Bhagalpur News: भागलपुर जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा को लेकर विशेष तैयारी शुरू की है। बाढ़ प्रभावित और संभावित रूप से प्रभावित इलाकों में गर्भवती महिलाओं को चिन्हित कर उन्हें समय रहते सुरक्षित स्थानों और नजदीकी स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने की पहल की जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें और आशा कार्यकर्ता प्रभावित इलाकों में घर-घर संपर्क कर गर्भवती महिलाओं की जानकारी जुटा रहे हैं। महिलाओं की प्रसव की संभावित तिथि (EDD), गर्भावस्था की स्थिति और जोखिम के संकेतों को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता तय की जा रही है।
प्रसव की तारीख नजदीक तो पहले अस्पताल पहुंचाने पर जोर
बाढ़ के दौरान सबसे बड़ी चुनौती अचानक प्रसव पीड़ा शुरू होने पर महिला को अस्पताल तक पहुंचाने की होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिन गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी की संभावित तारीख नजदीक है, उन्हें बाढ़ का पानी बढ़ने या सड़क संपर्क बाधित होने से पहले सुरक्षित रूप से स्वास्थ्य संस्थान तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
विशेष रूप से उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को चिन्हित कर उन्हें सुरक्षित संस्थागत प्रसव के लिए पहले से अस्पताल में भर्ती कराने या आवश्यकतानुसार दूसरे स्वास्थ्य संस्थान में स्थानांतरित करने की व्यवस्था पर जोर दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने टीमों को किया अलर्ट
इस अभियान में चिकित्सा पदाधिकारी, अस्पताल प्रबंधन, आशा कार्यकर्ता और अन्य स्वास्थ्यकर्मी आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार परिवहन और रेफरल व्यवस्था को भी सक्रिय रखने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि आपात स्थिति में किसी भी गर्भवती महिला को अस्पताल पहुंचने में देरी न हो। इसके लिए प्रभावित क्षेत्रों में महिलाओं की स्थिति पर लगातार नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल रेफर करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
गर्भवती महिलाओं से अंतिम समय तक इंतजार नहीं करने की अपील
स्वास्थ्य विभाग ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से अपील की है कि यदि प्रसव की संभावित तारीख नजदीक है तो अंतिम समय तक घर पर इंतजार न करें। समय रहते आशा कार्यकर्ता या नजदीकी स्वास्थ्यकर्मी से संपर्क कर सुरक्षित संस्थागत प्रसव की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का स्पष्ट संदेश है कि बाढ़ के दौरान मां और बच्चे की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संभावित जोखिम को पहले ही कम किया जाए।
“बाढ़ के बीच जोखिम नहीं, समय पर सुरक्षित संस्थागत प्रसव ही मां और शिशु की पहली सुरक्षा है।”


