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बारात जाते ही घर में महिलाओं ने मचाया ऐसा धमाल! भागलपुर में ‘डोमकच’ देख झूम उठे लोग

पाश्चात्य संस्कृति को मात देने उतरी मिथिला-अंग की परंपरा; राजेश झा के निर्देशन में कलाकारों ने लूटी वाहवाही।

Bhagalpur News: भागलपुर। शहर के ऐतिहासिक चंपानगर स्थित ज्योति कला केंद्र में बीते दिनों लोक संस्कृति, पारंपरिक लोकगीत और लोकनाट्य का एक अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रसिद्ध रंगकर्मी राजेश कुमार झा के कुशल निर्देशन में पारंपरिक लोक नाट्य ‘डोमकच’ का अत्यंत प्रभावशाली मंचन किया गया। इस गौरवमयी प्रस्तुति का सह-निर्देशन संगीता झा ने किया।

​कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर:

  • ​कपिल देव रंग (वरिष्ठ कलाकार एवं रंगकर्मी)
  • ​रघुनंदन झा (सेवानिवृत्त शिक्षक)
  • ​चंचल कुमार (प्राचार्य, ज्योति कला केंद्र)
  • ​राजेश कुमार झा (निर्देशक)
  • ​संगीता झा (सह-निर्देशक) सहित अन्य गणमान्य अतिथि संयुक्त रूप से उपस्थित रहे।

​ सशक्त अभिनय से कलाकारों ने लूटी वाहवाही

​मंचन के दौरान कलाकारों ने अपनी बेहतरीन अभिनय क्षमता और संवाद अदायगी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। नाटक के निर्देशक राजेश कुमार झा ने स्वयं ‘सोम’ की मुख्य भूमिका निभाकर अपनी बहुमुखी प्रतिभा का परिचय दिया।

​प्रमुख किरदार और कलाकार:

कलाकार का नाम

निभाया गया किरदार

राजेश कुमार झा

सोम

मोनिका कुमारी

सोमिन

महेश शाह

मालकिन

अर्चना कुमारी

लड़की

जयंत जलद

डॉक्टर

सौरभ कुमार

दूल्हा

सभी कलाकारों के सधे हुए अभिनय को दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा।

​ संगीत पक्ष ने बाँधा समाँ, लोकगीतों से गूंजा हॉल

​इस लोकनाट्य की सफलता में इसके संगीत पक्ष का बहुत बड़ा योगदान रहा। पारंपरिक वाद्यों और मधुर गायन ने पूरे माहौल को उत्सव के रंग में सराबोर कर दिया:

  • ​हारमोनियम पर: कपिल देव कृपाल
  • ​नाल पर: कृष्ण मंडल
  • ​लोक गायन: रूपम कुमारी

​रूपम कुमारी की सुरीली आवाज और लोकगीतों की मधुर धुन ने ऐसा वातावरण बनाया कि दर्शक पूरी तरह अंग और मिथिला की लोक संस्कृति के रंग में रंग गए।

​ पाश्चात्य संस्कृति के दौर में अपनी जड़ों को बचाना जरूरी: राजेश झा

​इस सांस्कृतिक संध्या में शहर के अनेक शिक्षाविद, समाजसेवी, चिकित्सक, कलाकार एवं संस्कृति प्रेमी बड़ी संख्या में मौजूद थे।

​”आज के आधुनिक समय में युवा पीढ़ी तेजी से पाश्चात्य (वेस्टर्न) संस्कृति की ओर आकर्षित हो रही है। ऐसे दौर में अपनी समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। युवाओं को अपनी लोक संस्कृति को जानना, समझना और उसे आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।”

— राजेश कुमार झा, निर्देशक

​ क्या है ‘डोमकच’ और क्यों है यह खास?

​‘डोमकच’ बिहार, झारखंड और मुख्य रूप से मिथिला-अंग क्षेत्र का अत्यंत लोकप्रिय और पारंपरिक लोक नाट्य व लोकनृत्य है।

  • ​कब होता है आयोजन? इसका मंचन मुख्य रूप से विवाह समारोह के दौरान किया जाता है। जब बारात दूल्हे के साथ लड़की के घर चली जाती है, तब वर पक्ष के घर में बची महिलाएं पूरी रात जागकर गीत, नृत्य और हास्य-व्यंग्य के माध्यम से डोमकच प्रस्तुत करती हैं।
  • ​स्वरूप: इसमें महिलाएं पुरुषों का वेश धारण कर सामाजिक जीवन, पारिवारिक संबंधों, पुरानी रीतियों और हास्यपूर्ण प्रसंगों पर व्यंग्य और अभिनय करती हैं।
  • ​महत्व: यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह महिला अभिव्यक्ति, सामाजिक एकता और हमारी सांस्कृतिक विरासत का एक जीवंत प्रतीक है।
विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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