Bhagalpur News: बिहार की सत्ताधारी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) को भागलपुर में एक बड़ा झटका लगा है। जदयू के वरिष्ठ नेता और पार्टी के समर्पित सिपाही माने जाने वाले सुद्दू साईं ने आज सोशल मीडिया के माध्यम से अपने सभी पदों से इस्तीफा देकर प्रदेश नेतृत्व को चौंका दिया है। हैरान करने वाली बात यह है कि आज ही जदयू ने उन्हें प्रदेश सचिव की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन इस आधिकारिक नोटिफिकेशन के जारी होने के चंद घंटों के भीतर ही उन्होंने पार्टी से नाता तोड़ लिया। उनके इस अचानक लिए गए फैसले से भागलपुर जदयू संगठन में खलबली मच गई है।
2010 से 2026: संघर्ष और वफादारी का 16 वर्षों का सफर
सुद्दू साईं ने साल 2010 में जनता दल यूनाइटेड की सदस्यता ग्रहण की थी। इन 16 वर्षों के लंबे सफर में उन्होंने जमीन पर उतरकर पार्टी को मजबूत करने का काम किया।
- साल 2015: सुद्दू साईं ने सुल्तानगंज विधानसभा क्षेत्र से अपनी मजबूत दावेदारी पेश की थी।
- साल 2016: उनके सांगठनिक कौशल को देखते हुए पार्टी ने उन्हें जिला महानगर अध्यक्ष की कमान सौंपी।
- साल 2020: विधानसभा चुनाव में उन्होंने एक बार फिर अपनी उम्मीदवारी पेश की, लेकिन गठबंधन और सियासी समीकरणों के चलते वे टिकट से वंचित रह गए। इसके बावजूद उन्होंने बगावत नहीं की और पार्टी के लिए काम करते रहे।
वादा मिला सम्मानित पद का, मिला प्रदेश सचिव का पद लेकिन…
साल 2020 में टिकट न मिलने के बाद संगठन ने सुद्दू साईं को भरोसा दिलाया था कि 2025 में प्रदेश नेतृत्व उन्हें पार्टी में कोई बड़ा और सम्मानित पद देगा। इसी वादे के तहत साल 2026 में उन्हें राज्य परिषद का सदस्य बनाया गया।
आज (बुधवार) जदयू मुख्यालय द्वारा जारी आधिकारिक सूची में सुद्दू साईं को प्रदेश सचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। उम्मीद जताई जा रही थी कि वे इस पद को संभालकर भागलपुर में पार्टी को नई धार देंगे, लेकिन पद मिलने की खुशी मनाने के बजाय उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपना इस्तीफा सौंप कर सबको हैरान कर दिया।
सांसद अजय मंडल और कहकशां परवीन के माने जाते हैं बेहद करीबी
सुद्दू साईं को भागलपुर की राजनीति में एक कद्दावर चेहरा माना जाता है। भागलपुर के वर्तमान सांसद अजय मंडल और पूर्व राज्यसभा सांसद कहकशां परवीन समेत जदयू के कई मंत्रियों और शीर्ष नेताओं से उनके बेहद मधुर और गहरे संबंध रहे हैं। विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा चुनाव, सुद्दू साईं ने हमेशा फ्रंटफुट पर रहकर पार्टी उम्मीदवारों के पक्ष में जमकर पसीना बहाया और उन्हें ऐतिहासिक जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई।
इस्तीफे के पीछे क्या है वजह?
पार्टी के लिए हमेशा संकटमोचक बनकर खड़े रहने वाले सुद्दू साईं के इस आत्मघाती कदम के पीछे आंतरिक नाराजगी या टिकटों के वितरण को लेकर पुराना असंतोष माना जा रहा है। हालांकि, सुद्दू साईं ने अभी तक खुलकर अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर उनके इस इस्तीफे ने भागलपुर से लेकर पटना तक जदयू के भीतर गुटबाजी और असंतोष की चर्चाओं को एक बार फिर गर्म कर दिया है।
अब देखना यह होगा कि क्या जदयू का शीर्ष नेतृत्व उन्हें मनाने की कोशिश करता है या फिर सुद्दू साईं का यह इस्तीफा भागलपुर में जदयू के लिए एक नए राजनीतिक संकट की शुरुआत है।


