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सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ बैरक भवन और थाना का उद्घाटन, सुरक्षा व्यवस्था होगी और मजबूत

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Bhagalpur News: भागलपुर जिले के सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। रेल आईजी ए.एन. सिन्हा ने सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन परिसर में नव-निर्मित आरपीएफ बैरक भवन एवं थाना का फीता काटकर विधिवत उद्घाटन किया। इस मौके पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी के कई अधिकारी एवं जवान उपस्थित रहे।
उद्घाटन के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए रेल आईजी ए.एन. सिन्हा ने बताया कि इस नए बैरक भवन और थाना के शुरू होने से आरपीएफ जवानों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, जिससे वे अधिक प्रभावी ढंग से अपनी ड्यूटी निभा सकेंगे। उन्होंने कहा कि रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था को हाईटेक बनाने के लिए सीसीटीवी कैमरों का व्यापक उपयोग किया जाएगा।
उन्होंने आगे बताया कि अपराध नियंत्रण के लिए एक नई रणनीति के तहत अपराधियों की तस्वीरें और डाटा सभी आरपीएफ और जीआरपी जवानों के मोबाइल पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे अपराधियों की पहचान कर उन्हें घटना से पहले ही पकड़ने में मदद मिलेगी।
रेल आईजी ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रेनों और स्टेशन परिसर में सक्रिय शराब माफियाओं पर नकेल कसने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में कई शराब तस्करों और अपराधियों की गिरफ्तारी की गई है, जिससे रेल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इस अवसर पर आरपीएफ क्राइम इंस्पेक्टर सुधांशु कुमार सुधा, मनोहर कुमार, ए.के. सिंह, राकेश कुमार वर्मा सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। साथ ही सुल्तानगंज थाना के पुलिस पदाधिकारी और अन्य सुरक्षा बलों के जवान भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
स्थानीय लोगों और यात्रियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे स्टेशन पर सुरक्षा का माहौल और मजबूत होगा। कुल मिलाकर, यह उद्घाटन न केवल सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाएगा, बल्कि यात्रियों को भी सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का अनुभव प्रदान करेगा।

रामनवमी पर सुल्तानगंज में नेपाल के कलाकारों ने बांधा समां, अष्टजाम और महाआरती से भक्तिमय हुआ माहौल

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Sultanganj News: भागलपुर जिले के सुल्तानगंज स्थित कृष्णगढ़ हनुमान मंदिर में रामनवमी के शुभ अवसर पर एक भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें नेपाल से आए कलाकारों ने अष्टजाम की मनमोहक प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस आयोजन ने पूरे क्षेत्र को भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
कार्यक्रम के दौरान नेपाल के कलाकारों ने पारंपरिक शैली में अष्टजाम का आयोजन किया, जिसमें भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा व्यक्त की गई। कलाकारों की मधुर आवाज और समर्पण भाव ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति में लीन कर दिया।
इस विशेष मौके पर बनारस की तर्ज पर भव्य महाआरती का भी आयोजन किया गया, जिसने कार्यक्रम की भव्यता को और बढ़ा दिया। दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार और घंटों की ध्वनि के बीच आयोजित महाआरती ने श्रद्धालुओं को एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा वातावरण राममय हो गया हो।
कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजक बंटी सिंह और उनकी टीम की अहम भूमिका रही। उनके प्रयासों से यह आयोजन भव्य और सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ। इस दौरान नेपाल के कलाकारों ने भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच सनातन धर्म की गहरी जड़ें हैं, जो लोगों को आपस में जोड़ती हैं।
इस आयोजन में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। मंदिर परिसर में उमड़ी भीड़ ने कार्यक्रम की सफलता को दर्शाया। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से कार्यक्रम का आनंद लिया और भगवान श्रीराम से सुख-समृद्धि की कामना की।
कुल मिलाकर, यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक रहा, बल्कि भारत-नेपाल के सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूती प्रदान करने वाला साबित हुआ।

