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जगदीशपुर-सनहौला पथ की बदलेगी सूरत: सिंगल लेन की जर्जर सड़क अब बनेगी फोरलेन, जाम और हादसों से मिलेगी मुक्ति!

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पटना/बाँका: धौरैया (बाँका) के विधायक मनीष कुमार ने क्षेत्र की जनता को बड़ी सौगात देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री को पत्र लिखकर MDR जगदीशपुर-सनहौला पथ को फोरलेन (Four Lane) में तब्दील करने और इस पर ROB (रेलवे ओवर ब्रिज) बनाने की पुरजोर मांग की है।

​इस पत्र पर विभाग द्वारा त्वरित संज्ञान लेते हुए सचिव को DPR (Detailed Project Report) और एस्टीमेट मंगवाने का निर्देश भी दे दिया गया है, जिससे क्षेत्र में विकास की नई उम्मीद जगी है।

​क्यों जरूरी है इस सड़क का कायाकल्प?

​विधायक मनीष कुमार ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि भागलपुर-हंसडीहा पथ (NH-133E) के जगदीशपुर मोड़ से शुरू होकर SH-84 सनहौला मोड़ तक जाने वाला यह मार्ग सामरिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • ​अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी: यह सड़क बिहार और झारखंड राज्य को जोड़ने वाली एक मुख्य कड़ी है।
  • ​जर्जर हालत: वर्तमान में यह सड़क ‘सिंगल लेन’ है और इसकी स्थिति काफी जर्जर हो चुकी है।
  • ​दुर्घटनाओं का केंद्र: खराब सड़क के कारण यहाँ आए दिन भीषण सड़क दुर्घटनाएं होती रहती हैं, जिसमें कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
  • ​जाम की समस्या: ट्रैफिक का दबाव अधिक होने और सड़क संकरी होने के कारण यहाँ घंटों जाम लगा रहता है, जिससे राहगीरों और व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

​फोरलेन और ROB से बदलेगी तस्वीर

​विधायक ने जन सुरक्षा और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए मांग की है कि इस पूरे मार्ग को फोरलेन में परिवर्तित किया जाए। साथ ही, मार्ग में पड़ने वाले रेलवे क्रॉसिंग पर ROB (रेलवे ओवर ब्रिज) का निर्माण कराया जाए ताकि बिना किसी बाधा के वाहनों का आवागमन सुनिश्चित हो सके।

​विकसित भारत-2047 के संकल्प को दोहराते हुए विधायक ने कहा कि बेहतर आधारभूत संरचना ही बिहार की प्रगति का आधार है। पत्र मिलने के बाद माननीय मंत्री जी ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए विभाग को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।

​क्षेत्र की जनता में खुशी की लहर

​जगदीशपुर और सनहौला क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अगर यह सड़क फोरलेन बन जाती है, तो न केवल सफर आसान होगा बल्कि व्यापारिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी। भागलपुर और बाँका के बीच की दूरी तय करने में समय की भारी बचत होगी।

LPG रिफिल बुकिंग के नियमों में बदलाव की खबरों का सच: सरकार ने जारी किया स्पष्टीकरण, जानें क्या हैं मौजूदा नियम

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New Delhi: पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और विभिन्न समाचार पोर्टलों पर एलपीजी (LPG) गैस सिलेंडर की रिफिल बुकिंग की समय-सीमा को लेकर कई तरह की भ्रामक खबरें वायरल हो रही हैं। इन खबरों में दावा किया जा रहा था कि सरकार ने उज्ज्वला योजना और सामान्य कनेक्शनों के लिए रिफिल बुकिंग के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। अब भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) ने इन खबरों का खंडन करते हुए स्थिति स्पष्ट कर दी है।

​सोशल मीडिया पर क्या हो रहा था दावा?

