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नवगछिया: रंगरा में डिग्री कॉलेज शिफ्ट करने पर भड़के छात्र, शुरू हुआ आमरण अनशन; शिक्षा विभाग के फैसले पर गंभीर सवाल

​"प्रखंड मुख्यालय से छीनकर सुदूर दियारा भेजा गया भविष्य: बाढ़ और कटाव प्रभावित क्षेत्र में कॉलेज शिफ्ट होने से छात्राओं की सुरक्षा दांव पर, आर-पार की जंग शुरू।"

Bhagalpur News: बिहार सरकार द्वारा डिग्री कॉलेज विहीन प्रखंडों में उच्च शिक्षा पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना रंगरा प्रखंड में प्रशासनिक और राजनीतिक खींचतान की भेंट चढ़ती दिख रही है। रंगरा में डिग्री कॉलेज की स्थापना को लेकर विवाद अब इस कदर गहरा गया है कि छात्रों, युवाओं और ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के तुगलकी फैसले के खिलाफ आमरण अनशन का बिगुल फूंक दिया है। विभाग के एक नए आदेश ने सुगम क्षेत्र में खुल रहे कॉलेज को सुदूर दियारा में धकेल दिया है, जिससे हजारों गरीब छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक गया है।

पहले मुख्यालय में बंटी मिठाई, फिर अचानक बदल गई अधिसूचना

​पूरा मामला यह है कि पहले शिक्षा विभाग ने रंगरा प्रखंड मुख्यालय स्थित तेज नारायण उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में डिग्री कॉलेज स्थापित करने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू की थी। यहाँ तक कि प्रभारी प्राचार्य (Principal) की पदस्थापना हो चुकी थी और छात्रों के नामांकन (Admission) की प्रक्रिया भी गति पकड़ चुकी थी। लेकिन अचानक शिक्षा विभाग ने एक नई अधिसूचना जारी कर कॉलेज को यहाँ से हटाकर सुदूर दियारा क्षेत्र के संत विनोवा उच्च माध्यमिक विद्यालय, तिनटंगा में संचालित करने का तुगलकी निर्णय ले लिया। इस यू-टर्न से पूरे प्रखंड के छात्र ठगे से रह गए हैं।

करोड़ों का भवन बेकार, मॉडल स्कूल में जबरन कॉलेज खोलने की जिद क्यों?

​आंदोलनकारियों और ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षा विभाग का यह निर्णय पूरी तरह से अन्यायपूर्ण और किसी खास लॉबी के दबाव में लिया गया है। ग्रामीणों ने विभाग की मंशा पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं:

  • संसाधनों की अनदेखी: तेज नारायण उच्च माध्यमिक विद्यालय में पर्याप्त पक्के भवन, विशाल कमरे और कॉलेज संचालन के लिए सभी आवश्यक बुनियादी ढांचा (Infrastructure) पहले से मौजूद है।
  • भेदभाव का आरोप: दूसरी तरफ, संत विनोवा उच्च माध्यमिक विद्यालय पहले से ही एक ‘मॉडल स्कूल’ के रूप में अधिसूचित है। उसी परिसर के भीतर जबरन डिग्री कॉलेज को ठूंसना अन्य विद्यालयों और वहां पढ़ रहे बच्चों के साथ सीधा भेदभाव है।

बाढ़, कटाव और 14 किलोमीटर की दूरी: बेटियों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा

​आंदोलन कर रहे युवाओं ने बताया कि कॉलेज को स्थानांतरित करने से सबसे बड़ा झटका गरीब और विशेषकर छात्राओं को लगेगा। दोनों जगहों की भौगोलिक स्थिति में जमीन-आसमान का अंतर है:

  • मुख्यालय की सुगमता: तेज नारायण उच्च माध्यमिक विद्यालय प्रखंड मुख्यालय से मात्र डेढ़ किलोमीटर दूर है। यहाँ सड़क, रेल और बस जैसी बेहतरीन परिवहन सुविधाएं हैं। गरीब छात्र-छात्राएं यहाँ पैदल या साइकिल से भी आसानी से पहुंच सकते हैं।
  • दियारा का खौफ: इसके विपरीत, तिनटंगा स्थित संत विनोवा विद्यालय मुख्यालय से 12 से 14 किलोमीटर दूर सुदूर दियारा क्षेत्र में है। कई पंचायतों से इसकी दूरी 17 किलोमीटर तक हो जाती है। यह इलाका भीषण गंगा कटाव और बाढ़ प्रभावित क्षेत्र है। बरसात और बाढ़ के दिनों में यहाँ का संपर्क पूरी तरह कट जाता है, जिससे साल में कई महीने पढ़ाई पूरी तरह ठप रहने की आशंका है।

“आर-पार की लड़ाई”: जब तक आदेश रद्द नहीं होगा, अनशन खत्म नहीं होगा

​प्रखंड मुख्यालय में उच्च शिक्षा के इस एकमात्र साधन को छीने जाने से नाराज युवाओं ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन अब थमने वाला नहीं है। अनशन स्थल पर डटे छात्रों का कहना है कि सरकार एक तरफ ‘बेटी पढ़ाओ’ का नारा देती है, वहीं दूसरी तरफ बेटियों को 14 किलोमीटर दूर असुरक्षित दियारा क्षेत्र में पढ़ने भेजने का आत्मघाती फैसला ले रही है।

​ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक शिक्षा विभाग इस जनविरोधी अधिसूचना को वापस लेकर तेज नारायण विद्यालय में कॉलेज का सुचारू संचालन शुरू नहीं करता, तब तक उनका आमरण अनशन और उग्र आंदोलन जारी रहेगा।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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