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भागलपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर हुंकार: व्यवहार न्यायालय से निकली भव्य जागरूकता रैली, 9 मई को होगा ऐतिहासिक समाधान

​"मुकदमेबाजी से पाना है छुटकारा? तो भागलपुर सिविल कोर्ट पहुंचे! 9 मई को नेशनल लोक अदालत में होगा ऑन-स्पॉट समाधान।"

Bhagalpur News: आम लोगों को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से भागलपुर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (DLSA) ने कमर कस ली है। आगामी 9 मई को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत की सफलता सुनिश्चित करने और जनता के बीच अलख जगाने के लिए आज मंगलवार को व्यवहार न्यायालय (सिविल कोर्ट) परिसर से एक विशाल जागरूकता रैली निकाली गई।

जिला जज ने दिखाई हरी झंडी

​जागरूकता रैली को भागलपुर के जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस मौके पर न्यायालय के कई वरिष्ठ न्यायिक पदाधिकारी, प्राधिकार के सचिव, अधिवक्ता और बड़ी संख्या में कोर्ट कर्मी शामिल हुए। यह रैली हाथों में तख्तियां और बैनर लिए शहर के विभिन्न व्यस्त मार्गों, चौकों और चौराहों से गुजरी। रैली के माध्यम से लोगों को ‘हर जोर-जुल्म की टक्कर में, लोक अदालत है टक्कर में’ और ‘आपसी सुलह से न्याय’ जैसे संदेश दिए गए।

किन मामलों का होगा मौके पर निपटारा?

​9 मई को आयोजित होने वाली लोक अदालत में हजारों लंबित मामलों के निपटारे का लक्ष्य रखा गया है। प्राधिकार के अधिकारियों के अनुसार, इस विशेष शिविर में वैसे मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी जो सुलह योग्य हैं और दोनों पक्ष आपसी सहमति से समाधान चाहते हैं।

प्रमुख मामले:

  1. बैंक रिकवरी: बैंक ऋण और चेक बाउंस (NI Act) से जुड़े मामले।
  2. पारिवारिक विवाद: पति-पत्नी के बीच चल रहे विवाद (Matrimonial/Family disputes) और भरण-पोषण (Maintenance) के केस।
  3. जमीन विवाद: राजस्व और भूमि अधिग्रहण से संबंधित दीवानी मामले।
  4. श्रम विवाद: मजदूरी और कर्मचारी हर्जाने से जुड़े केस।
  5. विद्युत/पानी: बिजली और पानी के बिलों से संबंधित समझौते।
  6. अन्य: फौजदारी के शमनीय अपराध, बीमा क्लेम, सड़क दुर्घटना के मामले और लंबित दीवानी वाद।

लोक अदालत के फायदे: ‘जीतो भी, जीतें हम’

​जागरूकता रैली के दौरान प्राधिकार के सचिव ने आम जनता से अपील की कि वे इस अवसर का भरपूर लाभ उठाएं। लोक अदालत में मामले सुलझाने के निम्नलिखित प्रमुख फायदे हैं:

  • कोई कोर्ट फीस नहीं: लोक अदालत में मामला दायर करने पर कोई कोर्ट फीस नहीं लगती।
  • त्वरित न्याय: सालों से लंबित मामलों का कुछ ही मिनटों में निपटारा होता है।
  • अंतिम निर्णय: लोक अदालत का फैसला सिविल कोर्ट के डिक्री के समान ही मान्य होता है और इसके खिलाफ कहीं भी अपील नहीं की जा सकती।
  • संबंधों में सुधार: आपसी सहमति से समझौता होने के कारण दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट खत्म होती है और आपसी संबंध बेहतर होते हैं।
विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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