​इंटरनेट पर प्रसारित हो रही रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि:

  • ​PMUY (उज्ज्वला) कनेक्शन के लिए बुकिंग की समय-सीमा 45 दिन कर दी गई है।
  • ​गैर-PMUY सिंगल बॉटल कनेक्शन के लिए यह सीमा 25 दिन है।
  • ​गैर-PMUY डबल बॉटल कनेक्शन के लिए 35 दिन का नियम लागू किया गया है।

​इन खबरों के कारण उपभोक्ताओं के बीच भ्रम और घबराहट (Panic Booking) की स्थिति पैदा हो गई थी।

​सरकार का आधिकारिक स्पष्टीकरण: कोई बदलाव नहीं

​PIB दिल्ली द्वारा 25 मार्च 2026 को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, सरकार ने स्पष्ट किया है कि एलपीजी रिफिल बुकिंग की समय-सीमा में कोई भी संशोधन नहीं किया गया है। जो नियम पहले से लागू थे, वे ही प्रभावी बने रहेंगे। सरकार ने साफ कहा कि कनेक्शन की श्रेणी (चाहे वह उज्ज्वला हो या सामान्य) से बुकिंग के समय का कोई लेना-देना नहीं है।

​ये हैं वर्तमान में प्रभावी नियम (Status Quo)

​सरकार के अनुसार, रिफिल बुकिंग के लिए मौजूदा समय-सीमा इस प्रकार है:

    1. ​शहरी क्षेत्र (Urban Areas): उपभोक्ता 25 दिन के अंतराल पर रिफिल बुक कर सकते हैं।
    2. ​ग्रामीण क्षेत्र (Rural Areas): उपभोक्ताओं के लिए यह समय-सीमा 45 दिन निर्धारित है।

​नोट: यह नियम सभी प्रकार के कनेक्शनों पर समान रूप से लागू होता है। इसमें कनेक्शन की श्रेणी के आधार पर कोई भेदभाव नहीं है।

 

​देश में पर्याप्त स्टॉक, घबराने की जरूरत नहीं

​सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि देश में एलपीजी का पर्याप्त भंडार (Stock) उपलब्ध है। आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सुचारू है और किसी भी तरह की कमी की कोई संभावना नहीं है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे भ्रामक सूचनाओं पर विश्वास न करें और न ही उन्हें आगे फैलाएं। अनावश्यक रूप से या घबराहट में आकर एडवांस बुकिंग करने से बचें ताकि वितरण प्रणाली पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।

​निष्कर्ष

​फेक न्यूज के इस दौर में किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि करना अनिवार्य है। एलपीजी से जुड़ी किसी भी आधिकारिक जानकारी के लिए आप अपने वितरक (Distributor) या मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भरोसा करें।

चैती छठ पर भागलपुर के गंगा घाटों पर उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

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Bhagalpur News:  लोक आस्था के महापर्व चैती छठ के चौथे दिन आज भागलपुर जिले के सभी प्रमुख गंगा घाट श्रद्धालुओं से पूरी तरह भर गए। बरारी सीढ़ी घाट, सुल्तानगंज के पावन उत्तरवाहिनी गंगा घाट, कहलगांव और नाथनगर सहित जिले के प्रमुख घाटों पर सुबह से ही व्रतियों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी।

उदीयमान सूर्य को अर्घ्य: श्रद्धा और परंपरा का अद्भुत दृश्य

श्रद्धालुओं ने पवित्र गंगा में स्नान कर पूरी विधि-विधान और श्रद्धा के साथ उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया। इस दौरान परिवार की सुख-समृद्धि, संतति की मंगलकामना और लोककल्याण की प्रार्थना की गई। घाटों पर गूंजते छठ गीत, मंत्रोच्चार और दीपों की पंक्तियों ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया।

