Bhagalpur News: विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले के आधिकारिक आगाज में अभी भले ही 11 दिन का समय शेष है, लेकिन सुल्तानगंज के उत्तरवाहिनी गंगा तट और बाबा अजगैविनाथ धाम में अभी से ही सावन की अद्भुत छटा बिखरने लगी है। पड़ोसी देश नेपाल और पश्चिम बंगाल में 17 जुलाई से श्रावण माह की शुरुआत होते ही उत्तरवाहिनी गंगा घाट पर कांवड़ियों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा है। ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के गगनभेदी जयघोष के साथ श्रद्धालु गंगा जल भरकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर कूच कर रहे हैं।
लेकिन, इस भारी भीड़ के बीच ही सुल्तानगंज में प्रशासनिक तैयारियों की जमीनी हकीकत और दावों की पोल खुलती नजर आ रही है।
लाइट की मुकम्मल व्यवस्था नहीं, अंधेरे में स्नान करने को मजबूर श्रद्धालु
स्थानीय पुजारियों और देश-विदेश से पहुंच रहे श्रद्धालुओं का आरोप है कि बंगाल और नेपाल में सावन शुरू होने के कारण कांवड़ियों की संख्या में लगातार भारी बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन प्रशासन की तरफ से अब तक बुनियादी सुविधाएं भी पूरी नहीं की जा सकी हैं।
सबसे बड़ी समस्या रोशनी (लाइटिंग) की है। गंगा घाटों से लेकर कच्ची कांवड़िया पथ तक अभी तक पर्याप्त लाइट की व्यवस्था नहीं की गई है। इसके चलते तड़के सुबह या देर शाम आने वाले श्रद्धालुओं को घने अंधेरे के बीच ही गंगा नदी में स्नान करना पड़ रहा है और अंधेरे में ही अपनी कठिन यात्रा की शुरुआत करनी पड़ रही है, जिससे हादसों का डर बना हुआ है।
पंडा समाज ने जताई नाराजगी, उठाए व्यवस्था पर सवाल
अजगैविनाथ धाम के स्थानीय पंडा समाज ने भी इस कुव्यवस्था को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
“बंगाल और नेपाल के श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया है, लेकिन घाटों पर न तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम दिख रहे हैं और न ही रोशनी की। मेला सिर पर है और व्यवस्थाएं अभी भी अधूरी हैं।”
— चुन्नू मुन्नू लाल मौहरिया (पंडा, सुल्तानगंज, भागलपुर)
प्रशासन का दावा: ‘युद्ध स्तर पर चल रहा है काम’
दूसरी ओर, इन तमाम शिकायतों और उठते सवालों के बीच जिला प्रशासन अपनी पीठ थपथपाने में जुटा है। प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि राजकीय श्रावणी मेले की तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं। गंगा घाट से लेकर कांवड़िया पथ तक श्रद्धालुओं की हर सुविधा के लिए लगातार काम किए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए बचे हुए कामों को तेजी से पूरा कर व्यवस्थाओं को और भी चाक-चौबंद बना लिया जाएगा।
अब देखना यह होगा कि महज 11 दिन बाद शुरू होने वाले इस ऐतिहासिक मेले से पहले प्रशासन का यह ‘युद्ध स्तर’ का काम धरातल पर कब तक उतर पाता है, ताकि बाबा के दर पर आने वाले श्रद्धालुओं को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े।


