Bhagalpur News: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में न्याय की मांग अब जनआंदोलन का रूप लेती जा रही है। राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपे जाने के बाद, अब शहर के युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों का गुस्सा सड़कों पर देखने को मिला। सोमवार की शाम मामले की निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए शहर में एक विशाल और शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला गया।
इस मार्च के जरिए नागरिकों ने साफ संदेश दिया कि वे इस लड़ाई में पीड़ित परिवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
घंटाघर से स्टेशन चौक तक गूंजी इंसाफ की आवाज
सोमवार की शाम ढलते ही शहर के ऐतिहासिक घंटाघर चौक पर सैकड़ों की संख्या में युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि और आम नागरिक हाथों में मोमबत्तियां लेकर एकत्रित हुए। घंटाघर चौक से शुरू हुआ यह कैंडल मार्च शहर के मुख्य मार्ग से होते हुए स्टेशन चौक तक पहुंचा।
मार्च के दौरान माहौल बेहद गंभीर और अनुशासित रहा। प्रदर्शनकारियों ने बिना किसी हुड़दंग के, बेहद शांतिपूर्ण तरीके से कानून के दायरे में रहकर अपनी आवाज बुलंद की।
“कानून व्यवस्था पर भरोसा बनाए रखना जरूरी” — प्रदर्शनकारी
कैंडल मार्च में शामिल वक्ताओं और नागरिकों ने कहा कि हमारा समाज पूरी तरह से देश के कानून और न्याय व्यवस्था में अटूट विश्वास रखता है। लेकिन, पुलिसिया कार्रवाई के दौरान भरत तिवारी की हुई मौत ने जनता के मन में कई गंभीर संशय पैदा कर दिए हैं।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें:
- दोषियों पर कड़ी कार्रवाई: पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराकर घटना के पीछे के असल सच को सामने लाया जाए और दोषियों पर सख्त कानूनी गाज गिरे।
- पारदर्शी जांच का भरोसा: सरकार और प्रशासन ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित करे जिससे आम जनता का पुलिस की कार्यप्रणाली पर भरोसा डिगे नहीं, बल्कि और मजबूत हो।
- पीड़ित परिवार को न्याय: पीड़ित पक्ष को बिना किसी प्रशासनिक या राजनीतिक दबाव के उचित न्याय और सुरक्षा दी जाए।
शहर के कई प्रमुख चेहरे मार्च में रहे मौजूद
इस कैंडल मार्च का नेतृत्व और समर्थन करने के लिए समाज के हर वर्ग के लोग आगे आए। मुख्य रूप से शुभम तिवारी, नितेश चौबे, भास्कर तिवारी, नीरज चौधरी, अभिषेक रॉय सहित भारी संख्या में स्थानीय युवा, बुद्धिजीवी और सामाजिक प्रतिनिधि इस न्याय मार्च का हिस्सा बने और अपनी एकजुटता प्रकट की।
लोगों ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जब तक इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ जांच शुरू नहीं होती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक न्याय की यह मांग लोकतांत्रिक तरीके से लगातार जारी रहेगी।


