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एक्स्ट्रा-सी ने लॉन्च किया इंडियन क्रॉसबर्ड लीग 2025, ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुक्रवार से शुरू

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नई दिल्ली: क्रॉसबर्ड (Crossword) प्रेमियों के लिए बड़ी खुशखबरी है। गैर लाभकारी संस्था एक्स्ट्रा-सी ने देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगिता इंडियन क्रॉसबर्ड लीग (IXL) के 13वें संस्करण की आधिकारिक घोषणा कर दी है। प्रतियोगिता का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन इस शुक्रवार से वेबसाइट www.crypticsingh.com पर शुरू होगा।

प्रतियोगिता का ढांचा

यह प्रतियोगिता दो चरणों में आयोजित होगी।
पहला चरण (ऑनलाइन राउंड्स):
शुरुआत 7 सितम्बर 2025 से प्रैक्टिस राउंड के साथ होगी। इसके बाद 10 ऑनलाइन राउंड्स हर रविवार आयोजित होंगे। प्रत्येक राउंड रविवार सुबह 11 बजे से बुधवार रात 11:59 बजे तक खुला रहेगा, ताकि प्रतिभागी अपनी सुविधा अनुसार हल कर सकें।
निर्धारित तिथियाँ:

  • 7, 14, 21, 28 सितम्बर 2025
  • 5, 12, 19, 26 अक्टूबर 2025
  • 2, 9, 16 नवम्बर 2025

दूसरा चरण (ग्रैंड फिनाले):
ऑनलाइन राउंड्स के बाद शीर्ष 30 प्रतिभागियों को बेंगलुरु में 21 दिसम्बर 2025 को प्रस्तावित ग्रैंड फिनाले में आमंत्रित किया जाएगा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय दिमागों की चमक

इंडियन क्रॉसबर्ड लीग ने अब तक कई अंतरराष्ट्रीय और भारतीय प्रतिभागियों को अपनी ओर आकर्षित किया है। अमेरिका के एरिक मुइस, ऑस्ट्रेलिया के फिलिप क्रूट, सिंगापुर के कोह तिय स्वीन कैनी जैसे दिग्गज इसमें हिस्सा ले चुके हैं। भारत की ओर से नीवल फोगार्टे, रामकी कृष्णन, और शरत सलामांकर जैसे नामचीन प्रतिभागियों ने प्रतियोगिता में अपनी विशेष पहचान बनाई है।

2013 से लगातार लोकप्रिय

2013 में एक्स्ट्रा-सी द्वारा क्रॉसबर्ड के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर शुरू की गई यह लीग आज भारत की सबसे प्रतिष्ठित और चर्चित क्रॉसबर्ड प्रतियोगिताओं में गिनी जाती है। हर आयु वर्ग के लिए खुली इस प्रतियोगिता में भाग लेना न केवल एक बौद्धिक चुनौती है बल्कि यह भारत को वैश्विक मंच पर भी गौरवान्वित करता है।

क्रॉसबर्ड प्रेमियों के लिए यह मौका अपनी प्रतिभा दिखाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम कमाने का सुनहरा अवसर साबित होगा।

डीएम ने सदर एसडीओ कार्यालय में SIR कार्यों का किया निरीक्षण

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भागलपुर: जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने भागलपुर सदर अनुमंडल कार्यालय का दौरा किया और वहां चल रहे SIR (Systematic Inspection & Registration) कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कार्यालय में चल रहे इलेक्ट्रॉनिक डेटा प्रविष्टि और निर्वाचन संबंधी अन्य प्रक्रियाओं का विस्तृत अवलोकन किया।

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने विशेष ध्यान दिया कि लैपटॉप और मोबाइल पर सभी प्रविष्टियां सही ढंग से अंकित की जा रही हैं या नहीं। उन्होंने उपस्थित सभी निर्वाचक निबंधन अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए ताकि डेटा प्रविष्टि में कोई गलती न हो और SIR कार्य पूर्ण पारदर्शिता और सटीकता के साथ संपन्न हों।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सलाह दी कि प्रत्येक प्रविष्टि की क्रॉस-चेकिंग नियमित रूप से की जाए और सभी रिकॉर्ड सही तरीके से अपडेट रहें। उन्होंने इस अवसर पर अधिकारियों को नियमित रिपोर्टिंग और त्रुटि निवारण पर विशेष जोर देने का निर्देश भी दिया।

