Bhagalpur News: कभी जिला परिषद सदस्यों के ठहरने, महत्वपूर्ण बैठकों और आधिकारिक कार्यक्रमों का प्रमुख केंद्र रहा भागलपुर का जिला परिषद डाक बंगला आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। रख-रखाव के अभाव में यह ऐतिहासिक भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है और अब यह असामाजिक तत्वों तथा नशेड़ियों का सुरक्षित ठिकाना बन गया है।
इस गंभीर मुद्दे को लेकर जिला परिषद अध्यक्ष विपिन मंडल ने स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया है और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
पुलिस की अनदेखी: दो बार शिकायत, फिर भी कार्रवाई ‘शून्य’
जिला परिषद अध्यक्ष विपिन मंडल ने बताया कि डाक बंगले की सुरक्षा और इसके जीर्णोद्धार (Renovation) को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन स्थानीय पुलिस का रवैया बेहद निराशाजनक रहा है।
“डाक बंगले में असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों के जमावड़े की लिखित और मौखिक शिकायत दो बार स्थानीय थाने में की गई, लेकिन पुलिस ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस की इस सुस्ती के कारण यहां का माहौल खराब हो रहा है। अब हम इस पूरे मामले को लेकर वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) को पत्र लिखेंगे और कड़े एक्शन की मांग करेंगे।”
— विपिन मंडल, अध्यक्ष, जिला परिषद (भागलपुर)
भवन में रह रहे छात्रों पर अध्यक्ष का स्पष्टीकरण
डाक बंगला परिसर में छात्रों के अवैध रूप से रहने को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए जिला परिषद अध्यक्ष ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि भवन में जो भी छात्र फिलहाल रह रहे हैं, वे बाहरी नहीं हैं। वे सभी जिला परिषद के सदस्यों या जिला परिषद कर्मचारियों के ही परिजन हैं, जो पढ़ाई के सिलसिले में वहां ठहरे हुए हैं।
कभी था शान, अब बना सुरक्षा के लिए खतरा
- अतीत का गौरव: यह डाक बंगला जिला परिषद के गौरवशाली इतिहास का हिस्सा रहा है, जहां कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले और बैठकें आयोजित की जाती थीं।
- वर्तमान स्थिति: भवन की जर्जर हालत, दीवारों का गिरता प्लास्टर और चारों तरफ फैली गंदगी इसे डरावना बनाती है।
- असामाजिक तत्वों का कब्जा: शाम ढलते ही यहाँ नशेड़ियों का अड्डा जम जाता है, जिससे आसपास से गुजरने वाले आम लोगों और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस की यह अनदेखी न केवल एक सरकारी संपत्ति को बर्बाद कर रही है, बल्कि शहर के सुरक्षा-व्यवस्था पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। अब देखना यह होगा कि एसएसपी को पत्र सौंपे जाने के बाद पुलिस इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाती है।