रामनवमी पर सुल्तानगंज में भव्य शोभायात्रा, जय श्री राम के नारों से गूंजा शहर

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Sultanganj News: भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में रामनवमी के पावन अवसर पर अजगैविनाथ युवा समिति की ओर से एक भव्य और आकर्षक शोभायात्रा का आयोजन किया गया। इस शोभायात्रा ने पूरे नगर का माहौल भक्तिमय बना दिया। भगवा रंग में रंगे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और “जय श्री राम” के गगनभेदी नारों से पूरा शहर गूंज उठा।
शोभायात्रा की शुरुआत बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ की गई, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु, युवा, महिलाएं और सामाजिक संगठनों के सदस्य शामिल हुए। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की धुन और भक्ति गीतों ने वातावरण को और भी उत्साहपूर्ण बना दिया। यात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से होते हुए आगे बढ़ी और कृष्णगढ़ मोड़ के पास जाकर संपन्न हुई।
इस अवसर पर प्रशासनिक और जनप्रतिनिधियों की भी सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। शोभायात्रा में प्रशिक्षु एएसपी सयाम रजा, इंस्पेक्टर मृत्युंजय कुमार, वीडियो संजीव कुमार, नगर सभापति राज कुमार गुड्डू और लोजपा के जिला युवा अध्यक्ष मनीष कुमार सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए। सभी ने यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साहवर्धन किया और कार्यक्रम को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने में अहम भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के दौरान आयोजकों और वक्ताओं ने लोगों को हिंदू धर्म के प्रति जागरूक रहने और सामाजिक एकता बनाए रखने का संदेश दिया। साथ ही सभी श्रद्धालुओं को रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी गई।
इस शोभायात्रा ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत किया, बल्कि सामाजिक समरसता और एकजुटता का भी संदेश दिया। सुल्तानगंज में इस तरह के आयोजन हर साल लोगों के बीच उत्साह और श्रद्धा का संचार करते हैं।
कुल मिलाकर, यह भव्य शोभायात्रा श्रद्धा, उत्साह और अनुशासन का एक अद्भुत उदाहरण रही, जिसने पूरे नगर को राममय बना दिया।

30 मार्च को बड़ा फैसला! नीतीश कुमार छोड़ेंगे विधान परिषद की सदस्यता, बिहार की राजनीति में हलचल तेज

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Patna News:  बिहार की राजनीति एक बार फिर बड़े मोड़ पर खड़ी है। राज्य के मुख्यमंत्री Nitish Kumar 30 मार्च 2026 को बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं। उनके इस संभावित फैसले ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है और नए समीकरणों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
दरअसल, हाल ही में Nitish Kumar राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। भारतीय संविधान के नियमों के अनुसार कोई भी व्यक्ति एक साथ संसद और राज्य विधानमंडल दोनों का सदस्य नहीं रह सकता। ऐसे में उन्हें तय समय सीमा के भीतर किसी एक पद से इस्तीफा देना अनिवार्य है। सूत्रों के मुताबिक, वे विधान परिषद की सदस्यता छोड़कर राज्यसभा में अपनी नई भूमिका निभाने की तैयारी में हैं।
30 मार्च इस पूरे घटनाक्रम के लिए अहम तारीख मानी जा रही है, क्योंकि इसी दिन तक उन्हें अपना अंतिम निर्णय लेना होगा। अगर वे निर्धारित समय में इस्तीफा नहीं देते हैं, तो उनकी राज्यसभा सदस्यता स्वतः समाप्त हो सकती है। यही कारण है कि राजनीतिक स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं और हर किसी की नजर इस फैसले पर टिकी हुई है।
हालांकि सबसे बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है—क्या Nitish Kumar मुख्यमंत्री पद भी छोड़ेंगे? राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो वे पहले विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा देंगे और कुछ समय तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं। इसके बाद राज्यसभा में शपथ लेने के पश्चात वे आगे का फैसला कर सकते हैं।
इस संभावित बदलाव के बीच बिहार में सत्ता संतुलन को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। एनडीए गठबंधन के भीतर नेतृत्व परिवर्तन और नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। भाजपा और जदयू के बीच संभावित रणनीति पर भी मंथन जारी है।
कुल मिलाकर, 30 मार्च का दिन बिहार की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। Nitish Kumar का यह कदम न सिर्फ उनके राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि राज्य की सत्ता संरचना में भी बड़ा बदलाव ला सकता है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि वे आगे कौन सा बड़ा फैसला लेते हैं।

