Bhagalpur News: रेशमी शहर भागलपुर में नगर निगम के विकास और जल-निकासी के तमाम बड़े-बड़े दावों की पोल एक बार फिर खुल गई है। शनिवार को महज 10 मिनट की झमाझम बारिश ने पूरे शहर की व्यवस्था को घुटनों पर ला दिया। शहर के प्रमुख व्यावसायिक बाजारों से लेकर रिहायशी मोहल्लों तक की सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं। हर तरफ घुटने भर पानी भर जाने से आम जनता और दुकानदारों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ा।
स्मार्ट सिटी का सच: सड़कें बनीं तालाब, दुकानें पानी में समाईं
स्मार्ट सिटी का तमगा हासिल कर चुके भागलपुर में महज 10 मिनट की बारिश का पानी निकासी के लिए तरसता नजर आया। मुख्य बाजारों में नालों का गंदा पानी सड़कों पर उफान मारने लगा, जिससे राहगीरों का चलना दूभर हो गया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जलजमाव की यह विकराल समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि सालों से हर मानसून में शहरवासियों को इसी नरक से गुजरना पड़ता है। नगर निगम हर साल लाखों-करोड़ों रुपए नालों की सफाई के नाम पर कागजों में बहा देता है, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
जनता सड़कों पर बेहाल, एसी चेंबर में महापौर!
शहर में फैले इस जलभराव के बीच स्थानीय लोगों का गुस्सा नगर निगम प्रशासन और महापौर के खिलाफ फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने आरोप लगाया कि एक तरफ शहर की जनता पानी में डूबकर राह तलाश रही है, गाड़ियां बंद हो रही हैं और दुकानों में पानी घुस रहा है, वहीं दूसरी तरफ शहर की जनप्रतिनिधि यानी महापौर अपने वातानुकूलित (एसी) चेंबर में बैठकर बेखबर हैं। लोगों का साफ कहना है कि महापौर को अपने आरामदेह चेंबर से बाहर निकलकर कम से कम बारिश के बाद शहर की जमीनी हकीकत का जायजा लेना चाहिए।
कब मिलेगी नारकीय स्थिति से मुक्ति?
भागलपुर को स्मार्ट सिटी बने कई साल बीत चुके हैं, लेकिन जब 10 मिनट की बारिश में पूरा शहर ठप्प हो जाए, तो सवाल उठना लाजमी है। करोड़ों के बजट और कागजी योजनाओं के बीच बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक भागलपुर की जनता को इस नारकीय जलजमाव से मुक्ति मिलेगी और कब जिम्मेदार अधिकारी व जनप्रतिनिधि अपनी नींद से जागेंगे?


