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DSP बनकर नौकरी दिलाने का झांसा, लाखों की कथित ठगी; कैंसर पीड़िता के 5 लाख रुपये पर भी सवाल

Bhagalpur News: खुद को डीएसपी बताकर नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये की कथित ठगी करने के आरोप में पुलिस विभाग के डाकिया मनोज वर्मा की गिरफ्तारी अब सवालों के घेरे में है। आरोपी के खिलाफ बांका के बाद भागलपुर के बाईपास थाना क्षेत्र में भी प्राथमिकी दर्ज होने की बात सामने आई है। वहीं, बांका कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने का भी दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से कथित तौर पर ठगी के शिकार लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर और संवेदनशील मामला फोर्थ स्टेज कैंसर से जूझ रहीं सोनम भारती का है। सोनम का आरोप है कि मनोज वर्मा ने उन्हें नौकरी दिलाने का भरोसा देकर अलग-अलग माध्यमों से करीब 5 लाख रुपये अपने बैंक खाते में मंगवाए। रकम देने के बाद भी नौकरी नहीं मिली। जब सोनम ने अपनी रकम वापस मांगी तो कथित तौर पर उनका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया गया।

कैंसर से जूझ रही पीड़िता, अपने ही पैसे के लिए लगा रही चक्कर

सोनम भारती गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं और उन्हें अपने इलाज के लिए पैसों की बेहद जरूरत है। उनका आरोप है कि नौकरी के नाम पर दिए गए 5 लाख रुपये वापस नहीं मिलने के कारण उनकी आर्थिक परेशानी और बढ़ गई है।

पीड़िता के मुताबिक, रकम वापस मांगने के बाद उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इतना ही नहीं, सोनम ने आरोप लगाया कि मनोज वर्मा के रिश्तेदारों की ओर से फोन कर उन्हें मामला वापस लेने का दबाव भी बनाया जा रहा है।

बीमारी और आर्थिक संकट के बीच सोनम अब अपने ही पैसे वापस पाने और न्याय की गुहार लेकर अधिकारियों के कार्यालयों का चक्कर लगा रही हैं।

IG कार्यालय पहुंची पीड़िता

न्याय की उम्मीद में सोनम भारती एक बार फिर भागलपुर सिविल कोर्ट के अधिवक्ता राजीव सिंह के पास पहुंचीं। इसके बाद उन्होंने आईजी कार्यालय में आवेदन देकर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने और अपनी करीब 5 लाख रुपये की रकम वापस दिलाने की मांग की।

पीड़िता की मांग है कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच करते हुए आरोपी को जल्द गिरफ्तार करे और ठगी की रकम वापस दिलाने की दिशा में कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करे।

दर्जनभर से अधिक लोगों से ठगी का आरोप

आरोप है कि मनोज वर्मा ने खुद को पुलिस अधिकारी यानी डीएसपी बताकर लोगों को प्रभावित किया और विभिन्न सरकारी संस्थानों में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर उनसे रकम ली। कथित तौर पर कृषि विभाग, एनटीपीसी समेत अन्य संस्थानों में नौकरी दिलाने के नाम पर भी लोगों से पैसे लेने के आरोप लगाए गए हैं।

इस मामले में कितने लोगों से कितनी रकम ली गई और कुल कितनी आर्थिक ठगी हुई, इसका वास्तविक आंकड़ा पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

अधिवक्ता ने उठाए गिरफ्तारी पर सवाल

ठगी के आरोपों का सामना कर रहे लोगों की ओर से कानूनी लड़ाई लड़ रहे अधिवक्ता राजीव सिंह ने कहा कि आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है और बांका कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में आरोपी की गिरफ्तारी अब तक नहीं होने पर उन्होंने सवाल उठाए हैं।

अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि आरोपी को कहीं न कहीं पुलिस का संरक्षण मिल रहा है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

वारंट के बावजूद गिरफ्तारी क्यों नहीं?

पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर है। यदि प्राथमिकी दर्ज है और अदालत से गिरफ्तारी वारंट जारी होने की पुष्टि होती है, तो इसके बावजूद आरोपी अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों है?

क्या पुलिस आरोपी का पता लगाने में असमर्थ है या उसकी गिरफ्तारी में कोई कानूनी अथवा अन्य अड़चन सामने आ रही है? इन सवालों का जवाब पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई और बयान से ही स्पष्ट होगा।

फिलहाल गंभीर बीमारी से जूझ रही सोनम भारती की नजर पुलिस की कार्रवाई पर टिकी है। उनके लिए यह सिर्फ ठगी की रकम का मामला नहीं, बल्कि इलाज के लिए जरूरी 5 लाख रुपये वापस पाने और न्याय हासिल करने की लड़ाई भी है।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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