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120 साल पुरानी मढ़ौरा चीनी मिल फिर से चालू होने की उम्मीद, तमिलनाडु के निवेशकों ने किया निरीक्षण

सात निश्चय–3 के तहत ‘समृद्ध उद्योग–सशक्त बिहार’ मिशन को गति, निवेशकों ने मिल परिसर और गन्ना किसानों की स्थिति का लिया जायजा

Patna News: सारण जिले में वर्षों से बंद पड़ी ऐतिहासिक मढ़ौरा चीनी मिल को पुनर्जीवित करने की दिशा में बिहार सरकार की पहल अब जमीन पर दिखने लगी है। रविवार को तमिलनाडु के निवेशकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मढ़ौरा स्थित इस बंद पड़ी चीनी मिल का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान निवेशकों ने मिल परिसर की मौजूदा स्थिति, उपलब्ध आधारभूत संरचनाओं और मशीनरी का जायजा लिया तथा क्षेत्र के गन्ना किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और संभावनाओं को समझने का प्रयास किया।

राज्य सरकार की सात निश्चय–3 योजना के तहत ‘समृद्ध उद्योग–सशक्त बिहार’ के लक्ष्य को साकार करने के लिए बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू कराने और राज्य में नई चीनी मिलें स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। इसी पहल के तहत तमिलनाडु के प्रतिष्ठित एसएनजे ग्रुप ऑफ कंपनीज के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक एस. एन. जयमुरुगन, अध्यक्ष सेल्वा कुमार, उपाध्यक्ष श्री कृष्ण तथा ग्रुप ऑडिटर बिमलेंद्र मिश्रा ने गन्ना उद्योग विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर मढ़ौरा चीनी मिल का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मिल परिसर में मौजूद भवनों, गोदामों और अन्य आधारभूत संरचनाओं की स्थिति का आकलन किया। साथ ही क्षेत्र के किसानों से मुलाकात कर गन्ना उत्पादन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की और खेतों में जाकर गन्ना फसल की वर्तमान स्थिति का भी अवलोकन किया। निवेशकों ने किसानों से उत्पादन, लागत और विपणन से जुड़ी चुनौतियों के बारे में भी जानकारी ली।

गौरतलब है कि सारण जिले में स्थित मढ़ौरा चीनी मिल का इतिहास काफी पुराना रहा है। इसकी स्थापना वर्ष 1904 में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान हुई थी और इसे बिहार ही नहीं बल्कि देश की शुरुआती चीनी मिलों में गिना जाता है। 1990 के दशक में आर्थिक कारणों से यह मिल बंद हो गई थी, जिसके बाद धीरे-धीरे इसके अधिकांश उपकरण और संरचनाएं जर्जर हो गईं। अब राज्य सरकार की पहल से इस ऐतिहासिक मिल के फिर से चालू होने की उम्मीदें जगने लगी हैं।

निरीक्षण के दौरान सहायक ईखायुक्त वेदव्रत कुमार और ईख पदाधिकारी कोमर कानन भी उपस्थित रहे। अधिकारियों का मानना है कि यदि निवेशकों की रुचि और सरकारी प्रयास सफल होते हैं, तो मढ़ौरा चीनी मिल का पुनरुद्धार न केवल क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा, बल्कि हजारों किसानों और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, मढ़ौरा चीनी मिल का पुनर्जीवन बिहार के चीनी उद्योग को नई दिशा दे सकता है। राज्य सरकार की योजना है कि बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनः चालू करने के साथ-साथ आने वाले समय में 25 नई चीनी मिलों की स्थापना भी की जाए, जिससे गन्ना उत्पादन और चीनी उद्योग दोनों को मजबूती मिल सके।

मढ़ौरा चीनी मिल का यह निरीक्षण बिहार में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने और राज्य के पारंपरिक चीनी उद्योग को फिर से मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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