इस निरीक्षण का उद्देश्य न केवल SIR कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना था, बल्कि निर्वाचन प्रक्रिया में जनता की भागीदारी और भरोसे को भी मजबूत करना था। डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि आधुनिक तकनीक का सही उपयोग और सही प्रविष्टियां सुनिश्चित करने से निर्वाचन कार्य और अधिक प्रभावी बनते हैं।

जिलाधिकारी के इस दौरे से कार्यालय के कर्मचारियों में उत्साह और जिम्मेदारी की भावना बढ़ी। उन्होंने कहा कि भागलपुर सदर अनुमंडल में निर्वाचन संबंधी कार्यों की उच्च गुणवत्ता और पारदर्शिता बनाए रखना आवश्यक है, ताकि सभी नागरिकों को भरोसा और सुविधा दोनों मिल सके।

कुमैठा पंचायत को मिला ‘टीबी मुक्त पंचायत’ का गौरव, भागलपुर में हुआ सम्मान समारोह

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भागलपुर: जिला प्रशासन भागलपुर ने टीबी मुक्त पंचायत पहल के तहत कुमैठा पंचायत को विशेष सम्मान से सम्मानित किया। यह सम्मान समारोह जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में उनके कार्यालय कक्ष में आयोजित किया गया। समारोह में भागलपुर सिविल सर्जन डॉ. अशोक प्रसाद, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष, ए-एसीएमओ (टीबी), एसीएमओ, और डब्ल्यूएचओ (एनटीईपी) के डॉ. मेजर अवकाश सिन्हा सहित चांदपुर और जगदीशपुर के मुखिया भी उपस्थित थे।

इस पहल का उद्देश्य टीबी (तपेदिक) जैसी जानलेवा बीमारी को ग्रामीण स्तर पर पूरी तरह समाप्त करना और पंचायतों में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना है। कार्यक्रम में जिलाधिकारी ने टीबी मुक्त पंचायतों की उपलब्धियों और स्थानीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक समाज ही मजबूत और विकासशील समाज की नींव रख सकता है।

इस अवसर पर सुल्तानगंज प्रखंड की कुमैठा पंचायत को “टीबी मुक्त पंचायत” का पुरस्कार प्रदान किया गया। चूंकि कुमैठा के मुखिया समारोह में उपस्थित नहीं थे, इसलिए यह सम्मान प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने जिलाधिकारी के कर कमलों से ग्रहण किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान पंचायतवासियों की सक्रिय भागीदारी और स्वास्थ्य पहल में उनकी निरंतर मेहनत का परिणाम है।

टीबी मुक्त पंचायत पहल के अंतर्गत पंचायत स्तर पर व्यापक जांच, टीबी जागरूकता अभियान और उपचार की समयबद्ध उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है। कुमैठा पंचायत ने इन सभी मानकों को पूरा करते हुए यह प्रतिष्ठित सम्मान हासिल किया।

जिला प्रशासन ने इस अवसर पर स्थानीय समुदाय को टीबी जैसी गंभीर बीमारी के प्रति सतर्क रहने और नियमित स्वास्थ्य जांच कराने का संदेश भी दिया। अधिकारियों ने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में इस पहल को और व्यापक रूप से लागू किया जाएगा, ताकि भागलपुर जिले की सभी पंचायतें टीबी मुक्त बन सकें।

इस कार्यक्रम के माध्यम से न केवल कुमैठा पंचायत की स्वास्थ्य उपलब्धियों को मान्यता मिली, बल्कि यह पूरे जिले में टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हुआ।

महिला सशक्तिकरण से गरीबी उन्मूलन तक: बिहार मॉडल की विश्व में गूँज

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पटना: बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी सतत जीविकोपार्जन योजना (SJY) ने न केवल राज्य के लाखों गरीब परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है, बल्कि यह अब अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सराही जा रही है। इसी क्रम में केन्या सरकार का 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बिहार आया और नालंदा जिले का दौरा किया। यह दौरा इमर्शन एंड लर्निंग एक्सचेंज (ILE) कार्यक्रम के तहत हुआ, जिसका उद्देश्य गरीबी उन्मूलन में बिहार के नवाचारों को समझना और अनुभव साझा करना था।

