वास्थ्य तंत्र को नई मजबूती देगी। गोल्डन ऑवर में उन्नत उपचार उपलब्ध होने से मृत्यु दर में कमी आने की उम्मीद है।
बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में यह कदम मील का पत्थर साबित हो सकता है।
बिहार में ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता सुधारने की बड़ी पहल: 480 अभियंताओं को मिलेगा आईआईटी पटना में विशेष प्रशिक्षण
Bhagalpur News: बिहार के ग्रामीण इलाकों में सड़कों और पुलों की गुणवत्ता को नई ऊंचाई देने के लिए ग्रामीण कार्य विभाग ने ऐतिहासिक पहल शुरू की है। अब केवल सड़क निर्माण ही नहीं, बल्कि उसकी तकनीकी मजबूती और दीर्घकालिक गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसी कड़ी में विभाग ने अपने 480 सहायक अभियंताओं को प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान पटना में विशेष प्रशिक्षण देने की योजना लागू की है।
तकनीकी मानकों पर विशेष जोर
ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तैयार की गई कार्ययोजना में निर्माण कार्यों के उच्च तकनीकी मानकों को प्राथमिकता दी गई है। विभाग का मानना है कि यदि अभियंता नवीनतम तकनीक और गुणवत्ता नियंत्रण के आधुनिक तरीकों से लैस होंगे, तो ग्रामीण सड़कों और पुलों की उम्र और मजबूती दोनों में सुधार होगा।
चरणबद्ध तरीके से होगा प्रशिक्षण
इस विशेष कार्यक्रम के तहत:
कुल 480 नवनियुक्त सहायक अभियंताओं (असैनिक) को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
अब तक 120 अभियंताओं का प्रशिक्षण पूरा किया जा चुका है।
शेष 360 अभियंताओं को जुलाई 2026 तक प्रशिक्षित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
प्रशिक्षण के दौरान अभियंताओं को सड़क निर्माण में नवीन तकनीक, गुणवत्ता परीक्षण, मिट्टी और सामग्री की वैज्ञानिक जांच, तथा पुल निर्माण के आधुनिक मानकों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।
ग्रामीण संपर्कता को मिलेगा बल
राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को उद्योगोन्मुखी बनाने और बारहमासी सड़क संपर्क सुनिश्चित करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। बेहतर तकनीकी प्रशिक्षण से न केवल निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि रखरखाव लागत में भी कमी आएगी और ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन अधिक सुरक्षित व सुगम होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण कार्य विभाग बिहार की यह पहल आने वाले वर्षों में बिहार के ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत आधार प्रदान करेगी।
दीर्घकालिक दृष्टि
आईआईटी जैसे संस्थान के साथ तकनीकी साझेदारी से विभाग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अब गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। यह कदम राज्य के ग्रामीण विकास मॉडल को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
पटना में ‘जीरो पावर कट’ की तैयारी: चार नए पावर सब स्टेशन से 5 लाख लोगों को मिलेगी निर्बाध बिजली
Patna News: राजधानी पटना में इस बार गर्मी के मौसम में बिजली कटौती और ओवरलोड की समस्या से निपटने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। शहर में चार नए पावर सब स्टेशन (पीएसएस) तेजी से तैयार किए जा रहे हैं, जिनसे करीब 5 लाख से अधिक आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। लक्ष्य साफ है—पीक डिमांड के दौरान भी ‘जीरो पावर कट’ सुनिश्चित करना।
कहां बन रहे हैं नए पावर सब स्टेशन?
