
भागलपुर: एक ओर जहां भागलपुर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के दावे किए जा रहे हैं, वहीं ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। नगर निगम की लापरवाही के कारण शहरवासी नारकीय हालात में जीने को मजबूर हैं। वार्ड संख्या 38 इसका सबसे बड़ा उदाहरण बन चुका है, जहां गंदगी और जलजमाव ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है।
लोहापट्टी चौक पर गंदगी का अंबार, कीचड़ और सड़ांध से भरी सड़कों ने इलाके को ‘बीमार मोहल्ला’ में बदल दिया है। हल्की बारिश में ही यह इलाका तालाब में तब्दील हो जाता है। राहगीरों को पैदल चलना भी भारी पड़ रहा है, आए दिन कोई न कोई दुर्घटना का शिकार हो रहा है।
स्थानीय भाजपा नेता दिलीप मिश्रा ने वार्ड 38 का दौरा कर नगर निगम की कार्यशैली पर कड़ी नाराज़गी जाहिर की। उन्होंने कहा:
“भागलपुर को स्मार्ट सिटी बनाने की बात करना एक दिखावा मात्र है। वार्ड 38 की स्थिति देखकर लगता है कि नगर निगम खुद शहर को नरक में बदलने पर तुला हुआ है। जनता त्रस्त है और जिम्मेदार लोग मौन हैं।”
– दिलीप मिश्रा, बीजेपी नेता
स्थानीय निवासियों ने भी बताया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं आता, न ही सफाई की समुचित व्यवस्था है।
इस स्थिति को देखकर यह सवाल उठना लाजिमी है:
क्या भागलपुर वाकई स्मार्ट सिटी है, या फिर सिर्फ कागज़ों पर?