सचिवालय में डिब्रीफिंग सत्र

प्रतिनिधिमंडल के भ्रमण के बाद पटना स्थित सचिवालय भवन में डिब्रीफिंग सत्र आयोजित हुआ।
सत्र की शुरुआत जीविका की अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्रीमती अभिलाषा कुमारी शर्मा के स्वागत संबोधन से हुई।
इसके बाद जीविका के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी श्री हिमांशु शर्मा ने सतत जीविकोपार्जन योजना की रूपरेखा प्रस्तुत की और गरीबी उन्मूलन की दिशा में हो रहे महत्वपूर्ण कार्यों की जानकारी दी।

केन्या प्रतिनिधियों की सराहना

इस अवसर पर केन्या के तवेता काउंटी के गवर्नर, श्री एंड्रयू मवादिमे ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बिहार में इस योजना का प्रभाव गहरा और प्रेरणादायक है। उन्होंने बिहार सरकार द्वारा गरीबों के लिए एकजुट होकर किए गए प्रयासों की प्रशंसा की और कहा – “हम इस मॉडल को अपने देश में भी लागू करेंगे।”

बिहार का गौरव

ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री लोकेश कुमार सिंह ने कहा कि बिहार में इस योजना से लाखों गरीब परिवारों का जीवन बदल रहा है। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि केन्या जैसे मित्र राष्ट्र इस मॉडल को सीखने की इच्छा रखते हैं।

वहीं, बिहार सरकार के मुख्य सचिव श्री अमृत लाल मीणा ने बताया कि 2018 से शुरू हुई इस योजना से अबतक 2.1 लाख परिवार लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने कहा – “जीविका के माध्यम से महिलाएं आज सशक्त समाज का निर्माण कर रही हैं। हाल ही में ‘जीविका निधि’ नामक सहकारी संघ का गठन भी किया गया है, जिससे महिलाओं को आर्थिक मजबूती मिली है।”

वैश्विक सहयोग की ओर कदम

इस सत्र के अंत में जीविका के विशेष कार्य पदाधिकारी श्री राजेश कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि भारत और केन्या मिलकर गरीबी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में साझेदारी कर सकते हैं।

कार्यक्रम की पृष्ठभूमि

इमर्शन एंड लर्निंग एक्सचेंज (ILE) कार्यक्रम जीविका, BRAC इंटरनेशनल और बंधन कोन नगर के सहयोग से संचालित होता है। इसके माध्यम से अलग-अलग देशों और भारत के अन्य राज्यों के प्रतिनिधि बिहार में चल रही सतत जीविकोपार्जन योजना को नजदीक से देखते और सीखते हैं।
अब तक इंडोनेशिया, फिलीपींस, दक्षिण अफ्रीका, इथियोपिया और श्रीलंका जैसे देशों के प्रतिनिधि भी इस कार्यक्रम के तहत बिहार आ चुके हैं।

निष्कर्ष

बिहार का यह मॉडल साबित कर रहा है कि गरीबी उन्मूलन केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि सामुदायिक भागीदारी और महिला सशक्तिकरण से संभव है।
केन्या प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा न सिर्फ बिहार के लिए सम्मान की बात है बल्कि यह इस तथ्य को भी मजबूत करता है कि बिहार अब वैश्विक स्तर पर गरीबी उन्मूलन का रोल मॉडल बन चुका है।

गानों में अश्लीलता रोकने पर ‘सिने संवाद’ का आयोजन, भोजपुरी संगीत की अस्मिता बचाने का संकल्प

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पटना: कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम (फिल्म निगम) द्वारा राजधानी पटना के फ्रेजर रोड स्थित बिहार ललित कला अकादमी में ‘गानों में अश्लीलता: समाधान’ विषय पर विशेष सिने संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

इस संवाद में कला एवं संगीत जगत की कई हस्तियों ने भाग लिया और भोजपुरी गीत-संगीत को अश्लीलता से मुक्त करने तथा स्वच्छ और समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

भरत शर्मा व्यास ने कही कड़ी बातें

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त लोकगायक भरत शर्मा व्यास ने स्पष्ट शब्दों में कहा –
“आज भोजपुरी को लोग नीची दृष्टि से देखते हैं और इसकी सबसे बड़ी वजह अश्लीलता है। 30 साल पहले भोजपुरी गीतों में अश्लीलता नहीं थी, लेकिन आज मिलियन व्यूज के लालच में गायक शब्दों को गिरा रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि इस स्थिति के लिए सिर्फ गायक ही नहीं बल्कि मंच देने वाले और सुनने वाले भी जिम्मेदार हैं। उन्होंने आह्वान किया कि अश्लील गीत गाने वालों पर कार्रवाई होनी चाहिए और दर्शकों को भी ऐसे गीतों को नकारना होगा।

