
Bhagalpur News: साइबर अपराध पर नकेल कसने की पुलिस की मुहिम को बड़ी सफलता मिली है। भागलपुर पुलिस ने साइबर थाना कांड संख्या 36/24 के अत्यंत वांछित साइबर अपराधी को तकनीकी निगरानी के आधार पर राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी लंबे समय से फरार चल रहा था और डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड जैसे गंभीर अपराध में शामिल था। पुलिस की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि साइबर अपराधी चाहे कहीं भी छिप जाएँ, कानून के शिकंजे से बच नहीं सकते।
🚔 कैसे हुई कार्रवाई
भागलपुर पुलिस की साइबर सेल पिछले कई सप्ताह से आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी। डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड में शामिल इस आरोपी ने लोगों को सरकारी एजेंसी या पुलिस अधिकारी बनकर फोन किया था, उन्हें फर्जी आरोपों में “डिजिटल गिरफ्तारी” की धमकी दी और फिर ठगी की कोशिश की थी।
पुलिस ने कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल लोकेशन और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन जैसी तकनीकी सूचनाओं का विश्लेषण किया। इसी के आधार पर आरोपी के राजस्थान में छिपे होने का पता लगा। स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी को गिरफ्तार कर भागलपुर लाया गया।
📁 क्या है डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड?
यह वह मॉडर्न साइबर ठगी है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI, या अन्य सरकारी अफसर बताकर पीड़ित को डराते हैं।
- कहते हैं कि आपका नाम किसी अपराध में है
- वीडियो कॉल पर “जांच” का नाटक करते हैं
- फिर पैसा ट्रांसफर करने, बैलेंस बताने या अकाउंट कंट्रोल देने की मांग करते हैं
देशभर में बढ़ रहे इन मामलों को देखते हुए पुलिस लगातार लोगों को जागरूक कर रही है।
📌 आगे की कार्रवाई
भागलपुर पुलिस ने बताया कि
- आरोपी से विस्तृत पूछताछ की जा रही है
- गिरोह के अन्य सदस्यों की भी पहचान की जा रही है
- ठगी गई राशि और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच जारी है
पुलिस को उम्मीद है कि यह गिरफ्तारी पूरे गिरोह को पकड़ने की दिशा में बड़ी सफलता साबित होगी।
⚠️ जनता के नाम महत्वपूर्ण सलाह
- किसी भी कॉल/वीडियो कॉल पर पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर धमकाया जाए — तुरंत कॉल काटें
- किसी को OTP, बैंक विवरण, UPI PIN या पासवर्ड न दें
- संदिग्ध कॉल की तुरंत सूचना साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें
भागलपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ “ज़ीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई गई है। यह गिरफ्तारी उसी का सशक्त संदेश है।




