श्रावणी मेला 2025 की शुरुआत भले ही 11 जुलाई से होनी है, लेकिन भक्तों की आस्था ने एक बार फिर समय की सीमाओं को पीछे छोड़ दिया है। सुल्तानगंज घाट इन दिनों श्रद्धालुओं से गुलजार है, और हर तरफ “बोल बम” और “हर-हर महादेव” की गूंज सुनाई दे रही है। इसी आस्था की मिसाल बने हैं मुजफ्फरपुर के कांवरिया मिथिलेश कुमार, जिन्होंने अपनी मन्नत पूरी होने के बाद एक अनोखी यात्रा की शुरुआत की है।
मिथिलेश ने अपने छोटे भाई के लिए बेटी की प्राप्ति की मन्नत बाबा बैद्यनाथ से मांगी थी, जो अब पूरी हो गई है। मन्नत पूरी होने पर वे पूरे परिवार के साथ बाबा धाम देवघर तक कांवर यात्रा पर निकले हैं। खास बात यह है कि मिथिलेश अपने तीन छोटे बच्चों को एक विशेष रूप से तैयार डोली में बैठाकर इस यात्रा पर ले जा रहे हैं। यह डोली उन्होंने खुद बनवाई है और उसे अपने कंधे पर उठाकर पैदल यात्रा कर रहे हैं।
यात्रा में मिथिलेश के साथ उनकी पत्नी रेखा देवी, भाभी रेशु देवी और तीन छोटे बच्चे भी शामिल हैं। उनका यह जत्था नवादा, शेखपुरा, लखीसराय और जमुई होते हुए देवघर पहुंचेगा, जहां वे 14 जुलाई को बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करेंगे।
मिथिलेश का कहना है:
“यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मेरी श्रद्धा, आस्था और बाबा के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। बच्चों को साथ लेकर चलना मेरे लिए सौभाग्य की बात है।“
इस अनूठी यात्रा ने न केवल अन्य कांवरियों को प्रेरित किया है, बल्कि यह बताता है कि सच्ची श्रद्धा में जब मन्नत पूरी होती है, तो वह सामान्य परंपरा से ऊपर उठकर एक गहरी भावनात्मक अनुभूति बन जाती है।

