Bhagalpur News: भागलपुर के नाथनगर प्रखंड परिसर स्थित आईसीडीएस (ICDS) कार्यालय में बीते शुक्रवार को मासिक बैठक के दौरान भारी हंगामा और हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। भतौड़िया गंगा प्रसाद स्थित केंद्र संख्या 42 की आंगनवाड़ी सेविका सरिता देवी ने विभाग में चल रहे रिश्वतखोरी के खेल को बेनकाब करने के लिए महिला पर्यवेक्षिका (LS) ममता कुमारी का रिश्वत लेते हुए वीडियो बना लिया। वीडियो बनते देख एलएस ने सेविका का हाथ मरोड़कर जबरन मोबाइल छीन लिया। साक्ष्य मिटाने के लिए मोबाइल का सारा डाटा डिलीट और फैक्ट्री रीसेट करने के 24 घंटे बाद फोन वापस लौटाया गया।
पोषाहार और अंडे के नाम पर ‘महीने की बंधी है घूस’
पीड़ित सेविका सरिता देवी ने विभाग के अधिकारियों की पोल खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। सेविका के अनुसार, नाथनगर की सीडीपीओ (CDPO) और एलएस (LS) की मिलीभगत से कार्यालय में खुलेआम रिश्वतखोरी का धंधा फल-फूल रहा है।
रिश्वत का पूरा खेल:
- पोषाहार के नाम पर वसूली: हर महीने की मासिक बैठक में सभी सेविकाओं से पोषाहार क्लियर करने के एवज में 3,000 रुपये की अवैध रकम वसूली जाती है।
- अंडा नहीं खिलाने की घूस: बच्चों के मीनू से अंडा हटाने या नहीं खिलाने के नाम पर अलग से 1,000 रुपये प्रति महीने रिश्वत ली जाती है।
- अधिकारियों की धमकी: बैठक खत्म होते ही अधिकारी एक-एक कर पैसे कलेक्ट करते हैं और कहते हैं कि यह पैसा ‘ऊपर तक के अधिकारियों’ को देना पड़ता है। जो पैसे नहीं देतीं, उनके वाउचर पर साइन नहीं किया जाता और कोई न कोई कमी निकालकर स्पष्टीकरण (Explanation) थमा दिया जाता है।
150 सेविकाओं के सामने आत्मसम्मान का हनन
सेविका सरिता देवी ने रोते हुए कहा कि करीब 150 सेविकाओं की मौजूदगी में उनके साथ बदसलूकी की गई और उनका मोबाइल छीना गया। उन्होंने कहा, “हमें सरकार से बेहद कम मानदेय मिलता है, फिर भी हम काम करते हैं। इन बड़े अधिकारियों को मोटा वेतन मिलता है, इसके बावजूद मासूम बच्चों के निवाले में से घूस मांगी जाती है। घूसखोरी के कारण जब बच्चों को पूरी सामग्री नहीं मिल पाती, तो हमें ग्रामीणों का आक्रोश झेलना पड़ता है। हम न्याय के लिए जहां जाना होगा, वहां जाएंगे।”
साक्ष्य मिटाने के लिए फोन को किया ‘फैक्ट्री रीसेट’
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर सेविका का फोन 24 घंटे तक क्यों दबाकर रखा गया? आईसीडीएस के सूत्रों के मुताबिक, मोबाइल से रिश्वतखोरी का वीडियो और सारा पर्सनल डाटा पूरी तरह डिलीट कर दिया गया। फोन को पूरी तरह फैक्ट्री रीसेट करने के बाद उसमें आईसीडीएस का सॉफ्टवेयर दोबारा लोड करके सेविका को वापस दिया गया, ताकि रिश्वत का कोई सबूत न बचे। वहीं, एक ऑपरेटर भी इस मामले को रफा-दफा करने और सेविका के परिवार पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने में जुटा है।
मामले पर क्या है जिम्मेदारों का कहना?
अनुपमा कुमारी (डीपीओ, भागलपुर)
“समाचार पत्र के माध्यम से यह पूरा मामला मेरे संज्ञान में आया है। इससे पहले किसी भी सेविका ने पैसे के लेनदेन की शिकायत मुझसे कभी नहीं की थी। हम संबंधित सेविका से पूछताछ कर रहे हैं। यदि एलएस द्वारा गड़बड़ी करने या रिश्वत लेने की बात सत्य पाई जाती है, तो उनके विरुद्ध सुनिश्चित और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
सफाई: ममता कुमारी (एलएस)
महिला पर्यवेक्षिका ममता कुमारी ने अपने ऊपर लगे पैसे के लेनदेन के आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है। उन्होंने सफाई में कहा कि मोबाइल सिर्फ इसलिए लिया गया था क्योंकि वह वीडियो बना रही थीं। उन्होंने कहा, “यदि कोई हमारी वीडियो या फोटो लेगा, तो क्या हम लेने देंगे?”
सीडीपीओ ने नहीं उठाया फोन, थाने और बीडीओ से होगी शिकायत
इस गंभीर मामले पर पक्ष जानने के लिए जब नाथनगर सीडीपीओ को कई बार फोन मिलाया गया, तो उन्होंने एक बार भी कॉल रिसीव नहीं किया। उधर, पीड़ित सेविका ने स्थानीय थाना और प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को लिखित आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाने की बात कही है। सेविका के पति के अनुसार, उन पर बड़े अधिकारियों द्वारा मामले को दबाने का लगातार दबाव बनाया जा रहा है। अब देखना यह है कि भागलपुर जिलाधिकारी (DM) इस भ्रष्टाचार के नेटवर्क पर क्या एक्शन लेते हैं।