संकल्प और समाधान पर जोर

लोकगीतों की शुद्ध परंपरा के हिमायती नंद कुमार तिवारी ने कहा कि कलाकार और लेखक दोनों को शपथ लेनी चाहिए कि वे अश्लील गीत न लिखेंगे और न गाएंगे।
फिल्म निगम की महाप्रबंधक रूबी (IAS) ने कहा कि बिहार के पास शास्त्रीय संगीत, लोकगीत और धुनों की समृद्ध परंपरा है, जिन्हें आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

जिला जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. अजय ने कहा – “अगर आप अच्छा गायेंगे तो आपको श्रोता, मंच और पैसा—सब मिलेगा।”
वहीं, फिल्म निगम के परामर्शी (फिल्म) अरविंद रंजन दास ने इसे बिहार के मनोरंजन जगत के माथे पर लगा “अश्लील गीतों का बदनुमा दाग” बताते हुए कहा कि इस कलंक को मिटाने के लिए मजबूत कदम उठाने होंगे।

भरत शर्मा व्यास: भोजपुरी के सम्राट

कार्यक्रम में भरत शर्मा व्यास के जीवन और योगदान पर भी प्रकाश डाला गया।
बक्सर जिले के नगपुरा गांव में 1957 में जन्मे व्यास ने 14 वर्ष की उम्र से गायन की शुरुआत की। पांच दशकों से अधिक लंबे संगीत सफर में उन्होंने हजारों गीतों को स्वर दिए। ‘गोरिया चांद के ईजोरिया’ जैसे कालजयी गीतों ने उन्हें लोकप्रियता के शिखर पर पहुँचाया।

लोकप्रियता का आलम यह है कि ओमान, मॉरीशस, नेपाल और थाईलैंड तक उनकी गायकी के प्रशंसक मौजूद हैं। उन्हें भिखारी ठाकुर सम्मान, भोजपुरी सम्राट सम्मान, भोजपुरी रतन सम्मान समेत दर्जनों राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किया।

फिल्म निगम की पहल

फिल्म निगम बिहार में फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने और स्वच्छ मनोरंजन को बढ़ावा देने के लिए लगातार पहल कर रहा है। शूटिंग की अनुमति को सरल बनाने से लेकर फिल्म निर्माण पर अनुदान, छात्रवृत्ति, कार्यशालाएं, सिने संवाद, कॉफी विद फिल्म और फिल्म महोत्सव जैसी गतिविधियां इसी दिशा में प्रयास हैं।

नतीजा

यह सिने संवाद अश्लीलता के खिलाफ एक सशक्त सामाजिक अभियान की तरह रहा। सभी वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि अगर गायक और दर्शक मिलकर ठान लें तो भोजपुरी गीत-संगीत अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा वापस पा सकता है।

पीरपैंती में 100 परिवारों को मिले 2475 चूज़े, समेकित मुर्गी विकास योजना से आजीविका को नई उड़ान

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भागलपुर: ग्रामीण गरीब परिवारों की आजीविका को मजबूत बनाने और पोषण स्तर को सुधारने के लिए जीविका द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में समेकित मुर्गी विकास योजना-IV के तहत गुरुवार को पीरपैंती प्रखंड के बंदूजयराम पंचायत में विशेष पहल की गई। इस अवसर पर अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय से जुड़े 100 परिवारों के बीच कुल 2475 चूज़ों का वितरण किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य छोटे स्तर पर आजीविका का साधन उपलब्ध कराना है ताकि ग्रामीण परिवार आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। मुर्गी पालन के जरिए परिवारों को अंडा और मांस जैसे पौष्टिक आहार सहज उपलब्ध होंगे, साथ ही अतिरिक्त आय का स्रोत भी तैयार होगा। यह पहल विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

मुर्गी पालन से न केवल परिवारों की आय में वृद्धि होगी बल्कि बच्चों और महिलाओं के पोषण स्तर में भी सुधार आएगा। जीविका समूह से जुड़ी महिलाएं इस पहल को लेकर काफी उत्साहित नजर आईं। उनका कहना है कि मुर्गी पालन के जरिए वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार ला पाएंगी और बच्चों को पौष्टिक आहार भी उपलब्ध करा सकेंगी।

