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भागलपुर में ‘गैस’ का संकट: आधुनिक किचन से गायब हुआ सिलेंडर, होटलों में फिर धधकने लगे कोयले के चूल्हे

एलपीजी की किल्लत ने बिगाड़ा स्वाद का गणित; मिठाई दुकानों और रेस्टोरेंट में घटा उत्पादन, धुएं के बीच काम करने को मजबूर कारीगर

Bhagalpur News: सिल्क सिटी भागलपुर इन दिनों एक अजीबोगरीब संकट से जूझ रही है। रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत ने शहर के होटल और रेस्टोरेंट कारोबार की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि कभी आधुनिक गैस बर्नर पर पकने वाले व्यंजन अब पुराने दौर की तरह कोयले और लकड़ी के चूल्हों पर पकाए जा रहे हैं। गैस सिलेंडर न मिलने की वजह से बाजार में ‘पुराने दिन’ लौट आए हैं, लेकिन यह बदलाव प्रगति नहीं बल्कि मजबूरी का प्रतीक है।

​ मिठाई की दुकानों पर ‘कोयले’ का तड़का

​भागलपुर अपनी लजीज मिठाइयों के लिए मशहूर है, लेकिन गैस संकट ने हलवाइयों की कड़ाही ठंडी कर दी है।

  • ​उत्पादन में गिरावट: गैस की कमी के कारण छेना, खोया और अन्य मिठाइयों के निर्माण में भारी गिरावट आई है। कोयले के चूल्हे पर आंच धीमी होने के कारण मिठाई बनने में दोगुना समय लग रहा है।
  • ​ग्राहकों की नाराजगी: डिमांड के मुकाबले सप्लाई कम होने से कई दुकानों पर दोपहर होते-होते स्टॉक खत्म हो जा रहा है।

​ धुएं और कालीख के बीच काम करने की मजबूरी

​रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि उन्होंने लाखों रुपये खर्च कर किचन को ‘स्मोक-फ्री’ (धुआं रहित) बनाया था, लेकिन अब मजबूरी में फिर से कोयले का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। इससे न केवल कारीगरों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है, बल्कि बर्तन और किचन की दीवारें भी काली हो रही हैं।

​ होटल स्टाफ का दर्द: “काम करना हुआ दूभर”

​गैस संकट का सबसे सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ रहा है जो घंटों चूल्हे के सामने खड़े रहते हैं। गैस बर्नर को एक बटन से नियंत्रित किया जा सकता था, लेकिन कोयले की आग को संभालना और धुएं के बीच आंखें बचाकर काम करना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

​प्रमुख बिंदु: एक नज़र में

समस्या

प्रभाव

गैस आपूर्ति

कई दिनों से कमर्शियल सिलेंडर की भारी किल्लत।

वैकल्पिक साधन

कोयला और लकड़ी के चूल्हों का बढ़ता उपयोग।

कारोबार पर असर

मिठाई और भोजन के उत्पादन में 30-40% की कमी।

स्वास्थ्य चिंता

धुएं के कारण किचन स्टाफ को सांस लेने में दिक्कत।

क्या कहते हैं होटल कर्मी?

​होटल स्टाफ छोटू कुमार ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया:

​“गैस नहीं मिलने से हमें बहुत दिक्कत हो रही है। सुबह से कोयला सुलगाने में ही घंटों निकल जाते हैं। कोयले की आंच पर खाना देर से बनता है, जिससे ग्राहक नाराज होकर चले जाते हैं। धुएं की वजह से आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ होती है, लेकिन काम तो करना ही है।”

निष्कर्ष: जल्द समाधान की दरकार

​शहर के कारोबारियों का कहना है कि अगर गैस की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई, तो कई छोटे रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर पहुँच जाएंगे। प्रशासन और गैस एजेंसियों को इस दिशा में तुरंत ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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