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PMCH के पूर्व प्रभारी प्राचार्य डॉ० नरेन्द्र प्रताप सिंह पर गिरी गाज: निजी क्लिनिक चमकाने के लिए सरकारी वाहन का दुरुपयोग, स्वास्थ्य विभाग ने बेतिया किया ट्रांसफर

बचाव में की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस पर विभाग का कड़ा रुख; 'छद्म मरीज' भेजकर पकड़ी गई थी ड्यूटी से गायब रहने की पोल

Patna News: बिहार के चिकित्सा जगत से एक बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। पटना चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (PMCH) के पूर्व प्रभारी प्राचार्य और वर्तमान में राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, बेतिया के मनोरोग विभाग में अधिसूचित प्राध्यापक डॉ० नरेन्द्र प्रताप सिंह के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। डॉ० सिंह द्वारा दिनांक 26.06.2026 को की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस के जवाब में विभाग ने एक विस्तृत और अकाट्य तथ्यात्मक प्रतिवेदन जारी किया है, जिसने डॉक्टर साहब के दावों की पूरी तरह हवा निकाल दी है।

​विभाग ने स्पष्ट किया है कि कर्तव्यहीनता, लापरवाही और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 क्यों और कैसे घिरे डॉ० नरेन्द्र प्रताप सिंह?

​स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी प्रतिवेदन में डॉ० सिंह के झूठ और कार्यशैली का सिलसिलेवार पर्दाफाश किया गया है:

 मंत्री के कार्यक्रम की जानकारी न होने का दावा झूठा

​डॉ० सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया था कि दिनांक 23.06.2026 को PMCH में स्वास्थ्य मंत्री के निर्धारित कार्यक्रम की उन्हें कोई पूर्व सूचना नहीं थी।

  • सच क्या है?: विभाग के अनुसार, PMCH के अधीक्षक ने एक दिन पहले यानी दिनांक 22.06.2026 को ही शाम लगभग 07:00 बजे डॉ० सिंह से मोबाइल पर बात कर कार्यक्रम की पूरी जानकारी दे दी थी।

 प्रोटोकॉल पर पहले ही बन चुकी थी सहमति

​प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रोटोकॉल को लेकर उठाए गए सवालों को खारिज करते हुए विभाग ने बताया कि मोबाइल पर बातचीत के दौरान ही तय हो गया था कि माननीय स्वास्थ्य मंत्री का स्वागत अधीक्षक करेंगे और धन्यवाद ज्ञापन स्वयं प्राचार्य (डॉ० सिंह) द्वारा किया जाएगा। इस पर डॉ० सिंह ने अपनी सहमति भी दी थी।

 ‘जलने’ और छुट्टी का बहाना: मीडिया में खबर आने के बाद जागा व्हाट्सएप

​डॉ० सिंह का दावा था कि उनके जल जाने के कारण उनके पुत्र ने विभागीय सचिव और अधीक्षक को व्हाट्सएप (Whatsapp) पर सूचना दी थी।

  • विभागीय जांच का खुलासा: डॉ० सिंह द्वारा जलने से संबंधित सूचना माननीय मंत्री के कार्यक्रम के समाप्त होने के घंटों बाद दी गई थी। इससे साफ है कि जब मीडिया में उनके अनुपस्थित रहने की खबर आ गई, तब उन्होंने अपने बचाव में व्हाट्सएप पर यह संदेश भेजा।

​ ‘छद्म मरीज’ (Dummy Patient) के जाल में फंसे डॉक्टर साहब, क्लिनिक के बाहर खड़ी मिली सरकारी गाड़ी

​डॉ० सिंह की अनुपस्थिति का सच जानने के लिए विभाग और जिला पदाधिकारी, पटना के स्तर से एक गोपनीय जांच कराई गई। इस जांच की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है:

    • निजी क्लिनिक में मौजूदगी की पुष्टि: विभाग ने सबसे पहले डॉ० सिंह के निजी क्लिनिक में एक ‘छद्म मरीज’ (Fake/Dummy Patient) भेजा। वहां डॉक्टर साहब बकायदा मरीजों का इलाज करते पाए गए।
    • सरकारी गाड़ी का निजी इस्तेमाल: जांच टीम जब मौके पर पहुंची, तो दंग रह गई। प्राचार्य, PMCH की सरकारी गाड़ी डॉ० सिंह के निजी क्लिनिक के बाहर खड़ी थी
    • मरीजों की गवाही: क्लिनिक से बाहर आ रहे मरीजों ने ऑन-कैमरा/ऑन-रिकॉर्ड बताया कि वे अभी-अभी डॉ० नरेन्द्र प्रताप सिंह से ही इलाज कराकर निकले हैं। यह उस समय की बात है जब डॉ० सिंह खुद को बातचीत करने में असमर्थ और बीमार बता रहे थे।
    • कंपाउंडर ने खोला टाइम-टेबल का राज: क्लिनिक के अंदर पूछताछ करने पर कंपाउंडर ने बताया कि डॉक्टर साहब हर दिन सुबह 09:00 से 10:00, दोपहर 02:00 से 03:00 और शाम 07:00 से 09:00 बजे तक मरीजों को देखते हैं। इससे यह पूरी तरह साबित हो गया कि डॉ० सिंह कार्यालय अवधि (Duty Hours) के दौरान भी अपने निजी क्लिनिक में प्रैक्टिस करते हैं

“बेतिया ट्रांसफर कोई दंड नहीं, प्रशासनिक फेरबदल है” — स्वास्थ्य विभाग

​विभाग ने साफ किया है कि प्रथम दृष्टया लापरवाही, कर्तव्यहीनता, सरकारी संसाधनों का दुरूपयोग और अनाधिकृत अनुपस्थिति को देखते हुए डॉ० सिंह को प्राचार्य के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त कर बेतिया मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। यह केवल एक प्रशासनिक स्थानांतरण है, इसे दंड की श्रेणी में नहीं रखा गया है।

 

​ सरकारी आचार नियमावली का उल्लंघन, अब बैठेगी उच्चस्तरीय जांच

​बजाय इसके कि डॉ० सिंह अपनी अनाधिकृत अनुपस्थिति पर विभाग को स्पष्टीकरण देते, उन्होंने सीधे मीडिया बुलाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दी। स्वास्थ्य विभाग ने इसे बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली के प्रावधानों का खुला उल्लंघन माना है।

आगे क्या होगी कार्रवाई?

​सक्षम प्राधिकार के अनुमोदन से अब डॉ० सिंह के खिलाफ एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी (High-Level Inquiry Committee) गठित की जा रही है। नियमानुसार डॉ० सिंह का पक्ष भी लिया जाएगा और विहित प्रक्रिया का पालन करते हुए आगे की कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

विभाग का कड़ा संदेश:

स्वास्थ्य विभाग ने अपने प्रतिवेदन के अंत में साफ तौर पर चेतावनी दी है कि चिकित्सा सेवाओं में कर्तव्यहीनता और अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। दोषियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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