Bhagalpur News: भागलपुर जिले का सबौर प्रखंड इस समय एक बेहद गंभीर और साइलेंट हेल्थ क्राइसिस (स्वास्थ्य संकट) से जूझ रहा है। सबौर के भिट्ठी स्वास्थ्य केंद्र में हाल ही में एक विशेष कैंसर जांच शिविर का आयोजन किया गया, जिसने इलाके की डरावनी हकीकत को एक बार फिर सामने ला दिया है। इस शिविर में कुल 27 संभावित कैंसर पीड़ितों की गहन स्वास्थ्य जांच की गई। शिविर का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में तेजी से पैर पसार रही इस जानलेवा बीमारी की समय रहते पहचान करना और मरीजों को उच्च स्तरीय इलाज के लिए सही दिशा निर्देश देना था।
चिंताजनक रूप से बढ़ रहा मौत का आंकड़ा, पत्र लिखने के बाद लगा शिविर
शिविर के दौरान मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने सुलतानपुर-भिट्ठी क्षेत्र की भयावह स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। अधिकारियों और जागरूक कर्मियों के मुताबिक, इस पूरे बेल्ट में कैंसर के मरीजों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखी जा रही है। सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि यहां कैंसर के कारण होने वाली मौतों का ग्राफ भी लगातार ऊपर जा रहा है। इस गंभीर और जानलेवा स्थिति को भांपते हुए पहले स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों को पत्र लिखकर यहां विशेष टीम भेजने और कैंप लगाने की गुहार लगाई गई थी, जिसके बाद इस शिविर का रास्ता साफ हुआ।
सिर्फ इलाज काफी नहीं, पानी और मिट्टी की हो वैज्ञानिक जांच!
कार्यक्रम के दौरान यह मांग पुरजोर तरीके से उठी कि केवल मरीजों की पहचान और उनका इलाज कर देना ही इस गंभीर समस्या का स्थाई समाधान नहीं है। आखिर क्या वजह है कि एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र (सुलतानपुर-भिट्ठी) में ही इतनी बड़ी आबादी कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की गिरफ्त में आ रही है? स्थानीय विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि कहीं न कहीं इस इलाके के भूगर्भ जल (Groundwater), मिट्टी या पर्यावरण में कोई ऐसा जानलेवा तत्व या भारी धातु (जैसे आर्सेनिक या यूरेनियम) तो नहीं घुल गया है, जो लोगों को बीमार कर रहा है। इसलिए सरकार से मांग की गई है कि पर्यावरण और जल जांच टीम भेजकर इसकी उच्च स्तरीय वैज्ञानिक जांच कराई जाए।
पीड़ित परिवारों को मुआवजा और आर्थिक राहत देने की मांग
कैंसर न सिर्फ इंसान की जान लेता है, बल्कि पूरे परिवार को आर्थिक रूप से भी तबाह कर देता है। भिट्ठी में इस बीमारी के कारण कई घरों के कमाऊ सदस्य दुनिया छोड़ चुके हैं। इसे देखते हुए सरकार और जिला प्रशासन से यह मांग की गई है कि इस क्षेत्र में कैंसर के कारण जान गंवाने वाले लोगों के आश्रित परिवारों को उचित सरकारी मुआवजा और आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि उनके सामने भरण-पोषण का संकट खड़ा न हो।
अब सरकार और प्रशासन के रुख पर टिकी सबकी निगाहें
भिट्ठी स्वास्थ्य केंद्र में लगे इस कैंप ने स्वास्थ्य महकमे के लिए एक बड़ा अलार्म बजा दिया है। अब सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यही है कि क्या स्वास्थ्य विभाग इस कैंप के बाद गहरी नींद से जागेगा? क्या भिट्ठी और सुलतानपुर के पानी की जांच के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे? इलाके की जनता अब प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई का बेसब्री से इंतजार कर रही है।
मामले पर क्या बोले जिम्मेदार?
1. निशांत आजाद (सदर अस्पताल कर्मी):
”इलाके में कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे थे, जिसके बाद विशेष पत्राचार कर इस शिविर का आयोजन कराया गया ताकि मरीजों की समय पर स्क्रीनिंग हो सके। स्थिति वाकई चिंताजनक है और इस पर बड़े स्तर पर काम करने की जरूरत है।”
2. सुनील कुमार चौधरी (मुखिया, ग्राम पंचायत भिट्ठी):
”हमारे पंचायत और आसपास के क्षेत्रों में कैंसर से कई मौतें हो चुकी हैं। हमारी सरकार से पुरजोर मांग है कि यहां के पानी और पर्यावरण की वैज्ञानिक जांच कराई जाए ताकि बीमारी की जड़ का पता चल सके। साथ ही, मृतक के परिवारों को मुआवजा मिलना चाहिए।”
3. रेखा देवी (स्थानीय पीड़िता/ग्रामीण):
”गांव के लोग बहुत डरे हुए हैं। हर थोड़े दिन में किसी न किसी को कैंसर होने की बात सामने आती है। सरकार को हमारे पीने के पानी की जांच करानी चाहिए और बीमार लोगों के इलाज की मुफ्त व्यवस्था करनी चाहिए।”