सुरक्षा और व्यवस्था में जिला प्रशासन का सतर्क योगदान

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुव्यवस्था के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। सभी प्रमुख घाटों पर आपदा मित्रों, स्थानीय गोताखोरों और एसडीआरएफ की टीम तैनात की गई। इसके अलावा बैरिकेडिंग, रोशनी, सफाई और भीड़ नियंत्रण के लिए पुलिस बल की पर्याप्त व्यवस्था की गई, जिससे श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

आस्था और संस्कृति का संगम

आज भागलपुर के गंगा घाटों पर आस्था, अनुशासन और सांस्कृतिक परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। हजारों दीपों और श्रद्धा की आभा के बीच छठ महापर्व की दिव्यता साफ झलक रही थी। व्रतियों और श्रद्धालुओं के उत्साह, गीत-संगीत और मंत्रोच्चार ने पूरे माहौल को भावपूर्ण और पवित्र बना दिया।

चैती छठ पर्व पर भागलपुर में न केवल आस्था की झलक देखने को मिली, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा के बेहतरीन प्रबंध ने इसे सफल और सुरक्षित आयोजन बना दिया। श्रद्धालुओं की भावनाओं और परंपरा के संरक्षण के साथ यह पर्व जिले में धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया।

भागलपुर सिल्क सिटी में जीएसटी सेमिनार: टेक्सटाइल उद्योग में राजस्व वृद्धि की नई पहल

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Bhagalpur News: भागलपुर जिला परिषद सभागार में आज जीएसटी विभाग, भागलपुर अंचल–1 के संयुक्त आयुक्त सुश्री मिनी के नेतृत्व में जीएसटी और राजस्व वृद्धि पर एक महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किया गया। इस सेमिनार में टेक्सटाइल एसोसिएशन, सिल्क एसोसिएशन, बुनकर एसोसिएशन, होजरी एसोसिएशन, कर पेशेवर और टेक्सटाइल उद्योग से जुड़े अनेक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

सिल्क सिटी का कर योगदान और गिरावट

सेमिनार में चर्चा हुई कि भागलपुर, जिसे “सिल्क सिटी” के नाम से जाना जाता है, ने राज्य के कर राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इस योगदान में गिरावट देखी गई है, जो राजस्व हित में चिंता का विषय है। संयुक्त आयुक्त सुश्री मिनी ने कहा कि भागलपुर का टेक्सटाइल सेक्टर राज्य के राजस्व बढ़ाने में अत्यंत संभावनाशील है।

नकद भुगतान और ITC दिशा-निर्देश

संयुक्त आयुक्त ने उन करदाताओं को निर्देश दिया जो केवल इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के माध्यम से कर भुगतान कर रहे हैं, कि वे मार्च 2026 में देय कर का कुछ हिस्सा नकद जमा करें। साथ ही कई करदाताओं का जीएसटी पंजीकरण रिटर्न दाखिल न करने के कारण निलंबित या रद्द किया गया है। ऐसे करदाताओं से अपील की गई कि वे लंबित रिटर्न शीघ्र दाखिल कर अपना पंजीकरण पुनः सक्रिय कराएं।

व्यापारिक सहयोग और सुझाव

व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सकल लाभ (ग्रॉस प्रॉफिट) के अनुसार कर का कुछ हिस्सा नकद जमा करने का समर्थन किया और राज्य के राजस्व में वृद्धि के लिए विभाग के साथ पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया। इस सेमिनार में उप आयुक्त श्री अजय पंडित, सहायक आयुक्त श्री अमित कुमार और श्री मयंक प्रकाश भी उपस्थित थे।

समापन और प्रतिबद्धता

कार्यक्रम का समापन जीएसटी अनुपालन मजबूत करने और क्षेत्र में राजस्व वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए विभाग और व्यापारिक संगठनों के बीच साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। इस पहल से सिल्क सिटी के टेक्सटाइल उद्योग में कर जागरूकता बढ़ाने और राजस्व सुधार की दिशा में नया मार्ग प्रशस्त होने की उम्मीद है।