भागलपुर सदर अस्पताल में गंभीर एनीमिया पीड़ित महिलाओं का सफल उपचार

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Bhagalpur News: बिहार सरकार की पहल के तहत भागलपुर के मॉडल सदर अस्पताल में गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं का सफल इलाज किया गया है। यह पहल एफ.सी.एम (Ferro-Carboxymaltose) थेरेपी इनिशिएटिव के माध्यम से की गई, जिसे हाल ही में पटना में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय द्वारा राज्य स्तर पर शुरू किया गया था। अब इसका लाभ धीरे-धीरे जिलों तक भी पहुंच रहा है।
सदर अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. राजू कुमार ने बताया कि एफ.सी.एम थेरेपी के तहत दर्जनों महिलाओं का प्रभावी इलाज किया गया है। उन्होंने कहा कि यह थेरेपी आयरन की कमी से होने वाले गंभीर एनीमिया के उपचार में अत्यंत कारगर साबित हो रही है। जिन महिलाओं में हीमोग्लोबिन का स्तर अत्यंत कम था, उन्हें इस आधुनिक पद्धति से इलाज देकर तेजी से सुधार लाने का प्रयास किया गया।
डॉ. कुमार ने आगे बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य खासकर गर्भवती महिलाओं और कमजोर स्वास्थ्य वाली महिलाओं में हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार करना है। इससे न केवल उनकी शारीरिक स्थिति में सुधार होगा, बल्कि प्रसव और मातृत्व से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं को भी कम करने में मदद मिलेगी।
स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि एफ.सी.एम थेरेपी इनिशिएटिव राज्य में एनीमिया की समस्या को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह योजना केवल गंभीर मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सामान्य आयरन की कमी वाले रोगियों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एनीमिया भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर चुनौती है, और इसके प्रभावी इलाज के बिना महिला स्वास्थ्य में सुधार कठिन है। इस पहल से भागलपुर सहित पूरे बिहार में महिला स्वास्थ्य में सुधार की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
भागलपुर मॉडल सदर अस्पताल की इस पहल ने यह संदेश दिया है कि सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अब सीधे जनता तक पहुंचाया जा रहा है। भविष्य में और अधिक जिलों में इस थेरेपी को लागू करने की योजना है, जिससे महिलाओं की जीवन गुणवत्ता में सुधार हो सके और राज्य में व्यापक स्वास्थ्य सुधार सुनिश्चित हो सके।