अधिकारियों ने बताया कि इस तरह की योजनाओं का मुख्य मकसद ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर पैदा करना और समुदाय को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इस योजना का विस्तार किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक परिवार इससे लाभान्वित हो सकें।

स्थानीय लोगों ने इस पहल का स्वागत किया और कहा कि छोटे स्तर पर शुरू की गई यह योजना भविष्य में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगी। खासकर महिलाओं की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण होगी क्योंकि मुर्गी पालन प्रायः घरेलू स्तर पर आसानी से किया जा सकता है।

इस अवसर पर जीविका से जुड़े पदाधिकारियों ने बताया कि चूज़ों के वितरण के साथ ही लाभार्थियों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि वे आधुनिक तकनीक और बेहतर देखभाल के तरीकों को अपनाकर अधिक उत्पादन कर सकें।

समेकित मुर्गी विकास योजना-IV के इस चरण से न केवल 100 परिवारों की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आएगा बल्कि यह पहल पूरे क्षेत्र में अन्य परिवारों को भी प्रेरित करेगी। ग्रामीण आजीविका को स्थायी और सशक्त बनाने की दिशा में यह कदम मील का पत्थर साबित हो सकता है।

जन्मदिन की खुशियां मातम में बदलीं, नदी में डूबकर किशोर की दर्दनाक मौत

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भागलपुर जिले के पीरपैंती थाना क्षेत्र के बाबूपुर गांव में उस समय खुशियों का माहौल मातम में बदल गया जब 14 वर्षीय सचिन कुमार साह की नदी में डूबकर मौत हो गई। सचिन, सरकारी शिक्षक अजय कुमार साह का इकलौता पुत्र था और परिवार के साथ अपने जन्मदिन का जश्न मनाने बाबूपुर पैतृक गांव आया हुआ था।

मिली जानकारी के अनुसार, सचिन अपने दोस्तों के साथ बाखरपुर–मिर्जाचौकी मुख्य मार्ग के पास बहने वाली नदी में नहाने गया था। नहाने के दौरान तीन बच्चों में से दो सुरक्षित बाहर निकल आए, लेकिन सचिन गहरे पानी में फंस गया और बाहर नहीं निकल सका। ग्रामीणों और स्थानीय गोताखोरों ने करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उसका शव नदी से बाहर निकाला।

जैसे ही यह खबर गांव में फैली, मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों के मुताबिक सचिन पढ़ाई और खेल दोनों में ही काफी होनहार था। उसका असमय इस तरह से जाना न केवल परिवार बल्कि पूरे गांव के लिए गहरा आघात है।

परिजनों के अनुसार, सचिन का जन्मदिन मनाने के लिए ही पूरा परिवार बाबूपुर आया था। लेकिन अचानक हुए इस हादसे ने सारी खुशियां मातम में बदल दीं। मां राखी देवी गम में बदहवास हैं और पिता अजय कुमार साह गहरे सदमे में हैं। उनकी चुप्पी उनके दर्द को बयां कर रही है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कार्रवाई की। हालांकि, शोकाकुल परिजनों ने पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने परिवार को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया है।

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि नदी में गहराई अधिक है और बरसात के मौसम में जलस्तर और भी खतरनाक हो जाता है। अक्सर लोग बिना एहतियात नहाने चले जाते हैं जिससे इस तरह की घटनाएं घटित होती हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी किनारे चेतावनी बोर्ड लगाने और सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग की है।

सचिन की असमय मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। जन्मदिन की खुशियों के बीच अचानक घटी इस दर्दनाक घटना से बाबूपुर गांव गमगीन हो गया है और हर कोई परिवार के दुख में सहभागी बना हुआ है।

भागलपुर में जूनियर डॉक्टरों का ब्लैक रिबन डे प्रदर्शन, स्टाइपेंड बढ़ाने की उठी मांग

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Bhagalpur News: भागलपुर के मायागंज अस्पताल समेत राज्य के कई मेडिकल कॉलेजों में आज इंटर्न डॉक्टरों ने ब्लैक रिबन डे मनाकर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। डॉक्टरों की मुख्य मांग है कि उनका स्टाइपेंड, जो फिलहाल 20 हजार रुपये प्रति माह है, उसे बढ़ाकर 40 हजार रुपये किया जाए।