भागलपुर नगर निगम की स्थायी समिति की आकस्मिक बैठक: करोड़ों की विकास योजनाओं को मिली हरी झंडी

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Bhagalpur News: भागलपुर नगर निगम की सशक्त स्थायी समिति की आकस्मिक बैठक आज नगर निगम कार्यालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता माननीय महापौर महोदया ने की। इस बैठक में नगर विकास, जन सुविधाओं और निगम के राजस्व वृद्धि से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर चर्चा के बाद स्वीकृति दी गई।

जल-जमाव से मुक्ति और बुनियादी ढांचा सुधार

नगर निगम के सभी वार्डों (1 से 51) में जल-जमाव की समस्या को स्थायी रूप से हल करने के लिए कच्चे बड़े नालों के निर्माण की योजनाओं को मंजूरी दी गई। वार्ड 10, 50, 33, 34, 35, 29, 42, 15, 46, 1, 8, 3, 4, 5, 6, 13 और 20 से 26 सहित अन्य वार्डों में करोड़ों रुपये के प्राक्कलन को स्वीकृति मिली। इससे नगर में जलभराव की समस्या दूर होगी और बुनियादी ढांचे में सुधार आएगा।

विज्ञापन नियमावली 2026: निगम को नया राजस्व स्रोत

नगर निगम क्षेत्र में विज्ञापन से होने वाले राजस्व को बढ़ाने के लिए ‘भागलपुर नगर निगम क्षेत्र विज्ञापन विनियमावली, 2026’ पर चर्चा हुई। नई नियमावली लागू होने के बाद होर्डिंग, यूनिपोल और वाहनों के माध्यम से निगम को लगभग 2 करोड़ रुपये वार्षिक राजस्व मिलने का अनुमान है। शहर को विज्ञापन के लिए 10 अलग-अलग वर्गों में बांटा गया है।

भूमि उपयोग और नए विकास प्रोजेक्ट

नगर निगम की खाली पड़ी जमीनों के सदुपयोग के लिए बड़ा निर्णय लिया गया। दीपनगर में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और पेट्रोल पंप, नाथनगर अड़गड़ा में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और तातारपुर गोदाम की जमीन पर पेट्रोल पंप खोलने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इससे नगर में वाणिज्यिक गतिविधियों और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

जन सुविधाएँ और सौंदर्यीकरण

15वें और पंचम वित्त आयोग की राशि से प्रत्येक वार्ड में प्याऊ निर्माण और उनके भुगतान की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने का निर्णय लिया गया। साथ ही कम्पनीबाग तालाब का जीर्णोद्धार और निगम की जमीनों की घेराबंदी व सौंदर्यीकरण कार्यों को प्राथमिकता दी गई।

लंबित योजनाओं का निष्पादन

सात निश्चय योजना के अंतर्गत नाली-गली योजनाओं के लंबित भुगतानों को विभिन्न वित्त आयोगों की मद से पूरा करने का निर्णय लिया गया। इससे विकास कार्यों में तेजी आएगी और नागरिकों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।
बैठक में उप महापौर, नगर आयुक्त, सभी स्थायी समिति सदस्य और अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। महापौर महोदया ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्वीकृत योजनाओं का क्रियान्वयन समयसीमा के भीतर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से किया जाए।

जमालपुर लोको शेड की “स्क्रैप टू आर्ट” पहल: कंडेम्ड पुर्जों से विकसित इन-हाउस कंप्रेसर यूनिट

