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सिल्क सिटी में चढ़ा पारा, तो याद आया ‘देसी फ्रिज’: भागलपुर में मिट्टी के घड़े और सुराही की भारी मांग

भीषण गर्मी के बीच फ्रिज के ठंडे पानी से तौबा कर रहे लोग, पारंपरिक बर्तनों से मिल रही प्राकृतिक ठंडक और सेहत का साथ।

Bhagalpur News: जैसे-जैसे सूरज की तपिश बढ़ रही है और सिल्क सिटी भागलपुर का पारा चढ़ रहा है, वैसे-वैसे लोगों की जीवनशैली में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कंक्रीट के जंगलों और आधुनिक गैजेट्स के दौर में, भागलपुर के लोग एक बार फिर अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं। शहर के बाजारों में इन दिनों मिट्टी के घड़े और सुराही की मांग में जबरदस्त उछाल आया है।

बाजारों में बढ़ी रौनक, ‘घंटाघर’ बना मुख्य केंद्र

​शहर के हृदय स्थल घंटाघर के समीप मिट्टी के बर्तनों की दुकानों पर सुबह से शाम तक ग्राहकों की कतारें देखी जा रही हैं। स्थानीय दुकानदारों के चेहरे पर मुस्कान है क्योंकि सालों बाद मिट्टी के इन बर्तनों का क्रेज इतना अधिक बढ़ा है।

​दुकानदार दीपक कुमार बताते हैं:

“पिछले कुछ दिनों से बिक्री में 40-50% का इजाफा हुआ है। लोग अब फैंसी फ्रिज के बजाय मिट्टी की सोंधी खुशबू वाला ठंडा पानी पसंद कर रहे हैं। शाम के समय ग्राहकों की इतनी भीड़ होती है कि स्टॉक कम पड़ने लगा है।”

 

क्यों लोग छोड़ रहे हैं फ्रिज और अपना रहे हैं घड़ा?

​फ्रिज का पानी गला खराब कर सकता है, लेकिन मिट्टी के घड़े का पानी स्वास्थ्य के लिए वरदान माना जाता है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं:

  • प्राकृतिक शीतलन: मिट्टी के छिद्रों से होने वाले वाष्पीकरण के कारण पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है।
  • संतुलित pH लेवल: मिट्टी की प्रकृति क्षारीय (Alkaline) होती है, जो पानी के अम्लीय (Acidic) गुणों को खत्म कर शरीर का pH बैलेंस बनाए रखती है।
  • पाचन में सुधार: घड़े का पानी मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है और पेट की बीमारियों से राहत देता है।
  • किफायती विकल्प: महज 100 से 300 रुपये में मिलने वाला यह ‘देसी फ्रिज’ हर वर्ग की जेब के अनुकूल है।

कुम्हारों के चेहरे खिले, पारंपरिक कला को मिला नया जीवन

​बढ़ती मांग ने न केवल पर्यावरण को फायदा पहुँचाया है, बल्कि स्थानीय कुम्हारों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार किया है। प्लास्टिक और स्टील के बर्तनों के बढ़ते चलन के बीच इस व्यवसाय पर संकट मंडरा रहा था, लेकिन इस साल की गर्मी ने पारंपरिक मिट्टी शिल्प को संजीवनी दे दी है।

 स्वास्थ्य और संस्कृति का संगम

​भागलपुर में मिट्टी के बर्तनों की यह वापसी केवल एक मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान का भी प्रतीक है। कम लागत और जीरो मेंटेनेंस वाला यह प्राकृतिक तरीका आज के आधुनिक युग में भी सबसे प्रभावी साबित हो रहा है।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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