अधिकारों को लेकर पार्षदों और मेयर-उपमेयर के बीच तीखी बहस, आपत्तिजनक टिप्पणियों से नाराज होकर दोनों ने छोड़ी बैठक; शहर के विकास कार्यों पर चर्चा के बीच गरमाया माहौल।
Bhagalpur News: भागलपुर नगर निगम की सामान्य बोर्ड समिति की बैठक में उस वक्त भारी हंगामा देखने को मिला, जब मेयर और उपमेयर के अधिकारों को लेकर पार्षदों के बीच विवाद शुरू हो गया। बैठक के दौरान हुई तीखी बहस और कुछ पार्षदों की कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों से नाराज होकर मेयर डॉ. वसुंधरा लाल और उपमेयर डॉ. सलाउद्दीन हसन ने बैठक का बहिष्कार कर दिया और सभागार से निकलकर अपने-अपने चेंबर में चले गए। इस घटनाक्रम के बाद नगर निगम परिसर में काफी देर तक गहमागहमी बनी रही।
दरअसल, नगर निगम सभागार में सामान्य बोर्ड समिति की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में शहर के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों के साथ-साथ साफ-सफाई, स्वच्छता प्रबंधन, जनहित की योजनाओं और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने जैसे विषयों पर चर्चा होनी थी। बैठक से शहरवासियों को कई अहम फैसलों की उम्मीद थी, लेकिन एजेंडे पर चर्चा शुरू होने के बीच ही मेयर, उपमेयर और पार्षदों के अधिकारों को लेकर बहस छिड़ गई।
देखते ही देखते बहस ने विवाद का रूप ले लिया। कुछ पार्षदों की टिप्पणियों से नाराज मेयर डॉ. वसुंधरा लाल और उपमेयर डॉ. सलाउद्दीन हसन ने बैठक में आगे शामिल होने से इनकार कर दिया और सभागार छोड़कर अपने चेंबर में चले गए। दोनों के बैठक से बाहर निकलने के बाद वहां मौजूद पार्षदों और अन्य लोगों के बीच भी इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
हालांकि, बैठक को बीच में बाधित होते देख कुछ पार्षदों ने पहल की। उन्होंने शहर के विकास और आम जनता से जुड़े मुद्दों का हवाला देते हुए मेयर और उपमेयर को समझाया। पार्षदों ने आग्रह किया कि आपसी मतभेद को अलग रखते हुए बैठक की कार्यवाही पूरी की जाए, ताकि शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हो सके।
पार्षदों के समझाने और आग्रह करने के बाद मेयर और उपमेयर दोबारा बैठक में शामिल होने के लिए तैयार हो गए। दोनों के वापस लौटने के बाद बैठक की कार्यवाही फिर से शुरू हुई।
वहीं, इस पूरे मामले पर मेयर डॉ. वसुंधरा लाल और उपमेयर डॉ. सलाउद्दीन हसन ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि बैठक के दौरान कुछ पार्षदों ने उनके अधिकारों को लेकर अनुचित बातें कहीं, जिससे वे आहत हुए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की टिप्पणियों से उन्हें आपत्ति थी, इसी वजह से उन्होंने बैठक छोड़ने का फैसला लिया था। हालांकि, शहर के विकास और जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देते हुए वे दोबारा बैठक में शामिल हुए।
नगर निगम की इस बैठक में हुए घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जनप्रतिनिधियों के बीच आपसी समन्वय और संवाद कितना जरूरी है। क्योंकि नगर निगम की बैठकों में होने वाले फैसलों का सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था, विकास योजनाओं और आम नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं पर पड़ता है।
अब देखना होगा कि बैठक में सामने आए मतभेदों के बावजूद नगर निगम के जनप्रतिनिधि आपसी तालमेल के साथ शहर के विकास से जुड़े मुद्दों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।