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Malda, 24 मार्च 2026: पूर्व रेलवे के मालदा मंडल के अंतर्गत जमालपुर लोको शेड ने “स्क्रैप टू आर्ट” पहल के तहत एक अद्वितीय नवाचार किया है। इस पहल में निष्प्रयोज्य (कंडेम्ड) लोकोमोटिव के अवशेष पुर्जों का उपयोग कर पूरी तरह से इन-हाउस विकसित कंप्रेसर यूनिट बनाई गई है। यह परियोजना मंडल रेल प्रबंधक, मालदा, श्री मनीष कुमार गुप्ता के मार्गदर्शन में संपन्न हुई और इसका उद्घाटन वरिष्ठ मंडल यांत्रिक अभियंता (डीजल), जमालपुर, श्री कृष्ण कुमार दास द्वारा अधिकारियों एवं कर्मचारियों की उपस्थिति में किया गया।
नव विकसित कंप्रेसर यूनिट 10 किग्रा/सेमी² तक संपीड़ित वायु उत्पन्न करने में सक्षम है। इससे लोको शेड की परिचालन दक्षता में सुधार हुआ है। पहले, संपीड़ित वायु आपूर्ति के लिए डीजल लोकोमोटिव पर निर्भरता के कारण उच्च ईंधन खपत और परिचालन में विलंब होता था। अब यह इन-हाउस प्रणाली न केवल ऊर्जा की बचत करती है, बल्कि जनशक्ति की आवश्यकता को भी कम करती है और अनावश्यक शंटिंग कार्यों को समाप्त करती है।
इसके अतिरिक्त, इस कंप्रेसर यूनिट का उपयोग हाइड्रोलिक टॉर्क रिंच संचालन, ग्राइंडिंग और पुर्जों की सफाई जैसे अनुरक्षण कार्यों में दक्षता बढ़ाने के साथ टर्नअराउंड समय को भी कम करता है। यह नवाचार पूरी तरह से लागत प्रभावी और पर्यावरण अनुकूल है, जिससे रेलवे संचालन की स्थायित्व और हरित पहल को बल मिला है।
जमालपुर लोको शेड की यह पहल भारतीय रेल की “वेस्ट टू वेल्थ” अवधारणा को साकार करती है। यह परियोजना न केवल संसाधनों के इष्टतम उपयोग को बढ़ावा देती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में भी एक मिसाल पेश करती है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार के नवाचार परिचालन दक्षता को बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरणीय लक्ष्यों की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जमालपुर लोको शेड, मालदा मंडल, निरंतर नवाचार, दक्षता और पर्यावरण अनुकूल प्रथाओं में नए मानक स्थापित कर रहा है। इस पहल के माध्यम से न केवल लागत में कमी आई है बल्कि लोको शेड में कार्यरत कर्मचारियों के लिए बेहतर और सुरक्षित कार्य वातावरण भी सुनिश्चित हुआ है।
पूर्व रेलवे की यह “स्क्रैप टू आर्ट” पहल पूरे देश के रेलवे मंडलों के लिए प्रेरणास्त्रोत है, जो दिखाती है कि संसाधनों का रचनात्मक पुन: उपयोग और तकनीकी नवाचार मिलकर रेलवे संचालन को और अधिक प्रभावी और टिकाऊ बना सकते हैं।

पूर्व रेलवे ने पत्थरबाज़ी रोकने के लिए की विशेष अपील, यात्रियों की सुरक्षा बनी प्राथमिकता