मायागंज अस्पताल में लापरवाही का आरोप: नवजात की मौत पर परिजनों का हंगामा

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Bhagalpur News:भागलपुर के मायागंज अस्पताल में तीन दिन पहले जन्मे एक नवजात बच्चे की मृत्यु के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और स्टाफ पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
परिजनों के अनुसार, बच्चे की हालत जन्म के तुरंत बाद से ही अस्वस्थ थी। शुरुआत में उसे मुंगेर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसकी स्थिति को गंभीर बताया और बेहतर इलाज के लिए उसे मायागंज अस्पताल, भागलपुर रेफर कर दिया। हालांकि, मायागंज अस्पताल पहुंचने के बाद परिजन का आरोप है कि बच्चे को समय पर उचित इलाज नहीं मिला।
परिजनों का कहना है कि अस्पताल के स्टाफ ने उन्हें यह देखने के लिए भेज दिया कि आईसीयू (ICU) में बेड खाली है या नहीं। जब परिजन वापस लौटे, तो उन्होंने देखा कि एक नर्स बच्चे के सीने पर पंप (CPR) कर रही थी। कुछ ही देर बाद डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। इस पूरी प्रक्रिया को लेकर परिजन अत्यंत आक्रोशित हैं और उन्होंने अस्पताल प्रबंधन पर घोर लापरवाही और अनदेखी का आरोप लगाया।
इस घटना ने अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य कर्मियों की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का मानना है कि अगर समय पर और उचित इलाज मिलता, तो बच्चे की जान बचाई जा सकती थी। इसके साथ ही, यह मामला सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की कमी, स्टाफ की कमी और आपातकालीन सेवाओं में अनियमितताओं को उजागर करता है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामले केवल व्यक्तिगत त्रुटि नहीं हैं, बल्कि यह प्रणालीगत समस्याओं का हिस्सा हैं, जिन्हें सुधारना अत्यंत आवश्यक है।
भागलपुर के लोग और परिजन अब इस घटना को लेकर सवाल उठा रहे हैं कि सरकारी अस्पतालों में इमरजेंसी और नवजात देखभाल के लिए पर्याप्त संसाधन और स्टाफ मौजूद हैं या नहीं। इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की तत्काल आवश्यकता को उजागर कर दिया है।
नवजात की मौत की यह दुखद घटना न केवल परिजनों के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए चेतावनी बनकर आई है, कि सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन इलाज और संवेदनशील मामलों में समय पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

13 की उम्र में कमाल: भागलपुर के देवांश गहलोत ने लिखी अपनी पहली किताब, मां की प्रेरणा ने बनाया लेखक

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Bhagalpur News: कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और माता-पिता का सही मार्गदर्शन मिले, तो उम्र महज एक संख्या बनकर रह जाती है। बिहार के सिल्क सिटी भागलपुर के 13 वर्षीय देवांश गहलोत ने इस बात को सच कर दिखाया है। मात्र कक्षा 8 के छात्र देवांश ने अपनी पहली पुस्तक “Teenhood: A Tempting Disaster” लिखकर न केवल अपने माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा किया है, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है।

​कक्षा 6 से शुरू हुआ था शब्दों का सफर

​देवांश की यह उपलब्धि रातों-रात नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि लिखने का शौक उन्हें बचपन से ही था। जब वे कक्षा 3 में थे, तभी से छोटी-छोटी कविताएं और कहानियां बुनने लगे थे। लेकिन एक पूरी किताब लिखने का विचार उन्हें कक्षा 6 में आया। पिछले दो वर्षों की कड़ी मेहनत, कल्पनाशीलता और लगन का परिणाम है कि आज उनकी पुस्तक प्रकाशित होकर बाजार में उपलब्ध है।

​कवर से लेकर कंटेंट तक, सब कुछ ‘सेल्फ-मेड’

​देवांश की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी किताब का केवल कंटेंट ही नहीं लिखा, बल्कि उसकी हेडिंग, चैप्टर्स का चुनाव और आकर्षक कवर पेज भी खुद ही डिजाइन किया है। यह एक किशोर की बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है। देवांश ने अपनी इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी माँ को दिया है।

​मां की प्रेरणा और पिता का सहयोग

​देवांश की मां रूपाली (एक गृहिणी) ने शुरुआत से ही अपने बेटे के अंदर छिपे लेखक को पहचान लिया था। उन्होंने देवांश को लगातार इंग्लिश लिटरेचर की बारीकियों को समझने और लिखने के लिए प्रेरित किया। वहीं, देवांश के पिता संजीव कुमार, जो स्वयं एक सरकारी स्कूल में अंग्रेजी के शिक्षक हैं, ने भी अपने बेटे के लेखन कौशल को निखारने में पूरा सहयोग दिया। परिवार का कहना है कि देवांश ने पढ़ाई के साथ-साथ अपने इस जुनून को जिस तरह बैलेंस किया, वह सराहनीय है।

