Patna News: बिहार की राजधानी पटना को सुगम, सुरक्षित और पूरी तरह जाम-मुक्त बनाने के लिए पथ निर्माण विभाग ने तकनीक आधारित मास्टर प्लान पर काम शुरू कर दिया है। आज विश्वेश्वरैया भवन स्थित पथ निर्माण विभाग के सभागार में विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल की अध्यक्षता में “यातायात जाम के प्रबंधन एवं समाधान” विषय पर एक दिवसीय उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इस बैठक में विशेषज्ञ वक्ताओं के रूप में पूर्व CRRI निदेशक व IIT बॉम्बे के पूर्व प्रोफेसर प्रो. पी. के. सिकदर तथा Arcadis IBI Group के कंट्री हेड वेंकटा चुंदुरू ने हिस्सा लिया।
इन प्रमुख हॉटस्पॉट्स और चुनौतियों पर हुई विस्तृत चर्चा
बैठक के दौरान पटना की भौगोलिक संरचना, तेजी से बढ़ती आबादी और सड़कों पर वाहनों के भारी दबाव के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। शहर के सबसे व्यस्त एवं संवेदनशील इलाकों जैसे:
- डाक बंगला चौराहा, पटना जंक्शन रोड, जीपीओ गोलंबर और एग्जीबिशन रोड
- बोरिंग रोड, गांधी मैदान, पीएमसीएच और अशोक राजपथ
- सगुना मोड़, अनीसाबाद और बेली रोड
इन क्षेत्रों में प्रतिदिन लगने वाले भीषण जाम और सड़क दुर्घटनाओं की गंभीरता पर गहन मंथन किया गया।
‘Mission Sugam Patna: ASTraM and SOS’ तकनीकी ड्राफ्ट पेश
बैठक के दौरान Arcadis द्वारा तैयार विशेष तकनीकी प्रेजेंटेशन “Mission Sugam Patna: ASTraM and SOS” पेश किया गया। इसके तहत पटना के एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) का अधिकतम उपयोग करते हुए उस पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स की एक इंटेलिजेंस लेयर लागू करने की योजना है।
पटना ट्रैफिक सुधार प्लान की 8 मुख्य विशेषताएं:
- AI से जाम का एडवांस पूर्वानुमान: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल के जरिए ट्रैफिक जाम लगने से 30 से 60 मिनट पहले ही संभावित दबाव का पता चल जाएगा, जिससे ट्रैफिक सिग्नल और डायवर्जन को स्वचालित (Automated) रूप से बदला जा सकेगा।
- ई-रिक्शा और ऑटो का नियंत्रण: स्टेशन और प्रमुख बाजारों में ऑटो/ई-रिक्शा के अनियंत्रित ठहराव को रोकने के लिए जियोफेंसिंग, वर्चुअल स्टैंड और शेड्यूलिंग लागू की जाएगी।
- पटना मेट्रो कनेक्टिविटी मैनेजमेंट: भविष्य में पटना मेट्रो स्टेशनों के आसपास होने वाली यात्रियों की भीड़ और वाहनों के ड्रॉप-ऑफ को सुचारू रूप से नियंत्रित किया जाएगा।
- ट्रैफिक जवानों की डिजिटल मॉनिटरिंग: ऑन-ड्यूटी तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के लिए ‘अटेंडेंस मॉनिटरिंग सिस्टम’ लागू होगा।
- 10 मिनट में अस्पताल पहुंचेगी एम्बुलेंस (ग्रीन कॉरिडोर): दुर्घटना की AI द्वारा स्वचालित पहचान होते ही नजदीकी एम्बुलेंस को अलर्ट जाएगा और ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनाकर पीड़ित को 10 मिनट के भीतर अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था होगी।
- अतिक्रमण और अवैध पार्किंग पर वार: सड़कों के किनारों से अनधिकृत पार्किंग और अतिक्रमण चिन्हित कर हटाया जाएगा, जिससे सड़क की प्रभावी चौड़ाई बढ़ सके।
- जलजमाव में डायवर्जन मैनेजमेंट: बारिश के दौरान जलभराव वाले रास्तों की अग्रिम सूचना देकर गाड़ियों को वैकल्पिक मार्गों पर मोड़ा जाएगा ताकि आपातकालीन सेवाएं प्रभावित न हों।
- अन्य शहरों के लिए मॉडल: पटना के इस मॉडल की सफलता के बाद राज्य के अन्य प्रमुख शहरी क्षेत्रों में भी इस कार्ययोजना को लागू किया जाएगा।
वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने लिया ICCC का जायजा
कार्यक्रम में बीएसआरडीसीएल (BSRDCL) के प्रबंध निदेशक, पटना नगर आयुक्त, ट्रैफिक एसपी, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड (BRPNNL) के प्रबंध निदेशक, जिला प्रशासन और यातायात पुलिस के वरीय अधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के समापन के बाद प्रो. पी. के. सिकदर और अन्य अधिकारियों ने पथ निर्माण विभाग में स्थित इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर (ICCC) का प्रत्यक्ष निरीक्षण किया और वहां मौजूद अभियंताओं से उसकी कार्यप्रणाली की जानकारी ली।