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Railway News: पूर्व रेलवे ने रेल पटरियों पर पत्थरबाज़ी की घटनाओं को रोकने के लिए यात्रियों और स्थानीय समुदाय से विशेष अपील की है। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार 2026 में पश्चिम बंगाल के विभिन्न मंडलों में 21 पत्थरबाज़ी की घटनाएं दर्ज की गईं, जिसमें 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया। हावड़ा मंडल में 6 घटनाओं में 5 गिरफ्तारियां हुईं, सियालदह मंडल में 4 घटनाओं में 4 गिरफ्तारियां और मालदा मंडल में 5 घटनाओं में 3 गिरफ्तारियां हुईं। आसनसोल मंडल में 6 घटनाएं दर्ज हुईं, लेकिन अभी तक केवल 1 मामले का पता चला और 2 गिरफ्तारियां हुईं।
पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने कहा कि ट्रेनें केवल लोहे और इंजन नहीं हैं, बल्कि ये लाखों लोगों के सपनों और जीवन का प्रतीक हैं। पत्थरबाज़ी जैसी हरकतें न केवल राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि यात्रियों के जीवन के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती हैं। उन्होंने समुदाय से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति किसी ट्रेन पर पत्थर फेंकता देखे, तो तुरंत उसे रोकें और समझाएं।
रेलवे ने बताया कि पत्थरबाज़ी अक्सर उन इलाकों में होती है जहां बच्चे खेलते हैं। ट्रेन पर पत्थर फेंकना मनोरंजन नहीं बल्कि गंभीर अपराध है। रेलवे अधिनियम 1989 के तहत धारा 152 के अनुसार जानबूझकर ट्रेन या यात्रियों को नुकसान पहुँचाने पर अपराधी को आजीवन कारावास या अधिकतम दस साल तक की सजा हो सकती है। धारा 154 के तहत लापरवाही से ट्रेन पर पत्थर फेंकने पर एक वर्ष तक का कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
पूर्व रेलवे ने लगातार पटरियों के पास CCTV निगरानी बढ़ा दी है और अपराधियों की पहचान के लिए रिकॉर्डिंग का उपयोग किया जा रहा है। साथ ही, विभिन्न मंडलों में सुरक्षा बल सक्रिय रूप से पत्थरबाज़ी की घटनाओं पर नजर रख रहे हैं।
पूर्व रेलवे का संदेश स्पष्ट है: “ट्रेन को निशाना बनाना अपने ही घर को नुकसान पहुंचाने के समान है। बच्चों को समझाएं, समुदाय जागरूक बनें और पत्थरबाज़ी जैसी हरकतों को रोकें।” रेलवे ने स्थानीय लोगों और माता-पिता से अपील की है कि वे बच्चों को चेतावनी दें और इस तरह की घटनाओं को रोकें।
पूर्व रेलवे की यह पहल केवल यात्रियों की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि पूरे समुदाय और राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा के लिए भी अहम है। सभी नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से रेल सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सकता है और पत्थरबाज़ी जैसी खतरनाक गतिविधियों को रोककर ट्रेन यात्रा को सुरक्षित, सुंदर और निर्बाध बनाया जा सकता है।

भागलपुर: कोर्ट ने अजीत शर्मा को बरी किया, अभियोजन के चार गवाह भी नहीं कर पाए आरोप सिद्ध

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Bhagalpur News: भागलपुर के 1st ACJM कोर्ट में माननीय श्री धरेन्द्र कुमार पांडेय, विशेष न्यायाधीश MP/MLA के समक्ष एक महत्वपूर्ण सुनवाई में आरोपी अजीत शर्मा को बरी कर दिया गया। मामला MP/MLA-02/2024 के अंतर्गत Kotwali थाना पी.एस.-623/2020, GR-4046/2020 के तहत दर्ज किया गया था। अभियोजन ने आरोपी के खिलाफ IPC की धाराओं 188, 269, 270, 271 और 3 Epidemic Disease Act के तहत आरोप लगाया था।
अदालत में अभियोजन पक्ष ने इस मामले में चार गवाहों को पेश किया, जिनसे आरोपी पर लगाए गए आरोपों की पुष्टि करने का प्रयास किया गया। हालांकि, न्यायालय ने सभी प्रस्तुत साक्ष्यों का मूल्यांकन करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी के विरुद्ध पर्याप्त सबूत पेश नहीं किए। साक्ष्यों की कमी और आरोप सिद्ध न होने के कारण अदालत ने अजीत शर्मा को वर्तमान वाद में बरी कर दिया।
अभियोजन की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ सारथी ने मुकदमे को पेश किया और सभी गवाहों को साक्षी के रूप में प्रस्तुत किया। दूसरी ओर, आरोपी के पक्ष में वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषिकेश चौधरी के नेतृत्व में रंजीत कुमार, अनुज कुमार और रोहित शंकर ने उनका बचाव किया। अदालत ने अभियुक्त के पक्ष के दलीलों को मान्यता देते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्य आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
इस फैसले के बाद आरोपी अजीत शर्मा और उनके परिजन ने न्यायालय के निर्णय का स्वागत किया। वरिष्ठ अधिवक्ता ऋषिकेश चौधरी ने कहा कि “न्यायालय ने साक्ष्य के महत्व और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए सही निर्णय दिया है। यह फैसला कानून के प्रति जनता का विश्वास मजबूत करेगा।”
इस मामले में अदालत का यह फैसला यह दर्शाता है कि किसी भी आरोप के लिए पर्याप्त और ठोस साक्ष्य का होना आवश्यक है। बिना प्रमाण के आरोप सिद्ध नहीं किया जा सकता, और न्यायपालिका ने इस मामले में आरोपी को निष्पक्षता और कानूनी अधिकारों के तहत राहत प्रदान की।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल प्रस्तुत साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर लिया गया है। भविष्य में किसी भी मामले में आरोप सिद्ध करने के लिए अभियोजन पक्ष को मजबूत साक्ष्य और ठोस प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
इस तरह यह फैसला न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता का प्रतीक माना जा रहा है।