इंटर्न डॉक्टरों ने कहा कि वे रोजाना 15 से 16 घंटे तक काम करते हैं। नाइट ड्यूटी करने के बाद भी उन्हें ओपीडी और इमरजेंसी विभाग में अपनी सेवाएं देनी पड़ती हैं। इसके बावजूद उन्हें बहुत कम मानदेय मिलता है। अगर हिसाब लगाया जाए तो उन्हें प्रतिदिन महज 666 रुपये ही मिलते हैं, जो उनकी मेहनत और जिम्मेदारी के हिसाब से बेहद कम है।

डॉक्टरों ने याद दिलाया कि वर्ष 2021 में बिहार सरकार की ओर से एक अधिसूचना जारी की गई थी, जिसमें कहा गया था कि हर तीन साल पर स्टाइपेंड का पुनरीक्षण किया जाएगा। उसी दौरान स्टाइपेंड 15 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपये किया गया था। लेकिन अब चार साल गुजर जाने के बाद भी इसमें कोई संशोधन नहीं हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि सरकार ने खुद अपने फैसले का पालन नहीं किया।

प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई और लंबे कामकाजी घंटे को देखते हुए मौजूदा स्टाइपेंड बिल्कुल अपर्याप्त है। उनका कहना है कि कई बार इस विषय पर आवाज उठाई गई, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

डॉक्टरों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्टाइपेंड बढ़ाना न सिर्फ डॉक्टरों के अधिकार का सवाल है बल्कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी आवश्यक है। इंटर्न डॉक्टरों का तर्क है कि जब तक उन्हें न्यायोचित मानदेय नहीं मिलेगा, तब तक वे पूरी ऊर्जा और समर्पण के साथ काम नहीं कर पाएंगे।

ब्लैक रिबन डे के तहत डॉक्टरों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया और अस्पताल परिसर में अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। मरीजों की सेवा बाधित न हो, इसलिए डॉक्टरों ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन किया।

भागलपुर समेत पूरे बिहार में जूनियर डॉक्टरों का यह आंदोलन सरकार के लिए नई चुनौती साबित हो सकता है। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार उनकी मांगों पर कब तक और कितना गंभीर कदम उठाती है।

वोटर अधिकार यात्रा को लेकर भागलपुर एसएसपी हृदयकांत ने किया स्थल निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

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भागलपुर: बिहार में चल रही वोटर अधिकार यात्रा के तहत विपक्ष के नेता राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और मुकेश सहनी 22 अगस्त को भागलपुर पहुंचने वाले हैं। इसको लेकर जिले में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। यात्रा का अगला पड़ाव भागलपुर होने के कारण जिला प्रशासन और पुलिस महकमा पूरी तरह सतर्क है।

मिली जानकारी के अनुसार, राहुल गांधी मुंगेर के बाद सुल्तानगंज पहुंचेंगे। वहां से अकबरनगर के लिए रवाना होंगे, जहां वे करीब दो घंटे का विश्राम करेंगे। इसके बाद वे भागलपुर की ओर कूच करेंगे। इस दौरान भारी भीड़ जुटने की संभावना है। इसे देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की कमान खुद भागलपुर के एसएसपी हृदयकांत ने संभाली है।र को एसएसपी हृदयकांत ने अकबरनगर में स्थल निरीक्षण किया और पुलिस अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने पूरे मार्ग और सभा स्थल का जायजा लिया। एसएसपी ने कहा कि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के सभी इंतज़ाम किए जा रहे हैं ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

गुरुवार को एसएसपी हृदयकांत ने अकबरनगर में स्थल निरीक्षण किया और पुलिस अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने पूरे मार्ग और सभा स्थल का जायजा लिया। एसएसपी ने कहा कि भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के सभी इंतज़ाम किए जा रहे हैं ताकि यात्रा के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त बल की तैनाती की जाए। ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए विशेष टीम गठित की गई है। साथ ही, सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन की मदद से इलाके की निगरानी की जाएगी।

एसएसपी ने बताया कि यात्रा में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना है, इसलिए सभी अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को अलर्ट पर रखा गया है। हर चौक-चौराहे और मुख्य मार्गों पर सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सुरक्षा की दृष्टि से कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर सुरक्षा और व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वहीं, स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भी उत्साह देखा जा रहा है। लोग यात्रा में शामिल होने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