बिजली आपूर्ति करने वाली एजेंसी पटना इलेक्ट्रिक सप्लाई अंडरटेकिंग (पेसू) के अनुसार—
पेसू पश्चिमी क्षेत्र में आसोपुर, उसरी और बिहटा में नए पीएसएस बनाए जा रहे हैं।
पेसू पूर्वी क्षेत्र में जगनपुरा (खेमनीचक) इलाके में पावर सब स्टेशन का निर्माण अंतिम चरण में है।
पेसू के जीएम दिलीप कुमार सिंह ने बताया कि हर साल बढ़ती मांग को देखते हुए नए-नए पीएसएस जोड़े जा रहे हैं, ताकि अधिकतम खपत के समय भी सप्लाई प्रभावित न हो।
10 एमवीए के दो-दो ट्रांसफॉर्मर, मजबूत होगा ग्रिड
हर नए पावर सब स्टेशन में 10 एमवीए क्षमता के दो पावर ट्रांसफॉर्मर लगाए जा रहे हैं। आसोपुर पावर सब स्टेशन बनकर तैयार हो चुका है और वहां ट्रांसफॉर्मर को चार्जिंग में इंस्टॉल भी कर दिया गया है। इससे लोकल फीडरों पर लोड संतुलित होगा और ट्रिपिंग/लो-वोल्टेज की समस्या में कमी आएगी।
1000 मेगावाट पार कर चुकी है गर्मियों की खपत
पिछले दो वर्षों में गर्मियों के दौरान पटना शहर में रोजाना बिजली खपत 1000 मेगावाट से अधिक रही है। इस वर्ष अनुमान है कि पीक डिमांड 1200–1400 मेगावाट तक पहुंच सकती है। राज्य स्तर पर भी गर्मियों में खपत 10,000 मेगावाट के आसपास दर्ज की गई थी, जिसे उत्तर और दक्षिण बिहार की बिजली कंपनियों ने सफलतापूर्वक मैनेज किया।
क्यों जरूरी थे नए पीएसएस?
तेजी से बढ़ती आबादी और नए आवासीय-व्यावसायिक कनेक्शन
एसी, कूलर और अन्य उपकरणों के कारण पीक डिमांड में उछाल
पुराने फीडरों पर ओवरलोड की समस्या
शहर में फिलहाल 75 से अधिक पावर सब स्टेशन कार्यरत हैं, लेकिन बढ़ती मांग को देखते हुए नए स्टेशन जोड़ना अनिवार्य हो गया था।
क्या मिलेगा फायदा?
ओवरलोड और ट्रिपिंग में कमी
वोल्टेज फ्लक्चुएशन से राहत
पीक ऑवर में भी निर्बाध आपूर्ति
5 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को सीधा लाभ
गर्मियों से पहले इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड का यह कदम राजधानी में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। अब नजर इस बात पर है कि बढ़ती मांग के बीच सिस्टम कितना स्थिर और प्रभावी रहता है।
बिहार राज्यसभा चुनाव 2026: एनडीए का शक्ति प्रदर्शन, नीतीश समेत 5 दिग्गजों ने भरा नामांकन
Patna News: बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी तापमान चरम पर है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से गुरुवार को पांच प्रमुख नेताओं ने नामांकन दाखिल कर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी। जदयू से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, भाजपा की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और शिवेश कुमार, तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने राज्यसभा के लिए अपना-अपना पर्चा दाखिल किया।
नामांकन के दौरान शक्ति प्रदर्शन
नामांकन प्रक्रिया के दौरान पटना में एनडीए ने जबरदस्त शक्ति प्रदर्शन किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और भी अहम बना दिया। उनके साथ केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
इसके अलावा जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और लोजपा (रामविलास) के सांसद अरुण भारती समेत कई सांसद, विधायक और विधान पार्षद उपस्थित रहे।
सियासी मायने: क्या संकेत दे रहा है यह फैसला?
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा के लिए नामांकन बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव की आहट माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आगामी विधानसभा चुनाव और केंद्र-राज्य की सियासत में नई रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वहीं भाजपा द्वारा अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को उम्मीदवार बनाना भी संगठनात्मक मजबूती और गठबंधन के भीतर संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
उपेन्द्र कुशवाहा की उम्मीदवारी से एनडीए ने ओबीसी और कुशवाहा वोट बैंक को मजबूत संदेश देने की कोशिश की है, जबकि रामनाथ ठाकुर की मौजूदगी सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
विपक्ष पर दबाव
एनडीए के इस सामूहिक नामांकन ने विपक्ष पर भी मनोवैज्ञानिक दबाव बना दिया है। बड़ी संख्या में केंद्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया कि गठबंधन इस चुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देख रहा है।
आगे क्या?
अब निगाहें मतदान प्रक्रिया और संभावित राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हैं। यदि सभी प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए जाते हैं, तो यह एनडीए की रणनीतिक जीत मानी जाएगी। वहीं विपक्ष की ओर से संभावित रणनीति भी आने वाले दिनों में तस्वीर साफ करेगी।











