मंजूषा टी-शर्ट से साड़ी, दुपट्टे, बैग और जूट क्राफ्ट तक ने खींचा लोगों का ध्यान; बाढ़ राहत शिविर के बच्चों की कलाकृतियां बनीं खास आकर्षण, डीएम अलंकृता पाण्डेय ने खुद खरीदी एक कलाकृति
Bhagalpur News: अंग प्रदेश की समृद्ध लोक परंपरा और विश्वस्तर पर पहचान बना रही मंजूषा लोककला को संरक्षण, बाजार और नई पीढ़ी से जोड़ने की दिशा में भागलपुर में आयोजित पांचवीं ‘मंजूषा हटिया सह लोक कला प्रदर्शनी’ उत्साह के साथ संपन्न हुई। भागलपुर संग्रहालय परिसर में आयोजित इस आयोजन में स्थानीय कलाकारों, कला प्रेमियों, युवाओं और आम नागरिकों की बड़ी भागीदारी रही।
कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार, जिला कला एवं संस्कृति कार्यालय, भागलपुर तथा भागलपुर संग्रहालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मंजूषा हटिया में दिनभर मेले जैसा माहौल रहा। स्थानीय कलाकारों की बनाई कलाकृतियों और हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी के साथ बिक्री भी की गई। आयोजन में 20 हजार रुपये से अधिक मूल्य की कलाकृतियों एवं हस्तनिर्मित सामग्री की बिक्री हुई।
डीएम अलंकृता पाण्डेय ने किया उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन जिलाधिकारी अलंकृता पाण्डेय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन, वरिष्ठ एवं युवा मंजूषा कलाकार राजीवकांत मिश्रा, मनोज पंडित, उलूपी झा सहित बड़ी संख्या में कलाकार, कला प्रेमी और आमजन मौजूद रहे।
मंजूषा हटिया में इस बार पारंपरिक कला के साथ कलाकारों के नए प्रयोग भी देखने को मिले। लोगों ने मंजूषा कला से सजे विभिन्न उपयोगी एवं सजावटी उत्पादों में खास रुचि दिखाई।
टी-शर्ट से साड़ी और बैग तक दिखा मंजूषा का नया अंदाज
प्रदर्शनी में मंजूषा टी-शर्ट, स्क्रीन प्रिंटिंग से तैयार कपड़े, जूट क्राफ्ट, साड़ियां, दुपट्टे, रुमाल, बैग, मंजूषा शो-पीस और सजावटी पंखे समेत कई उत्पाद प्रदर्शित किए गए।
पारंपरिक मंजूषा चित्रकला को रोजमर्रा की उपयोगी वस्तुओं से जोड़ने के इस प्रयास को लोगों ने पसंद किया। इससे यह संकेत मिला कि स्थानीय लोककला को आधुनिक जरूरतों और बाजार के अनुरूप नए उत्पादों के रूप में पेश कर कलाकारों के लिए आय के नए रास्ते तैयार किए जा सकते हैं।
बाढ़ राहत शिविर के बच्चों की कला ने खींचा ध्यान
पांचवीं मंजूषा हटिया का सबसे भावुक और खास आकर्षण बाढ़ राहत शिविर में रहने वाले बच्चों द्वारा तैयार की गई मंजूषा कलाकृतियां रहीं।
राहत शिविर में आयोजित कला गतिविधियों के दौरान बच्चों ने मंजूषा कला के माध्यम से अपनी रचनात्मकता को सामने रखा था। प्रदर्शनी में जब उनकी कलाकृतियां पहुंचीं तो लोगों ने उनकी प्रतिभा की सराहना की।
जिलाधिकारी अलंकृता पाण्डेय ने बच्चों का उत्साह बढ़ाते हुए स्वयं उनकी बनाई एक मंजूषा कलाकृति खरीदी। इस पहल से बच्चों में अपनी प्रतिभा को लेकर आत्मविश्वास बढ़ा और यह संदेश भी गया कि कठिन परिस्थितियों के बीच कला बच्चों को सकारात्मक सोच और रचनात्मक अभिव्यक्ति का माध्यम दे सकती है।
डीएम ने डिजिटल मार्केट पर दिया जोर
जिलाधिकारी अलंकृता पाण्डेय ने मंजूषा हटिया की पहल की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय कलाकारों को सीधे बाजार से जोड़ना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कला केवल प्रदर्शनी तक सीमित न रहे, बल्कि कलाकारों को उनके उत्पादों का उचित बाजार और अधिक से अधिक ग्राहक मिलें।
