Bhagalpur News: सावन के पावन महीने में चारों तरफ ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयकारे गूंज रहे हैं। भागलपुर के सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल भरकर रोजाना हजारों श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) के लिए पैदल रवाना हो रहे हैं। इसी शिवमय माहौल के बीच झारखंड के गोड्डा जिले के रहने वाले संजीव कुमार आस्था और पारिवारिक मूल्यों की एक ऐसी अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं, जो पूरे क्षेत्र में चर्चा और प्रेरणा का विषय बनी हुई है। संजीव पिछले 40 वर्षों से लगातार बाबा बैद्यनाथ के दरबार की कठिन पैदल यात्रा कर रहे हैं, लेकिन इस बार उनकी यह यात्रा समाज को एक बड़ा संदेश दे रही है।
19 बेटियों का जत्था: सनातन परंपरा और नारी शक्ति का अद्भुत संगम
संजीव कुमार की इस बार की कांवड़ यात्रा इसलिए बेहद खास है क्योंकि उनके साथ उनके परिवार की 19 बेटियां भी कांवड़ उठाए पैदल देवघर जा रही हैं। इस खास टोली में कई बेटियां ऐसी हैं, जो पिछले 10 सालों से लगातार अपने पिता और अभिभावकों के साथ इस 105 किलोमीटर लंबी कठिन पैदल यात्रा का हिस्सा बन रही हैं। सावन की इस यात्रा में बेटियों का यह अटूट उत्साह, धार्मिक अनुशासन और भक्ति भाव हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है।
यात्रा का मुख्य उद्देश्य: युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और आस्था से जोड़ना
इस प्रेरणादायक यात्रा के उद्देश्य पर बात करते हुए संजीव कुमार ने बताया कि आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में युवा पीढ़ी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से दूर होती जा रही है। उनका मुख्य मकसद आज की नई पीढ़ी और खासकर बेटियों को गहरी आस्था, भक्ति और हमारी सनातन संस्कृति के संस्कारों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि जब बेटियां धर्म और परंपरा को समझेंगी, तो आने वाली पीढ़ियां अपने आप संस्कारी बनेंगी।
समाज को मिल रहा महिला सशक्तिकरण का बड़ा संदेश
रास्ते में जगह-जगह इस बेटियों की टोली का स्वागत किया जा रहा है। यात्रा में शामिल जूही कुमारी, अर्पणा झा और मीणा कुमारी जैसी युवा श्रद्धालुओं का कहना है कि बाबा भोलेनाथ की भक्ति से उन्हें मानसिक शांति और असीम ऊर्जा मिलती है। कांवड़ पथ पर बेटियों का यह अनुशासित जत्था न केवल सनातन धर्म की निष्ठा को दर्शा रहा है, बल्कि समाज को यह स्पष्ट संदेश भी दे रहा है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं।
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