​”मुझे गर्व है कि मेरे बेटे ने अपनी क्रिएटिविटी से समाज को एक संदेश दिया है। उसकी मेहनत और इंग्लिश लिटरेचर के प्रति उसका लगाव ही आज इस पुस्तक के रूप में सामने आया है।” — रूपाली (देवांश की मां)

 

​भविष्य का लक्ष्य: न्यूरोसर्जन बनने का सपना

​अक्सर लोग मानते हैं कि लेखक बनने वाले बच्चे विज्ञान से दूर रहते हैं, लेकिन देवांश अलग हैं। उनका सपना एक न्यूरोसर्जन (डॉक्टर) बनना है। देवांश का कहना है कि चिकित्सा के क्षेत्र में करियर बनाने के बावजूद वे अपने लेखन के शौक को कभी नहीं छोड़ेंगे। वे अपनी कलम के जरिए समाज को प्रेरित करना जारी रखेंगे।

​युवाओं को संदेश: गहराई से पढ़ना ही सफलता की कुंजी

​अपनी सफलता से उत्साहित देवांश ने अपने हमउम्र साथियों और युवाओं को एक खास संदेश दिया है। उनका कहना है कि:

  • ​किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए उस विषय की गहराई से समझ जरूरी है।
  • ​सिर्फ ऊपर-ऊपर से पढ़ने के बजाय, ज्ञान को आत्मसात करना चाहिए।
  • ​मेहनत और लगन हो तो कोई भी सपना छोटा नहीं होता।

चैती नवरात्र पर सुल्तानगंज में उमड़ा आस्था का सैलाब, दुर्गा और हनुमान मंदिरों में लगी भक्तों की लंबी कतार

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Bhagalpur News: चैती नवरात्र और रामनवमी के पावन अवसर पर Sultanganj प्रखंड में आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है। अष्टमी पूजा के दिन क्षेत्र के विभिन्न दुर्गा मंदिरों और हनुमान मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं, जहां महिलाएं और पुरुष पूरे श्रद्धा भाव के साथ पूजा-अर्चना करते नजर आए।

अष्टमी पर विशेष पूजा, महिलाओं की अधिक भागीदारी

चैती नवरात्र की अष्टमी तिथि को लेकर खास उत्साह देखा गया। सुबह होते ही श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचने लगे। खासकर महिलाओं की बड़ी संख्या मंदिरों में उमड़ी, जिन्होंने मां दुर्गा को फल-फूल और प्रसाद अर्पित कर परिवार के सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया, जहां हर ओर जयकारों की गूंज सुनाई दी।

नई स्थान और प्रमुख मंदिरों में बढ़ी भीड़

सुल्तानगंज के प्रसिद्ध नई स्थान स्थित चैती दुर्गा मंदिर में श्रद्धालुओं का विशेष जमावड़ा देखने को मिला। यहां स्थापित दुर्गा प्रतिमा के दर्शन के लिए लोगों की लंबी कतार लगी रही। इसके साथ ही आसपास के हनुमान मंदिरों में भी भक्तों ने पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाएं मांगीं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर वर्ग के लोग आस्था में डूबे नजर आए।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, प्रशासन सतर्क

भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आया। प्रशिक्षु एएसपी सयाम रजा और इंस्पेक्टर मृत्युंजय कुमार के नेतृत्व में पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। मंदिर परिसरों और आसपास के इलाकों में पुलिस बल की तैनाती की गई, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। प्रशासन की ओर से ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

चैती नवरात्र और रामनवमी के इस पावन अवसर पर सुल्तानगंज में उमड़ी आस्था की भीड़ ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि धार्मिक पर्व यहां के लोगों के जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के इस संगम ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक माहौल में रंग दिया है।

बिहार में बड़ा फैसला: स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’ अनिवार्य, सरकार ने जारी किया नया निर्देश

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Patna News:  बिहार की शिक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए Nitish Kumar की सरकार ने राज्य के सभी सरकारी एवं गैर-सरकारी स्कूलों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य करने का निर्देश जारी किया है। इस फैसले के बाद अब राज्य के स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान ‘वंदे मातरम्’ गाना जरूरी होगा। सरकार के इस निर्णय को राष्ट्रभावना और अनुशासन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

क्या है नया नियम?

