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बिहार पुलिस की बड़ी छलांग: अगले 2 साल में शुरू होंगी 9 नई फोरेंसिक लैब, अपराधियों की अब खैर नहीं!

हाईटेक होगी बिहार पुलिस: अब घटनास्थल पर ही वैज्ञानिक जुटाएंगे साक्ष्य।

Patna News: बिहार में अब अपराधियों को सजा दिलाना और भी आसान होगा। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने मंगलवार को घोषणा की कि अगले एक से दो वर्षों के भीतर बिहार में 9 नई क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं (FSL) पूरी तरह कार्यरत हो जाएंगी। पटना के सरदार पटेल भवन में आयोजित “सैटेलाइट कॉन्फ्रेंस ऑन बायोलॉजिकल साइंसेज” के उद्घाटन के दौरान उन्होंने बिहार पुलिस के वैज्ञानिक जांच की भविष्य की रूपरेखा साझा की।

 700 से 18,000 मामलों तक का सफर: एफएसएल का विस्तार

​डीजीपी ने बताया कि पिछले दो दशकों में बिहार पुलिस ने बुनियादी सुविधाओं में जबरदस्त विकास किया है। साल 2012-13 में जहां राज्य पुलिस साल भर में केवल 700 से 800 मामलों में ही फोरेंसिक मदद ले पाती थी, वहीं आज यह संख्या बढ़कर 18,000 मामलों तक पहुंच गई है। यह वृद्धि राज्य में न्याय प्रक्रिया को तेज करने और ठोस सबूतों के आधार पर सजा दिलाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

 9 नई क्षेत्रीय लैब और नियुक्तियों की प्रक्रिया तेज

​वर्तमान में बिहार में केवल 4 क्षेत्रीय एफएसएल (पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर) काम कर रहे हैं। डीजीपी ने स्पष्ट किया कि:

  • तैयार है बुनियादी ढांचा: 9 नई क्षेत्रीय एफएसएल की बिल्डिंग्स बनकर तैयार हो चुकी हैं।
  • वैज्ञानिकों की भर्ती: 102 असिस्टेंट डायरेक्टर और सीनियर साइंटिफिक असिस्टेंट की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो गई है, जिससे लैब के संचालन में तेजी आएगी।
  • मोबाइल लैब्स: 28 जिलों में डिस्ट्रिक्ट मोबाइल लैबोरेटरीज (DML) के भवन भी तैयार हैं, जो वैज्ञानिकों की पदस्थापना के बाद ऑन-स्पॉट जांच शुरू कर देंगे।

 ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) के तहत नई चुनौतियां

​नए कानूनों का जिक्र करते हुए विनय कुमार ने कहा कि BNS के तहत अब 7 साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में फोरेंसिक एक्सपर्ट का घटना स्थल पर पहुंचना अनिवार्य कर दिया गया है। इसे देखते हुए राज्य भर में फोरेंसिक नेटवर्क को मजबूत करना प्राथमिकता है।

 पॉक्सो मामलों के लिए DNA लैब की मांग

​पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत डीएनए जांच की बढ़ती अनिवार्यता पर चिंता जताते हुए डीजीपी ने कहा कि राज्य में वर्तमान में केवल एक डीएनए लैब है, जो काफी नहीं है। उन्होंने निर्भया फंड या अन्य केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से बिहार में 3-4 अतिरिक्त डीएनए लैब स्थापित करने के लिए ‘विधि विज्ञान सेवा निदेशालय’ (DFSS) से सहयोग और वित्तीय सहायता का अनुरोध किया।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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