उन्होंने डिजिटल मार्केट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से मंजूषा कलाकारों तथा उनके उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने पर जोर दिया। डीएम ने कहा कि मंजूषा कला को नई पीढ़ी से जोड़ने के साथ आधुनिक माध्यमों और बाजार की जरूरतों के अनुरूप नए प्रयोग किए जाने चाहिए, ताकि कलाकारों को कला के माध्यम से स्थायी आर्थिक अवसर मिल सकें।
हर महीने आयोजित होती है मंजूषा हटिया
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने बताया कि मंजूषा हटिया का आयोजन सामान्य तौर पर प्रत्येक माह के प्रथम रविवार को भागलपुर संग्रहालय परिसर में किया जाता है। इस बार प्रथम रविवार को जितिया पर्व होने के कारण आयोजन मंगलवार को किया गया।
उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य केवल कलाकृतियों की बिक्री करना नहीं है, बल्कि मंजूषा कलाकारों को साझा मंच देना, उनके बीच संवाद और अनुभवों का आदान-प्रदान बढ़ाना तथा स्थानीय कला को आम लोगों के जीवन से जोड़ना भी है।
उन्होंने बताया कि प्रत्येक आयोजन के साथ नए कलाकार जुड़ रहे हैं। वरिष्ठ कलाकार युवा कलाकारों से मिलकर उनके काम को देखते हैं और उन्हें मार्गदर्शन भी देते हैं। इस तरह मंजूषा हटिया कलाकारों के लिए कला, संवाद और बाजार—तीनों का मंच बनता जा रहा है।
कलाकारों ने एक-दूसरे की कलाकृतियां भी खरीदीं
मंजूषा हटिया की एक खास बात यह भी रही कि कलाकारों ने स्वयं दूसरे कलाकारों की कलाकृतियां खरीदकर उनकी प्रतिभा का सम्मान किया।
इससे कलाकारों के बीच सहयोग और सामूहिकता की भावना मजबूत हुई। साथ ही यह संदेश भी सामने आया कि स्थानीय कला और कलाकारों के आर्थिक सशक्तीकरण में कलाकार समुदाय की आपसी भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।
बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुति ने बांधा समां
कार्यक्रम के दौरान आम्रपाली कला प्रशिक्षण केंद्र, भागलपुर के बच्चों ने जिला पदाधिकारी और उपस्थित अतिथियों के समक्ष सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। बच्चों की मनमोहक प्रस्तुति ने पूरे आयोजन में सांस्कृतिक रंग भर दिया। दर्शकों ने तालियों के साथ बच्चों का उत्साह बढ़ाया।
35 कलाकारों को प्रशस्ति पत्र देकर किया गया सम्मानित
कार्यक्रम में सेवा संकल्प अभियान के तहत टाउन हॉल में नाटक की प्रस्तुति देने वाले 35 कलाकारों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी अंकित रंजन ने कलाकारों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।
इसके अलावा पांचवीं मंजूषा हटिया के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली कुमारी श्वेता, वरिष्ठ मंजूषा कलाकार एवं संयोजक तथा सुरभि सुमन, युवा मंजूषा कलाकार एवं संयोजक को भी सम्मानित किया गया।
अंकित रंजन ने कहा कि दोनों संयोजकों ने आयोजन की तैयारियों और कलाकारों के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा कई नए कलाकारों को मंजूषा हटिया से जोड़ने का प्रयास किया।
मंजूषा कला को नई पहचान देने की दिशा में पहल
पांचवीं मंजूषा हटिया ने एक बार फिर यह साबित किया कि लोककला का संरक्षण केवल उसकी परंपरा को बचाए रखने तक सीमित नहीं है। कलाकारों को बाजार, आधुनिक प्रयोग, डिजिटल प्लेटफॉर्म और नई पीढ़ी से जोड़ना भी उतना ही जरूरी है।
भागलपुर संग्रहालय परिसर में आयोजित यह पहल मंजूषा कलाकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने, ग्राहकों से सीधे जुड़ने और अपनी रचनाओं को बाजार तक पहुंचाने का अवसर दे रही है। नियमित आयोजन के साथ मंजूषा कला को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


