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बिहार की प्राचीन पाण्डुलिपियों को सहेजने के लिए ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ शुरू: मुख्य सचिव ने दिया 30 दिनों का अल्टीमेटम

बिहार संग्रहालय में हुई उच्च स्तरीय बैठक; 'मिशन मोड' में होगा ऐतिहासिक धरोहरों का दस्तावेजीकरण और डिजिटलाइजेशन, 9 अप्रैल को होगी बड़ी समीक्षा।

Patna News: बिहार की सदियों पुरानी सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत को आधुनिक तकनीक के जरिए सुरक्षित करने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। बुधवार को पटना स्थित बिहार संग्रहालय में मुख्य सचिव  प्रत्यय अमृत (IAS) की अध्यक्षता में ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ की एक अहम बैठक संपन्न हुई। बैठक का मुख्य एजेंडा राज्य भर में बिखरी प्राचीन पाण्डुलिपियों को सूचीबद्ध करना और उन्हें डिजिटल रूप में संरक्षित करना रहा।

30 दिनों के भीतर पूरा होगा सर्वे: मुख्य सचिव का कड़ा निर्देश

​मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने पाण्डुलिपियों के संरक्षण को राज्य की पहचान से जोड़ते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पाण्डुलिपियों का संरक्षण हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए अनिवार्य है।

  • अल्टीमेटम: मुख्य सचिव ने पूरे बिहार में राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण के कार्य को अगले 30 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
  • मिशन मोड: इस अभियान को ‘मिशन मोड’ में चलाने का निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कल 4 बजे होगी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग

​अभियान की प्रगति को ट्रैक करने और जिलाधिकारियों के साथ समन्वय बिठाने के लिए कल, 09 अप्रैल को शाम 4:00 बजे एक विशेष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बुलाई गई है। इसमें सभी जिलाधिकारियों को स्थानीय क्लस्टर सेंटर और स्वतंत्र केंद्रों के साथ मिलकर कार्य की गति बढ़ाने का निर्देश दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मिला साथ

​बैठक में कला एवं संस्कृति विभाग के कई दिग्गज और विशेषज्ञ शामिल रहे, जिनमें:

  •  अंजनी कुमार सिंह, महानिदेशक, बिहार संग्रहालय।
  •  प्रणव कुमार, सचिव, कला एवं संस्कृति विभाग।
  • डॉ. इम्तियाज अहमद, पूर्व निदेशक, खुदाबख्श लाइब्रेरी।
  • प्रो. सिद्धार्थ सिंह, कुलपति, नव नालंदा महाविहार।

क्या है ‘ज्ञान भारतम् मिशन’?

​यह मिशन बिहार की उन दुर्लभ पाण्डुलिपियों को खोजने और सुरक्षित करने के लिए बनाया गया है जो ताड़ के पत्तों, भोजपत्रों या प्राचीन कागजों पर लिखी गई हैं। इन पाण्डुलिपियों में बिहार का इतिहास, दर्शन, चिकित्सा और विज्ञान समाहित है। डिजिटलाइजेशन के बाद इन्हें पूरी दुनिया के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराया जा सकेगा।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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