बिहार में ‘पीएम सूर्य घर योजना’ की समीक्षा बैठक संपन्न: सोलर रूफटॉप और मॉडल सोलर विलेज पर फोकस

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Patna News: बिहार सरकार ने ‘पीएम सूर्य घर योजना’ के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक की अध्यक्षता मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की और इसमें सभी जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, ऊर्जा विभाग के सचिव मनोज कुमार सिंह, जीविका के सीईओ हिमांशु एवं प्रमुख बैंकों के प्रतिनिधि शामिल हुए। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक का उद्देश्य योजना की अद्यतन स्थिति का आकलन करना, कुटीर ज्योति उपभोक्ताओं के आच्छादन की प्रगति पर निगरानी रखना और मॉडल सोलर विलेज की स्थापना पर तेजी लाना था।
बैठक में योजना के तहत निर्धारित लक्ष्य और लाभों पर विस्तृत चर्चा हुई। वित्तीय वर्ष 2026-27 तक लगभग 4.82 लाख घरों को सोलर रूफटॉप से आच्छादित करने का लक्ष्य तय किया गया है। योजना में 1 किलोवाट के प्लांट पर 30,000 रुपये, 2 किलोवाट पर 60,000 रुपये और 3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता वाले प्लांट पर अधिकतम 78,000 रुपये की केंद्रीय सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा, उपभोक्ताओं के लिए 6.0% की किफायती ब्याज दर पर बैंक ऋण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि बैंकों द्वारा ऋण आवेदन में अनावश्यक दस्तावेजों की मांग पर रोक लगाई जाए। अधिकांश आवेदन 3 किलोवाट से कम क्षमता वाले हैं, ऐसे मामलों में पैन कार्ड या आय प्रमाण पत्र जैसी गैर-जरूरी मांग नहीं की जाएगी। जिलाधिकारी ऋण आवेदन, स्वीकृति और वितरण की प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए विशेष कैंप आयोजित करेंगे। योजना के सुचारू संचालन के लिए बैंकों में नोडल अधिकारी भी नियुक्त किए जाएंगे।
ULA (Utility Led Aggregator) मॉडल के तहत अगले चार वर्षों में 58 लाख कुटीर ज्योति उपभोक्ताओं को सोलर सिस्टम से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के पहले चरण में प्रत्येक ब्लॉक की पांच पंचायतों का चयन किया जाएगा ताकि पूर्ण आच्छादन लक्ष्य को तेजी से हासिल किया जा सके। अक्टूबर 2026 तक 2.5 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम की स्वीकृति पहले ही दी जा चुकी है। इसके लिए ‘जीविका दीदियों’ की मदद ली जाएगी, जो ग्रामीण घरों में आवेदन प्रक्रिया को सुगम बनाएंगी।
मुख्य सचिव ने प्रत्येक जिले में ‘मॉडल सोलर विलेज’ विकसित करने पर भी जोर दिया। चयनित गांवों को 1 करोड़ रुपये की केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA) दी जाएगी। योजना को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। शेष 28 जिलों में योग्य गांवों का चयन शीघ्र पूरा करने और प्रतियोगिता अवधि शुरू करने के निर्देश जिलाधिकारियों को दिए गए।
बैठक में योजना की निगरानी, गति बढ़ाने और समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए तत्काल नोडल अधिकारियों का नामांकन सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया। बिहार सरकार का उद्देश्य है कि योजना के माध्यम से राज्य के ग्रामीण घरों में स्वच्छ और किफायती ऊर्जा पहुँच सके और हर जिले में मॉडल सोलर विलेज का निर्माण कर सौर ऊर्जा के प्रयोग को बढ़ावा मिले।