जारी आदेश के अनुसार, सभी स्कूलों में सप्ताह में कम से कम एक दिन ‘वंदे मातरम्’ गाया जाएगा। इसके अलावा राष्ट्रीय पर्व, सरकारी कार्यक्रमों और विशेष आयोजनों के दौरान भी राष्ट्रगीत का गायन अनिवार्य किया गया है। इस दौरान सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को सम्मानपूर्वक खड़े रहना होगा।

फैसले के पीछे सरकार की मंशा

राज्य सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य छात्रों के भीतर देशभक्ति की भावना को विकसित करना और उन्हें राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, स्कूल स्तर पर इस तरह के सांस्कृतिक और राष्ट्रीय कार्यक्रम छात्रों के व्यक्तित्व विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।

प्रशासन को सख्त निर्देश

सरकार ने इस आदेश को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सभी जिलाधिकारियों, शिक्षा अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि वे नियमित निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि आदेश का पालन हो रहा है या नहीं। लापरवाही बरतने वाले संस्थानों पर कार्रवाई भी की जा सकती है।

कानूनी पहलू और विवाद

इस फैसले को लेकर कुछ जगहों पर बहस भी शुरू हो गई है। हालांकि, इस संबंध में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इसे अनिवार्य रूप से लागू करने के बजाय एक मार्गदर्शक निर्देश माना है। कोर्ट का कहना है कि इसे सख्ती से थोपना उचित नहीं होगा, लेकिन इसका उद्देश्य सकारात्मक है।

कुल मिलाकर, बिहार सरकार का यह कदम शिक्षा के साथ-साथ छात्रों में राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले का स्कूलों और छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ता है।

भागलपुर में स्पीडी ट्रायल और गंभीर मामलों की समीक्षा, डीएम ने दिए सख्त निर्देश

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Bhagalpur News: भागलपुर समाहरणालय में बुधवार को जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी की अध्यक्षता में अभियोजन, स्पीडी ट्रायल एवं मद्यनिषेध से संबंधित मामलों की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले के वरीय प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ अभियोजन विभाग के पदाधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव, नगर पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह, अपर समाहर्ता दिनेश राम, अपर जिला दंडाधिकारी (विधि व्यवस्था) राकेश कुमार रंजन, जिला विधि शाखा की प्रभारी पदाधिकारी डॉ. मीनाक्षी, जिला अभियोजन पदाधिकारी, लोक अभियोजक एवं सभी अपर लोक अभियोजक मौजूद रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य गंभीर मामलों के त्वरित निष्पादन और न्यायिक प्रक्रिया को गति देना था।
जिलाधिकारी ने समीक्षा के दौरान विशेष रूप से स्पीडी ट्रायल से जुड़े मामलों में तेजी लाने पर जोर दिया। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, पॉक्सो एक्ट और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिल सके।
इसके अलावा, मद्यनिषेध से जुड़े मामलों पर भी विशेष चर्चा की गई। डीएम ने शराब माफिया और आदतन अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा मामलों में ठोस साक्ष्य और प्रभावी पैरवी के माध्यम से दोषियों को सजा दिलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक एवं अन्य पुलिस अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि सभी मामलों में गवाहों की समय पर उपस्थिति हो, ताकि सुनवाई में देरी न हो और न्यायिक प्रक्रिया बाधित न हो।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि प्रशासन का लक्ष्य न्यायिक प्रक्रिया को पारदर्शी, त्वरित और प्रभावी बनाना है। इसके लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
यह बैठक जिले में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और न्यायिक मामलों के त्वरित निष्पादन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।