Bhagalpur News: बिहार के भागलपुर से जदयू (JDU) सांसद अजय कुमार मंडल की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं. बीते साल हवाई अड्डा मैदान के समीप पत्रकारों के साथ हुई मारपीट और अभद्रता के मामले में पुलिस ने अपनी जांच पूरी कर ली है. जांच में सांसद के खिलाफ लगे आरोपों को पुलिस ने बिल्कुल सही पाया है. इसके बाद अब भागलपुर के एसएसपी (SSP) प्रमोद कुमार यादव ने सांसद के खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाने के लिए जिलाधिकारी (DM) से अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) की मांग की है.
30 जनवरी 2025 को तिलकामाझी थाने में दर्ज हुआ था केस
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह पूरा विवाद पिछले साल का है जब हवाई अड्डा मैदान के पास कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ मारपीट की घटना हुई थी. इस संबंध में 30 जनवरी 2025 को भागलपुर के तिलकामाझी थाने में सांसद और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था.
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसकी बारीकी से जांच की. पुलिस निरीक्षक (विधि-व्यवस्था अंचल, भागलपुर) ने अपनी तफ्तीश के बाद यह साफ कर दिया है कि जदयू सांसद अजय कुमार मंडल के विरुद्ध लगाए गए आरोप पूरी तरह सत्य हैं.
आईओ ने एसएसपी को लिखा था पत्र, अब डीएम के फैसले का इंतजार
इस हाई-प्रोफाइल मामले के अनुसंधानकर्ता (IO) राजेश्वर सिंह ने केस की जांच रिपोर्ट तैयार करने के बाद अभियोजन स्वीकृति आदेश के लिए एसएसपी को पत्र लिखा था. आईओ की रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए फाइल जिलाधिकारी (DM) को सौंप दी है.
एसएसपी प्रमोद कुमार यादव का बयान:
“तिलकामाझी थाना में दर्ज मामले को लेकर सांसद पर अभियोजन की स्वीकृति के लिए डीएम को पत्र लिखा गया है। जैसे ही वहां से स्वीकृति मिल जाएगी, कानून के मुताबिक आगे की सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।”
फिलहाल जमानत पर बाहर हैं सांसद अजय मंडल
आपको बता दें कि इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद सांसद अजय कुमार मंडल ने 31 जनवरी 2025 को न्यायालय (कोर्ट) में आत्मसमर्पण (Surrender) किया था. अदालत से राहत मिलने के बाद फिलहाल वे जमानत (Bail) पर बाहर चल रहे हैं. लेकिन अब पुलिस जांच में दोषी पाए जाने और एसएसपी द्वारा मुकदमा चलाने की इजाजत मांगे जाने के बाद उनकी मुश्किलें बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच चुकी हैं. यदि जिलाधिकारी से हरी झंडी मिलती है, तो सांसद को अदालती कार्यवाही और कानूनी शिकंजे का सामना करना पड़ेगा.


