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बिहार के हर जिले में ‘चलते-फिरते ICU’ जैसी ALS एंबुलेंस: गंभीर मरीजों को गोल्डन ऑवर में मिलेगी उन्नत इलाज सुविधा

आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की बड़ी पहल — वेंटिलेटर, कार्डियक मॉनिटर और डिफिब्रिलेटर से लैस एएलएस एंबुलेंस हर जिले में होगी उपलब्ध

Patna News: बिहार में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक आधुनिक व प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के प्रत्येक जिले में एडवांस लाइफ सपोर्ट (ALS) एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य गंभीर मरीजों को ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर जीवनरक्षक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है, ताकि अस्पताल पहुंचने से पहले ही प्राथमिक उन्नत इलाज शुरू हो सके।
‘चलते-फिरते ICU’ जैसी सुविधा
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया कि एनडीए सरकार के नेतृत्व में स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है। एएलएस एंबुलेंस गंभीर रूप से बीमार या घायल मरीजों के लिए चलते-फिरते आईसीयू की तरह काम करेगी। इससे दिल का दौरा, सांस लेने में तकलीफ, गंभीर दुर्घटना या अन्य जटिल स्थितियों में मरीजों को तत्काल उन्नत चिकित्सा सहायता मिल सकेगी।
उन्नत उपकरणों से लैस एंबुलेंस
इन एएलएस एंबुलेंस में उपलब्ध होंगी:
वेंटिलेटर
कार्डियक मॉनिटर
डिफिब्रिलेटर
जीवन रक्षक दवाएं
प्रशिक्षित पैरामेडिक्स और चिकित्सकीय स्टाफ
इन सुविधाओं के माध्यम से मरीज को अस्पताल पहुंचने तक वह सभी आवश्यक जीवनरक्षक उपचार दिए जा सकेंगे, जो उसकी जान बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
ग्रामीण और छोटे जिलों को बड़ी राहत
अब तक एमआरआई जैसी कई उन्नत सुविधाएं मुख्य रूप से मेडिकल कॉलेजों तक सीमित थीं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। एएलएस एंबुलेंस के जिला और प्रखंड स्तर तक संचालन से मरीजों को उच्चतर चिकित्सा संस्थानों तक सुरक्षित और त्वरित रेफरल सुविधा मिलेगी।
एंबुलेंस बेड़े का विस्तार
राज्य में फिलहाल 1941 एंबुलेंस संचालित हैं। जल्द ही 124 नई एंबुलेंस जोड़ी जाएंगी, जिससे कुल संख्या बढ़कर 2065 हो जाएगी। आपातकालीन स्थिति में टोल फ्री नंबर 102 के माध्यम से निःशुल्क एंबुलेंस सेवा उपलब्ध है।
आंकड़ों के अनुसार:
वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14,30,373 मरीजों ने इस सेवा का लाभ उठाया।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में जनवरी तक 15,94,220 मरीज मुफ्त एंबुलेंस सेवा का उपयोग कर चुके हैं।
स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल राज्य के आपातकालीन स्वास्थ्य तंत्र को नई मजबूती देगी। गोल्डन ऑवर में उन्नत उपचार उपलब्ध होने से मृत्यु दर में कमी आने की उम्मीद है।
बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में यह कदम मील का पत्थर साबित हो सकता है।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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