गौरतलब है कि वोटर अधिकार यात्रा को लेकर पूरे बिहार में राजनीतिक माहौल गर्म है। विपक्ष इस यात्रा के जरिए जनता से सीधे संवाद स्थापित करने और आगामी चुनावों के लिए माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। भागलपुर में यात्रा का पड़ाव राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।

बाइट: हृदयकांत, एसएसपी भागलपुर
“भागलपुर पुलिस पूरी तरह अलर्ट है। सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा के इंतज़ाम पुख्ता होंगे और यात्रा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई जाएगी।”

बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड का शताब्दी समारोह, मुख्यमंत्री ने बापू सभागार में किया उद्घाटन

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Bihar News: पटना के सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र स्थित बापू सभागार में आज बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड, पटना का शताब्दी समारोह भव्य रूप से आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर इस ऐतिहासिक आयोजन का उद्घाटन किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अत्यंत खुशी की बात है कि बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड अपनी सौ वर्षों की यात्रा पूरी कर चुका है। इस अवसर पर मदरसा से जुड़े 15 हजार से अधिक लोग समारोह में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि पूर्व की सरकारों ने शिक्षा और अल्पसंख्यक समुदाय के विकास के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया था, लेकिन 2005 में एनडीए सरकार बनने के बाद से राज्य में विकास की नई इबारत लिखी जा रही है और कानून का राज कायम हुआ है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के लिए सरकार द्वारा किए गए कार्यों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2006 से कब्रिस्तान की घेराबंदी बड़े पैमाने पर कराई गई, जिससे आपसी विवाद और झगड़े की स्थिति समाप्त हुई। मदरसों का निबंधन कर उन्हें सरकारी मान्यता प्रदान की गई और शिक्षकों को सरकारी शिक्षकों के बराबर वेतन दिया जाने लगा।

उन्होंने कहा कि भागलपुर दंगे (1989) की सही जांच पूर्व की सरकारों ने नहीं कराई थी। 2005 में सत्ता में आने के बाद उनकी सरकार ने इसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की और पीड़ितों को मुआवजा दिया। दंगा प्रभावित परिवारों को पेंशन दी जा रही है। मुस्लिम परित्यक्ता और तलाकशुदा महिलाओं को 2007 से 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही थी, जिसे अब बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का बजट वर्ष 2004-05 में मात्र 3.54 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 1080 करोड़ रुपये हो गया है। मुस्लिम युवाओं की शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार के लिए लगातार योजनाएँ चलाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने हमेशा सभी वर्गों—हिन्दू, मुस्लिम, पिछड़ा, अति पिछड़ा, दलित और महादलित—के सर्वांगीण विकास के लिए काम किया है।

उन्होंने हाल के वर्षों में लागू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं का भी उल्लेख किया। वृद्धजनों, विधवाओं और दिव्यांगजनों की पेंशन राशि 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये की गई है। 2018 तक सभी घरों में बिजली पहुंचाई गई और अब अधिकांश घरेलू उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2024-25 में प्रगति यात्रा के दौरान जिलों का दौरा कर विकास कार्यों की समीक्षा की गई और कमियों को दूर करने के लिए 50 हजार करोड़ रुपये की लागत से 430 नई योजनाओं को स्वीकृति दी गई है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र, टोपी और मखाने की माला पहनाकर सम्मानित किया गया। शताब्दी समारोह के अवसर पर प्रकाशित स्मारिका का विमोचन भी किया गया।

इस अवसर पर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान और बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष सलीम परवेज ने भी सभा को संबोधित किया। कार्यक्रम में जल संसाधन सह संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी, शिक्षा मंत्री सुनील कुमार, ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी, पूर्व मंत्री नौशाद आलम, अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष गुलाम रसूल बलियावी, जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा, बिहार राज्य सुन्नी व शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष, विधान पार्षदगण, पूर्व सांसदगण, मदरसा कमिटियों के सदस्य, शिक्षक और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

यह शताब्दी समारोह न केवल बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड की गौरवशाली यात्रा का उत्सव था, बल्कि सरकार द्वारा शिक्षा, सामाजिक सौहार्द और विकास की दिशा में उठाए गए ठोस कदमों का भी प्रतीक बना।