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13 की उम्र में कमाल: भागलपुर के देवांश गहलोत ने लिखी अपनी पहली किताब, मां की प्रेरणा ने बनाया लेखक

13 साल की उम्र, पहली किताब: भागलपुर के देवांश ने दुनिया को दिखाया अपनी कलम का दम!

Bhagalpur News: कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और माता-पिता का सही मार्गदर्शन मिले, तो उम्र महज एक संख्या बनकर रह जाती है। बिहार के सिल्क सिटी भागलपुर के 13 वर्षीय देवांश गहलोत ने इस बात को सच कर दिखाया है। मात्र कक्षा 8 के छात्र देवांश ने अपनी पहली पुस्तक “Teenhood: A Tempting Disaster” लिखकर न केवल अपने माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा किया है, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है।

कक्षा 6 से शुरू हुआ था शब्दों का सफर

​देवांश की यह उपलब्धि रातों-रात नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि लिखने का शौक उन्हें बचपन से ही था। जब वे कक्षा 3 में थे, तभी से छोटी-छोटी कविताएं और कहानियां बुनने लगे थे। लेकिन एक पूरी किताब लिखने का विचार उन्हें कक्षा 6 में आया। पिछले दो वर्षों की कड़ी मेहनत, कल्पनाशीलता और लगन का परिणाम है कि आज उनकी पुस्तक प्रकाशित होकर बाजार में उपलब्ध है।

कवर से लेकर कंटेंट तक, सब कुछ ‘सेल्फ-मेड’

​देवांश की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी किताब का केवल कंटेंट ही नहीं लिखा, बल्कि उसकी हेडिंग, चैप्टर्स का चुनाव और आकर्षक कवर पेज भी खुद ही डिजाइन किया है। यह एक किशोर की बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है। देवांश ने अपनी इस सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपनी माँ को दिया है।

मां की प्रेरणा और पिता का सहयोग

​देवांश की मां रूपाली (एक गृहिणी) ने शुरुआत से ही अपने बेटे के अंदर छिपे लेखक को पहचान लिया था। उन्होंने देवांश को लगातार इंग्लिश लिटरेचर की बारीकियों को समझने और लिखने के लिए प्रेरित किया। वहीं, देवांश के पिता संजीव कुमार, जो स्वयं एक सरकारी स्कूल में अंग्रेजी के शिक्षक हैं, ने भी अपने बेटे के लेखन कौशल को निखारने में पूरा सहयोग दिया। परिवार का कहना है कि देवांश ने पढ़ाई के साथ-साथ अपने इस जुनून को जिस तरह बैलेंस किया, वह सराहनीय है।

​”मुझे गर्व है कि मेरे बेटे ने अपनी क्रिएटिविटी से समाज को एक संदेश दिया है। उसकी मेहनत और इंग्लिश लिटरेचर के प्रति उसका लगाव ही आज इस पुस्तक के रूप में सामने आया है।” — रूपाली (देवांश की मां)

 

भविष्य का लक्ष्य: न्यूरोसर्जन बनने का सपना

​अक्सर लोग मानते हैं कि लेखक बनने वाले बच्चे विज्ञान से दूर रहते हैं, लेकिन देवांश अलग हैं। उनका सपना एक न्यूरोसर्जन (डॉक्टर) बनना है। देवांश का कहना है कि चिकित्सा के क्षेत्र में करियर बनाने के बावजूद वे अपने लेखन के शौक को कभी नहीं छोड़ेंगे। वे अपनी कलम के जरिए समाज को प्रेरित करना जारी रखेंगे।

युवाओं को संदेश: गहराई से पढ़ना ही सफलता की कुंजी

​अपनी सफलता से उत्साहित देवांश ने अपने हमउम्र साथियों और युवाओं को एक खास संदेश दिया है। उनका कहना है कि:

  • ​किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए उस विषय की गहराई से समझ जरूरी है।
  • ​सिर्फ ऊपर-ऊपर से पढ़ने के बजाय, ज्ञान को आत्मसात करना चाहिए।
  • ​मेहनत और लगन हो तो कोई भी सपना छोटा नहीं होता।
विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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