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अबला से ‘सबला’ बनेंगी विधवा, परित्यक्ता और दिव्यांग महिलाएं, क्लस्टर बनाकर खुद का रोजगार शुरू

​"मजदूर नहीं, मालकिन बनेंगी बेसहारा महिलाएं; जीवन जागृति सोसाइटी की इस अनूठी पहल से बदलेगी अंगारी और बलुआ चक की सूरत।"

Bhagalpur News: समाज के सबसे वंचित और बेसहारा तबके को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ‘जीवन जागृति सोसाइटी’ ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। सोसाइटी ने समाज में सिर्फ जागरूकता फैलाने का काम नहीं किया, बल्कि अब समृद्धि की ओर सीधे कदम बढ़ा दिए हैं। संस्था ने विधवा, परित्यक्ता (पति द्वारा छोड़ी गई) और दिव्यांग महिलाओं को एक मंच पर लाकर उनके लिए रोजगार सृजन (Employment Generation) का एक बड़ा क्लस्टर मॉडल तैयार किया है।

झिझक मिटाने के लिए अनोखी पहल: 8 विधवा और 4 शादीशुदा महिलाओं का बना ग्रुप

​इस मुहिम की शुरुआत अंगारी की 8 विधवा महिलाओं के एक विशेष ग्रुप से हुई है। समाज में इन महिलाओं को किसी भी प्रकार की झिझक या हीनभावना न हो, इसे ध्यान में रखते हुए संस्था ने इस ग्रुप में 4 अन्य शादीशुदा महिलाओं को भी शामिल किया है। इन सभी 12 महिलाओं के लिए 21 दिवसीय सिलाई-कढ़ाई प्रशिक्षण (Training) शिविर की शुरुआत आज ‘बलुआ चक’ में की गई।

“शुरुआत में मदद मिलती है, बाद में सब छोड़ देते हैं” — डॉ. अजय कुमार सिंह

​इस बेहद भावुक और प्रेरणादायी अवसर पर जीवन जागृति सोसाइटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सिंह ने समाज के कड़वे सच को सामने रखा। उन्होंने कहा:

“हमारे समाज में ऐसी कई कम उम्र की विधवा महिलाएं हैं, जिनके पति का साया अचानक उठ गया और छोटे-छोटे बच्चों के साथ उनकी हंसती-खेलती जिंदगी बदहाल हो गई। शुरुआत में रिश्तेदार थोड़ी-बहुत मदद जरूर करते हैं, लेकिन समय बीतने के साथ वे पूरी तरह बेसहारा और असहाय हो जाती हैं।”

 

​डॉ. सिंह ने आगे कहा कि ऐसी कई परित्यक्ता महिलाएं भी हैं जिनके पति उन्हें छोड़कर कहीं गायब हो गए हैं, वे भी विधवा जैसा ही जीवन जीने को मजबूर हैं। साथ ही कई दिव्यांग महिलाएं जो शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद काम करने का जज्बा रखती हैं, उन सभी को इस अभियान से जोड़ा जा रहा है।

मजदूर नहीं, सेंटर की मालकिन होंगी महिलाएं!

​संस्था की यह योजना केवल ट्रेनिंग देने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके आगे का पूरा बिजनेस मॉडल तैयार है।

  • सेंटर की स्थापना: ट्रेनिंग पूरी होने के बाद ‘अंगारी’ में एक अत्याधुनिक सिलाई सेंटर स्थापित किया जाएगा।
  • क्या-क्या बनेगा: इस सेंटर पर टी-शर्ट, ट्राउजर, पेटीकोट, ब्लाउज, नाइटी और स्कूल ड्रेस जैसे रेडीमेड कपड़े तैयार किए जाएंगे।
  • मार्केटिंग और लाभांश: इन कपड़ों को सीधे मार्केट में सप्लाई किया जाएगा और बेचने के बाद जो भी मुनाफा (Profit) होगा, उसे सीधे इन महिलाओं के बीच बांट दिया जाएगा। यानी ये महिलाएं यहाँ किसी की मजदूर नहीं, बल्कि खुद इस सेंटर की मालकिन होंगी।

ब्लॉक से लेकर पूरे राज्य तक फैलेगा यह मॉडल: ‘मजदूर नहीं, होनहार बनेंगे बच्चे’

​जीवन जागृति सोसाइटी का विजन बेहद बड़ा है। डॉ. अजय कुमार सिंह ने बताया कि एक जगह इस केंद्र के सफलतापूर्वक संचालित होने के बाद, योजना के पहले चरण में एक प्रखंड (Block) के भीतर ऐसे 4 सेंटर खोले जाएंगे। इसके बाद इस मॉडल का विस्तार पूरे जिले और फिर पूरे राज्य में किया जाएगा।

​इस योजना का मुख्य उद्देश्य समाज की लाचार और विवश महिलाओं को ‘अबला से सबला’ बनाना है, ताकि उनके खोए हुए सपने फिर से सच हो सकें। सबसे बड़ी बात यह है कि आर्थिक तंगी के कारण इन महिलाओं के बच्चे कल को मजबूर होकर बाल-मजदूर न बनें, बल्कि पढ़-लिखकर गांव और देश के होनहार युवक बनें।

चेहरे पर लौटी मुस्कान: नीलम, गुड़िया, सजनी और हीना ने संभाली कमान

​प्रशिक्षण के पहले दिन नीलम देवी, गुड़िया देवी, सजनी देवी (1), हीना कुमारी और सजनी देवी (2) ने बेहद उत्साह के साथ अपनी ट्रेनिंग की शुरुआत की। अपनों को खोने के गम के बीच, आत्मनिर्भर बनने की इस नई राह को पाकर इन महिलाओं के चेहरे पर खुशी और आत्मविश्वास का भाव साफ झलक रहा था। संस्था के अनुसार, आने वाले दिनों में चिन्हित की गई अन्य महिलाएं भी इस ग्रुप से जुड़कर अपने सुनहरे भविष्य की सिलाई करेंगी।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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