Bhagalpur News: बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन के लिए राज्य स्तर पर चल रही रणनीति को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से भागलपुर में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला उप श्रमायुक्त कार्यालय, भागलपुर प्रमंडल के सभागार में आयोजित हुई, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों और गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यशाला का आयोजन Labour Resources and Migrant Workers Welfare Department Bihar द्वारा राज्य रणनीति एवं कार्य योजना 2025 के अंतर्गत किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन के लिए सभी हितधारकों को संवेदनशील बनाना और उनकी क्षमता को मजबूत करना था।
इस अवसर पर उप श्रमायुक्त Sudhanshu Kumar, सहायक श्रमायुक्त Nikhil Ranjan तथा श्रम अधीक्षक Kumar Nalinikant उपस्थित रहे। कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, समाज कल्याण विभाग, जिला बाल संरक्षण इकाई, बाल कल्याण समिति के सदस्य तथा गैर-सरकारी संगठन भी शामिल हुए।
बाल श्रम रोकने के लिए समन्वित कार्रवाई पर जोर
कार्यशाला के दौरान सहायक श्रमायुक्त ने बाल एवं किशोर श्रम उन्मूलन के लिए तैयार की गई राज्य रणनीति एवं कार्य योजना 2025 पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि बाल श्रम की समस्या को समाप्त करने के लिए स्रोत, पारगमन और गंतव्य तीनों स्तरों पर विभागों के बीच बेहतर समन्वय और प्रभावी कार्य प्रणाली अपनाने की आवश्यकता है।
दोषी नियोजकों पर होगी सख्त कार्रवाई
अधिकारियों ने बताया कि बाल श्रम की कुप्रथा में संलिप्त पाए जाने वाले नियोजकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जाती है और M. C. Mehta vs State of Tamil Nadu मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार उनसे ₹20,000 की राशि वसूली जाती है। इसके अलावा न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 सहित अन्य श्रम कानूनों के तहत भी कार्रवाई की जाती है।
मुक्त बाल श्रमिकों को दी जाती है आर्थिक सहायता
बाल श्रमिकों को मुक्त कराने के बाद उन्हें तत्काल सहायता के रूप में ₹3,000 की आर्थिक मदद दी जाती है, जबकि मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹25,000 की राशि सावधि जमा के रूप में प्रदान की जाती है, ताकि उनके पुनर्वास और शिक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।
भागलपुर और बांका की स्थिति
कार्य योजना 2025 के प्रतिवेदन के अनुसार भागलपुर जिला बाल श्रम की मध्यम श्रेणी में आता है, जबकि Banka जिला उच्च श्रेणी में चिन्हित किया गया है। इस स्थिति को सुधारने के लिए सभी विभागों को मिलकर काम करने की आवश्यकता बताई गई।
विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी तय
कार्य योजना के तहत श्रम संसाधन विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है, जो छापामार दल के माध्यम से बाल श्रमिकों को मुक्त कराने का कार्य करेगा। वहीं समाज कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को भी अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों से सुझाव भी लिए गए, ताकि बाल श्रम उन्मूलन के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का समापन किया गया।


