Bhagalpur News: भागलपुर में बाढ़ के विकराल रूप ने लाखों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। हजारों बेघर लोग राहत शिविरों में दिन काटने को मजबूर हैं। हालांकि, इस आपदा और मुश्किल हालातों के बीच शहर के पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर स्थित बाढ़ राहत शिविर से एक बेहद खूबसूरत, भावुक और सकारात्मक तस्वीर सामने आई है।
घर डूबा तो राहत शिविर बना खुशियों का जरिया
नाथनगर की रहने वाली सात महीने की गर्भवती शोभा देवी बाढ़ के कारण अपना घर छोड़कर अपने परिवार के साथ पॉलिटेक्निक कॉलेज के राहत शिविर में शरण लिए हुए हैं। हिंदू परंपरा के अनुसार गर्भावस्था के सातवें महीने में गोद भराई की रस्म होना आवश्यक था, लेकिन घर और गांव के जलमग्न होने से परिजन बेहद चिंतित थे।
आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका की पहल: पारंपरिक रीति-रिवाज से निभाई रस्म
पारिवारिक विवशता को देखते हुए राहत शिविर में तैनात आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका आगे आईं। उन्होंने शिविर के माहौल को उत्सव में बदलते हुए पूरी आत्मीयता से शोभा देवी की गोद भराई की रस्म संपन्न कराई।
- पारंपरिक रस्म: सेविका ने पारंपरिक रीति-रिवाज का पालन करते हुए गर्भवती शोभा देवी को सिंदूर लगाया और मंगल गीतों के बीच रस्म पूरी की।
- पोषण व स्वास्थ्य देखभाल: रस्म के बाद उन्हें पौष्टिक आहार (पोषण फल व सामग्री) भेंट किया गया और उनकी स्वास्थ्य जांच भी कराई गई।
मुसीबत के दौर में खिल उठे परिजनों के चेहरे
घर-बार छूटने के दर्द के बीच इस आयोजन ने पीड़ित परिवार को काफी राहत दी। परिजनों ने बताया कि बाढ़ के कारण घर पर यह परंपरा पूरी होना असंभव लग रहा था, लेकिन आंगनबाड़ी कर्मियों के इस सराहनीय प्रयास से खुशियों का एक अनमोल पल मिल गया।
महिला पर्यवेक्षिका रंजना भारती और गर्भवती की परिजन रेखा देवी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी सामाजिक और मानवीय जिम्मेदारियों को निभाना ही सही मायने में सेवा है।


