Bhagalpur News: विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा क्या क्षतिग्रस्त हुआ, भागलपुर की पूरी परिवहन व्यवस्था और अर्थव्यवस्था मानो वेंटिलेटर पर आ गई है। इस संकट का सबसे बड़ा और भयावह असर भागलपुर के सरकारी बस स्टैंड पर देखने को मिल रहा है। जो बस स्टैंड कभी 24 घंटे यात्रियों की गहमागहमी और बसों के हॉर्न से गूंजता था, वहां आज सिर्फ खामोशी और वीरानी नजर आ रही है।
थम गई कोसी-सीमांचल और बंगाल जाने वाली बसों की रफ्तार
सरकारी बस स्टैंड से प्रतिदिन दर्जनों बसें विक्रमशिला सेतु होकर पूर्णिया, कटिहार, बेगूसराय, मधेपुरा और पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक जाती थीं। पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद इन सभी रूटों पर बसों का परिचालन लगभग ठप हो गया है। इक्का-दुक्का बसें जो चल भी रही हैं, उन्हें काफी लंबे और घुमावदार रास्तों से जाना पड़ रहा है, जिससे समय और किराया दोनों बढ़ गया है। परिणाम स्वरूप, यात्रियों ने बस स्टैंड आना लगभग बंद कर दिया है।
व्यापारियों का छलका दर्द: ‘कोरोना से भी बुरा दौर’
बस स्टैंड की रौनक खत्म होने का सबसे सीधा प्रहार यहाँ के स्थानीय दुकानदारों पर पड़ा है। बस स्टैंड परिसर में होटल, चाय-पान की दुकान और जनरल स्टोर चलाने वाले दुकानदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
स्थानीय दुकानदार पंकज चौधरी ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि, “हमने कोरोना काल की मंदी देखी है, लेकिन यह स्थिति उससे भी ज्यादा भयानक है। कोरोना में कम से कम उम्मीद तो थी, लेकिन यहाँ तो लाइफलाइन (पुल) ही टूट गई है। सुबह से शाम हो जाती है, पर बोहनी तक के लाले पड़े हैं। ग्राहक नदारद हैं और दुकान खोलना अब बोझ लगने लगा है।”
यात्री हो रहे हैं हलकान, वैकल्पिक रास्तों में जेब हो रही ढीली
पुल बाधित होने से केवल दुकानदार ही नहीं, बल्कि आम यात्री भी पिस रहे हैं। जरूरी काम से बाहर जाने वाले लोगों को अब ऊँचे दामों पर छोटी गाड़ियाँ या फिर नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। कई यात्री ट्रेन के भरोसे हैं, लेकिन वहां भी भारी भीड़ के कारण बुरा हाल है। सरकारी बस सेवा ठप होने से आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
प्रशासन से शीघ्र समाधान की गुहार
बस स्टैंड से जुड़े कर्मचारी और व्यापारियों का कहना है कि अगर जल्द ही यातायात की कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था या पुल की मरम्मत नहीं हुई, तो यहाँ के सैकड़ों परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो जाएगी। भागलपुर का यह महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र अब सरकारी उपेक्षा और कुदरती मार के बीच सिसक रहा है।


