विष्णुपद मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद देव घाट और टेंट सिटी का किया निरीक्षण; विष्णुपद कॉरिडोर पर 3,500 करोड़ रुपये खर्च करने की घोषणा, गयाजी की वैश्विक हवाई कनेक्टिविटी मजबूत करने पर जोर
Patna News: पितृपक्ष मेला के अवसर पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शुक्रवार को गयाजी पहुंचे। उन्होंने विष्णुपद मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। इसके बाद मुख्यमंत्री ने देव घाट का निरीक्षण कर देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पितृपक्ष मेला में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि बिहार की परंपरा ‘अतिथि देवो भव’ की रही है। गयाजी आने वाले श्रद्धालुओं और अतिथियों का पूरे आदर, सम्मान और आत्मीयता के साथ स्वागत किया जाना चाहिए।
घाट, आवासन, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को घाटों की व्यवस्था, श्रद्धालुओं के आवासन, पेयजल, स्वच्छता, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाओं को बेहतर बनाए रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु गयाजी पहुंचते हैं।
सरकार की प्राथमिकता है कि श्रद्धालु गयाजी में धार्मिक अनुष्ठान के साथ-साथ बेहतर व्यवस्था का अनुभव लेकर अपने घर लौटें। मुख्यमंत्री ने कहा कि गयाजी और पूरे बिहार के लोगों को मिलकर बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं का स्वागत करना चाहिए।
टेंट सिटी का किया उद्घाटन
मुख्यमंत्री ने पितृपक्ष मेला के अवसर पर टेंट सिटी का उद्घाटन भी किया। उन्होंने कहा कि पितृपक्ष सनातन संस्कृति में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता का अनूठा पर्व है। गयाजी की पावन धरती पर पिंडदान और तर्पण के लिए देश-दुनिया से श्रद्धालु आते हैं।
पुनपुन और गया दोनों स्थानों पर पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। पर्यटन विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों को श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूरी तत्परता से काम करने का निर्देश दिया गया है।
विष्णुपद कॉरिडोर पर 3,500 करोड़ रुपये होंगे खर्च
मुख्यमंत्री ने गयाजी में विकास योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि विष्णुपद कॉरिडोर के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर कुल 3,500 करोड़ रुपये खर्च करेंगी। इसमें करीब 2,500 करोड़ रुपये कॉरिडोर के विकास के लिए प्रस्तावित हैं।
उन्होंने कहा कि यह बिहार में किसी मंदिर के विकास के लिए अब तक की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए गयाजी में सुविधाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है।
देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए तकनीक का इस्तेमाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तकनीक और ऐप का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। श्रद्धालुओं को उनकी भाषाओं में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
इसका उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लोगों के लिए गयाजी में धार्मिक यात्रा को अधिक सुगम और सुविधाजनक बनाना है।
गयाजी को गल्फ देशों और दुनिया के प्रमुख शहरों से जोड़ने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि गया एयरपोर्ट बिहार के प्रमुख हवाई अड्डों में शामिल है। पटना, गया, दरभंगा और पूर्णिया एयरपोर्ट के माध्यम से राज्य की हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि गयाजी को इंडोनेशिया, बैंकॉक और गल्फ देशों सहित दुनिया के अन्य प्रमुख स्थानों से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिलने के साथ-साथ पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
अक्टूबर से 20 हजार करोड़ के औद्योगिक निवेश के जमीन पर उतरने का दावा
मुख्यमंत्री ने बिहार में औद्योगिक विकास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बोधगया में उद्योगों के विकास के लिए इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC) की शुरुआत की जा रही है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, इसी वर्ष अक्टूबर से करीब 20 हजार करोड़ रुपये के औद्योगिक निवेश का जमीन पर उतरना शुरू हो जाएगा। इससे राज्य में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसर सृजित होने की बात कही गई।
सोन का पानी फल्गु नदी तक लाने की योजना
गया और आसपास के क्षेत्रों में जल उपलब्धता और सिंचाई को बेहतर बनाने के लिए करीब 1,000 करोड़ रुपये की लागत से सोन नदी का पानी फल्गु नदी में लाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सोन नदी के पानी के बंटवारे और जल संसाधन से जुड़े समझौतों के माध्यम से गया और आसपास के क्षेत्रों में सिंचाई तथा जल उपलब्धता को बेहतर करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
शिक्षा और महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए भी कई कदम उठाए जा रहे हैं। स्कूलों की व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ मॉडल स्कूल, ऑनलाइन कक्षाएं और ‘विद्यार्थी साथी ऐप’ जैसी पहलों के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए जीविका के माध्यम से व्यापक स्तर पर कार्य किए जाने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही। उन्होंने बताया कि राज्य में 1 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अब तक 43 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
डाक लिफाफा, पुस्तक और गयाजी धाम अंगवस्त्र का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पितृपक्ष के अवसर पर डाक विभाग द्वारा जारी विशेष डाक लिफाफे का विमोचन किया। इसके अलावा पंडा समाज द्वारा लिखित ‘पाचन तीर्थ गयाजी’ पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
मुख्यमंत्री ने मानपुर पटवा टोली के बुनकरों द्वारा निर्मित ‘गयाजी धाम अंगवस्त्र’ का लोकार्पण भी किया।
बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम को केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री सह गया सांसद जीतन राम मांझी एवं स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उप मुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, कृषि मंत्री सह गया जिला प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल, पर्यटन मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता, विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
कार्यक्रम में मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पुलिस महानिदेशक प्रीता वर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, मगध प्रमंडल की आयुक्त डॉ. सफीना ए. एन., पुलिस महानिरीक्षक विकास वैभव, जिलाधिकारी शशांक शुभंकर, वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सहित बड़ी संख्या में अधिकारी, श्रद्धालु और आम लोग उपस्थित रहे। बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।
मुख्यमंत्री ने अंत में राज्यवासियों से अपील की कि पितृपक्ष मेला के दौरान गयाजी आने वाले सभी श्रद्धालुओं और अतिथियों का मिल-जुलकर सम्मान एवं आत्मीयता के साथ स्वागत करें, ताकि देश-विदेश से आने वाले लोगों को बिहार की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और आतिथ्य का सुखद अनुभव मिल सके।