भागलपुर में एलपीजी गैस की आपूर्ति सुचारू, जिले में कोई कमी नहीं

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Bhagalpur News: भागलपुर जिले में एलपीजी गैस की आपूर्ति पूरी तरह सुचारू है और उपभोक्ताओं को गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। इस संबंध में जिला आपूर्ति पदाधिकारी सुधीर कुमार ने जानकारी दी कि जिले में सभी गैस कंपनियां लगातार गैस की आपूर्ति कर रही हैं, जिसके कारण पिछले समय में मौजूद बैकलॉग काफी हद तक कम हो गया है।
23 मार्च 2026 को जिले में कुल 12,800 उपभोक्ताओं को होम डिलीवरी के माध्यम से गैस प्रदान की गई। इस प्रयास के परिणामस्वरूप जिला नियंत्रण कक्ष में गैस आपूर्ति से जुड़ी शिकायतें न्यूनतम स्तर पर पहुँच गई हैं। आज, 24 मार्च की शाम 4 बजे तक जिले में केवल 20 शिकायतें पंजीकृत की गई हैं, जिनका त्वरित निवारण किया जा रहा है।
भागलपुर जिले में कुल 58 एलपीजी गैस एजेंसियां संचालित हैं। इसमें इंडियन ऑयल (IOCL) की 33, हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) की 16 और ब्राइट रिफाइनरी (BRCL) की 9 स्थानीय वितरक एजेंसियां शामिल हैं। जिले के सभी घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को समय पर होम डिलीवरी के माध्यम से गैस उपलब्ध कराई जा रही है।
जिला प्रशासन ने एलपीजी आपूर्ति की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी है और सुनिश्चित किया है कि उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। इसके लिए 24 घंटे सक्रिय जिला नियंत्रण कक्ष संचालित है, जिसका संपर्क नंबर 0641-2402871 है। इस कक्ष के माध्यम से उपभोक्ता अपनी शिकायतें दर्ज कर सकते हैं और उन्हें तुरंत समाधान प्राप्त हो रहा है।
जिला आपूर्ति पदाधिकारी श्री सुधीर कुमार ने कहा कि उपभोक्ताओं को एलपीजी गैस की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी और समय-समय पर आपूर्ति की समीक्षा की जा रही है। प्रशासन का लक्ष्य यह है कि जिले में हर उपभोक्ता को समय पर और बिना किसी रुकावट के गैस उपलब्ध हो।
इस तरह, जिले में एलपीजी गैस की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद स्थिति में है। उपभोक्ताओं को सुझाव दिया गया है कि किसी भी आपूर्ति या शिकायत संबंधी जानकारी के लिए सीधे जिला नियंत्रण कक्ष से संपर्क करें।