Bhagalpur News: भागलपुर जिले की पहचान अब सिर्फ रेशमी धागों तक सीमित नहीं रहेगी। भागलपुर अब मछली उत्पादन के क्षेत्र में बिहार का नेतृत्व करने को तैयार है। समीक्षा भवन में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने जिले को मत्स्य पालन में आत्मनिर्भर बनाने के संकल्प को दोहराते हुए लाभार्थियों के बीच आधुनिक किट और संसाधनों का वितरण किया।
मुख्यमंत्री मत्स्य विपणन योजना: 121 लाभार्थियों की बदली किस्मत
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मत्स्य विपणन योजना के तहत कुल 121 मछुआरों और पशुपालकों को सहायता प्रदान की गई। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य मछुआरों को बिचौलियों से बचाना और उन्हें तकनीक से जोड़ना है। वितरण किए गए उपकरणों में शामिल हैं:
- आधुनिक किट: बड़ी हांडी, जाल और सटीक माप के लिए वेइंग मशीन।
- कोल्ड स्टोरेज की सुविधा: छोटे फ्रीजर दिए गए हैं ताकि मछलियां खराब न हों और मछुआरों को मजबूरी में कम दाम पर माल न बेचना पड़े।
- ट्रांसपोर्टेशन सपोर्ट: ज्यादा उत्पादन करने वाले मछुआरों को ऑटो दिए गए हैं, जिससे वे सीधे बाजार तक अपनी पहुंच बना सकें।
बिहपुर में 50 लाख की आधुनिक हैचरी: अब नहीं होगी बीज की किल्लत
भागलपुर के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि बिहपुर में विकसित की गई आधुनिक हैचरी है। जिलाधिकारी ने बताया कि लगभग 50 लाख रुपये की लागत से तैयार इस प्लांट में उच्च गुणवत्ता वाले मछली बीज तैयार किए जा रहे हैं।
”अब भागलपुर के किसानों को मछली बीज (Seed) के लिए आंध्र प्रदेश या पश्चिम बंगाल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। हम खुद का क्वालिटी बीज तैयार कर रहे हैं, जिससे लागत घटेगी और मुनाफा बढ़ेगा।” — डॉ. नवल किशोर चौधरी, DM
सुरक्षा और ट्रेनिंग पर विशेष जोर
नदियों के उफान और गहरे पानी में काम करने वाले मछुआरों की जान की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने लाइफ जैकेट और नई नावों की खरीद पर भारी सब्सिडी देने का प्रावधान किया है। साथ ही, जिले में नए तालाबों का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है और मत्स्य पालकों को वैज्ञानिक पद्धति से पालन करने की विशेष ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
आर्थिक विकास का नया मॉडल
प्रशासन का लक्ष्य स्पष्ट है—मछली पालन को केवल एक पारंपरिक व्यवसाय से निकालकर एक व्यावसायिक मॉडल बनाना। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा, बल्कि भागलपुर से मछलियों का निर्यात दूसरे राज्यों में भी किया जा सकेगा।


