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बिहार राज्यसभा चुनाव 2026: एनडीए का शक्ति प्रदर्शन, नीतीश समेत 5 दिग्गजों ने भरा नामांकन

पटना में नामांकन के दौरान एनडीए की एकजुटता का बड़ा संदेश — केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी ने बढ़ाई सियासी हलचल

Patna News: बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी तापमान चरम पर है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की ओर से गुरुवार को पांच प्रमुख नेताओं ने नामांकन दाखिल कर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी। जदयू से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, भाजपा की ओर से राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और शिवेश कुमार, तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा ने राज्यसभा के लिए अपना-अपना पर्चा दाखिल किया।
नामांकन के दौरान शक्ति प्रदर्शन
नामांकन प्रक्रिया के दौरान पटना में एनडीए ने जबरदस्त शक्ति प्रदर्शन किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को और भी अहम बना दिया। उनके साथ केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
इसके अलावा जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी, ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और लोजपा (रामविलास) के सांसद अरुण भारती समेत कई सांसद, विधायक और विधान पार्षद उपस्थित रहे।
सियासी मायने: क्या संकेत दे रहा है यह फैसला?
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राज्यसभा के लिए नामांकन बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव की आहट माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आगामी विधानसभा चुनाव और केंद्र-राज्य की सियासत में नई रणनीति का हिस्सा हो सकता है। वहीं भाजपा द्वारा अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष को उम्मीदवार बनाना भी संगठनात्मक मजबूती और गठबंधन के भीतर संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
उपेन्द्र कुशवाहा की उम्मीदवारी से एनडीए ने ओबीसी और कुशवाहा वोट बैंक को मजबूत संदेश देने की कोशिश की है, जबकि रामनाथ ठाकुर की मौजूदगी सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
विपक्ष पर दबाव
एनडीए के इस सामूहिक नामांकन ने विपक्ष पर भी मनोवैज्ञानिक दबाव बना दिया है। बड़ी संख्या में केंद्रीय और प्रदेश स्तर के नेताओं की मौजूदगी ने साफ संकेत दिया कि गठबंधन इस चुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देख रहा है।
आगे क्या?
अब निगाहें मतदान प्रक्रिया और संभावित राजनीतिक समीकरणों पर टिकी हैं। यदि सभी प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए जाते हैं, तो यह एनडीए की रणनीतिक जीत मानी जाएगी। वहीं विपक्ष की ओर से संभावित रणनीति भी आने वाले दिनों में तस्वीर साफ करेगी।

विजय सिन्हा
विजय सिन्हाhttp://silktvnews.com
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