
पटना: बिहार सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, विधिसम्मत और न्यायोचित बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। इसी क्रम में आज पुराना सचिवालय, पटना के सभागार में अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर एक उच्चस्तरीय संक्षिप्त प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की, जबकि सह-अध्यक्षता महानिदेशक सह मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने निभाई।
इस प्रशिक्षण सत्र में विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, राजस्व परिषद की अध्यक्ष सह सदस्य हरजोत कौर बम्हरा, अपर मुख्य सचिव (सामान्य प्रशासन विभाग) डॉ. बी. राजेंदर, अपर मुख्य सचिव (गृह विभाग) अरविंद कुमार चौधरी सहित राज्य सरकार के कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक में प्रशासनिक अनुशासन से जुड़े मामलों में अक्सर होने वाली प्रक्रियागत त्रुटियों और उनके समाधान पर गंभीर मंथन किया गया।
सत्र को संबोधित करते हुए महानिदेशक सह मुख्य जांच आयुक्त दीपक कुमार सिंह ने बताया कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी सभी परिपत्रों को संकलित कर अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित एक मास्टर सर्कुलर जारी किया गया है। इसके साथ ही संविधान के अनुच्छेद 311, उच्च न्यायालयों एवं सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णयों को सम्मिलित करते हुए एक विस्तृत पुस्तक का संकलन भी किया गया है, ताकि अधिकारियों को जांच और दंड प्रक्रिया की सम्यक समझ हो सके।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि किसी भी अनुशासनात्मक जांच की शुरुआत में सही शब्दावली और विधिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है। अधिकारियों को आगाह किया गया कि बिना आरोप-पत्र गठित किए सीधे लघु दंड देना, प्रतिरक्षा कथन पर अनुशासनिक प्राधिकारी की राय लेना या दंड, निलंबन अवधि और भत्तों से जुड़े आदेश एक ही संकल्प में जारी करना गंभीर प्रक्रियागत त्रुटियां हैं।
यह भी स्पष्ट किया गया कि स्तर-9 एवं उससे ऊपर के पदाधिकारियों के मामलों में दंडादेश जारी करने से पूर्व बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) से परामर्श लेना अनिवार्य है। साथ ही, प्रस्तुतिकरण पदाधिकारी की नियुक्ति में होने वाली आम गलतियों पर भी अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट किया गया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य यह रहा कि राज्य में अनुशासनात्मक कार्रवाई न केवल प्रभावी हो, बल्कि न्याय और पारदर्शिता के मूल सिद्धांतों के अनुरूप भी हो। सरकार का मानना है कि ऐसी प्रशिक्षण बैठकों से भविष्य में प्रशासनिक त्रुटियों में कमी आएगी और सुशासन को और मजबूती मिलेगी।






