Bhagalpur News: भागलपुर में विकास कार्यों के बीच स्थानीय जनता और प्रशासन के बीच टकराव के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला नगर निगम के वार्ड संख्या 23 अंतर्गत दुर्गाबाड़ी मसाकचक इलाके का है, जहाँ नाला निर्माण को लेकर विवाद अब काफी गहरा गया है। इलाके की एक स्थानीय महिला ने प्रशासनिक अधिकारियों पर एकतरफा कार्रवाई करने और बातचीत के दौरान दुर्व्यवहार करने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में आक्रोश है और लोग निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
🏗️ पानी निकासी की व्यवस्था नहीं, घर के ठीक सामने चैंबर बनाने का विरोध
मिली जानकारी के अनुसार, मसाकचक इलाके में इस समय नगर निगम की ओर से नाला निर्माण का कार्य कराया जा रहा है। स्थानीय निवासी आकांक्षा सिंह का आरोप है कि निर्माण एजेंसी द्वारा कार्य तो शुरू कर दिया गया, लेकिन पानी की सही निकासी के लिए कोई वैकल्पिक या उचित व्यवस्था नहीं की गई।
इसके साथ ही, ठेकेदार और कर्मियों द्वारा उनके घर के ठीक सामने नाले का मुख्य चैंबर बनाने की तैयारी की जा रही थी। घर के ठीक आगे चैंबर बनने से भविष्य में होने वाली गंदगी और दुर्गंध की आशंका को देखते हुए आकांक्षा सिंह और उनके परिवार ने इसका कड़ा विरोध किया।
🛑 शिकायत के बाद दोबारा शुरू हुआ काम, कार्यालय में बदसलूकी का आरोप
पीड़िता आकांक्षा सिंह ने बताया कि समस्या को लेकर उन्होंने पहले नगर निगम प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लिखित शिकायत की थी। शिकायत के बाद अधिकारियों के हस्तक्षेप से कुछ समय के लिए निर्माण कार्य को रोक भी दिया गया था। लेकिन, कुछ ही दिनों बाद निर्माण एजेंसी की ओर से बिना किसी सुधार के दोबारा काम शुरू करने का दबाव बनाया जाने लगा।
मामला तब और बिगड़ गया जब इस विवाद को सुलझाने के लिए पीड़ित परिवार को कार्यालय बुलाया गया। पीड़िता का आरोप है कि बंद कमरे में बातचीत के दौरान उनके साथ बेहद अभद्र और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किया गया। हद तो तब हो गई जब उनके बुजुर्ग पिता अपनी बात रखने के लिए आगे बढ़े, तो उन्हें भी बात सुने बिना कमरे से बाहर कर दिया गया। प्रशासनिक स्तर पर हुए इस व्यवहार से पीड़ित परिवार बेहद आहत है।
🔍 निष्पक्ष जांच की मांग, इलाके में प्रशासनिक कार्यशैली पर उठे सवाल
इस घटना के बाद से दुर्गाबाड़ी मसाकचक इलाके के स्थानीय लोग पीड़ित परिवार के समर्थन में उतर आए हैं। मोहल्ले वासियों का कहना है कि विकास के नाम पर आम नागरिकों को प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए। पीड़ित परिवार और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने अब पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इधर, नगर निगम के अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की इस कार्यशैली को लेकर पूरे शहर और सोशल मीडिया पर चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जनसमस्याओं को सुनने के बजाय आम जनता के साथ ऐसा व्यवहार कहाँ तक उचित है?


