Bhagalpur News: अंग प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान, प्रसिद्ध तीन दिवसीय मनसा पूजा सोमवार को पूरे विधि-विधान और भक्तिमय माहौल के साथ शुरू हो गई। पूजा के पहले ही दिन तड़के से ही प्रमुख मनसा मंदिरों में मां मनसा देवी के दर्शन और पूजन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। ‘जय मां मनसा’ के जयकारों से पूरा परिसर गुंजायमान हो रहा है।
बिहुला-विषहरी की पावन धारा और दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु
अंग क्षेत्र में मनसा पूजा की परंपरा सदियों पुरानी लोकगाथा चांद सौदागर, सती बिहुला और बाला लखेंद्र की अमर अमरकथा से जुड़ी हुई है। यही कारण है कि यह पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान न होकर अंग की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक है।
- विभिन्न राज्यों से आगमन: भागलपुर व आसपास के जिलों के अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां मनसा के दरबार पहुंचे हैं।
- डलिया और मन्नतें: श्रद्धालु अपने परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और आरोग्य की कामना के साथ मां मनसा को पारंपरिक डलिया (पूजन सामग्री की टोकरी) अर्पित कर रहे हैं।
- भव्य मेला: पूजा के साथ ही मंदिर परिसरों के आसपास भव्य मेले का आयोजन किया गया है, जहां विभिन्न प्रकार के स्टॉल, झूले और मनोरंजन के साधन आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन की मुस्तैदी
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए पुलिस-प्रशासन और मंदिर प्रबंधन समिति की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
- सुगम दर्शन व्यवस्था: पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की गई है ताकि दर्शन-पूजन में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
- स्वयंसेवक व पुलिस बल: शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात हैं, साथ ही मंदिर समिति के स्वयंसेवक लगातार भीड़ प्रबंधन में जुटे हैं।
पुजारी, मनसा मंदिर: “सच्चे मन से मां मनसा की पूजा करने और डलिया अर्पित करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। तीन दिनों तक विधि-विधान से विशेष अनुष्ठान और आरती संपन्न होगी।”
विनय लाल (पूर्व पार्षद सह मनसा मंदिर संरक्षक): “अंग जनपद की इस पावन परंपरा को देखने और मां का आशीर्वाद लेने दूर-दूर से लोग आते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए हर संभव व्यवस्था की गई है ताकि किसी को परेशानी न हो।”


